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Monday, 20 April, 2026
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उपराष्ट्रपति ने बैसाखी, पुथंडु, विशु, बोहाग बिहू पर्वों के अवसर पर देशवासियों को बधाई दी

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नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बृहस्पतिवार को बैसाखी, विशु, पुथंडु, मसादी और बोहाग बिहू पर्वों की बृहस्पतिवार को देशवासियों को शुभकामनायें देते हुये इन त्योहारों को भारत की विविध संस्कृति व परंपराओं का अभिन्न अंग और एकता, सद्भाव व भाईचारे की भावना का प्रतीक बताया।

उन्होंने अपने संदेश में कहा, ‘‘मैं बैसाखी, मेशादी, पुथंडु, विशु, नबा बर्ष और बोहाग बिहू की खुशी के अवसर पर अपने सभी नागरिकों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।’’

ये त्योहार पारम्परिक नव वर्ष के शुभारंभ के अवसर पर मनाये जाते हैं और हमारे देश की सामासिक संस्कृति और समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं।

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लोग ‘उगादि’ और कर्नाटक में ‘युगादी’ के नाम से इस त्यौहार को मनाते हैं। महाराष्ट्र में इसे ‘गुड़ी पड़वा’ और तमिलनाडु में ‘पुथांडु’ के नाम से यह त्यौहार मनाया जाता है। केरल में हमारे मलियाली भाई-बहन इसे ‘विशु’ और पंजाब में ‘वैशाखी’ के नाम से इस उत्सव को मनाते हैं। ओडिशा में इसे ‘पणा संक्राति’ के नाम से मनाया जाता है। पश्चिमी बंगाल में ‘पोइला बोइशाख’ और असम में ‘बोहाग बिहू’ नव वर्ष के आगमन का प्रतीक है।

इस त्यौहार का आयोजन अलग-अलग नामों से किया जाता है, लेकिन उल्लास, उमंग और घनिष्ठता की भावना से परिपूर्ण उत्सव का माहौल हर जगह एक समान होता है।

धनखड़ ने कहा, ‘‘देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाए जाने वाले ये त्यौहार हमारी विविध संस्कृति और परंपराओं का एक अभिन्न अंग हैं, जो एकता, सद्भाव और भाईचारे की भावना का प्रतीक हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जैसा कि हम प्रकृति की बहुतायत और एक भरपूर फसल के आशीर्वाद का जश्न मनाते हैं, हमें प्रकृति के साथ अपने संबंधों और हमें लंबे समय बनाए रखने वाले प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित और संरक्षित करने की अपनी जिम्मेदारी पर एक क्षण विचार करना चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमें गहरे सम्मान और कृतज्ञता के साथ अपने किसानों के समर्पण को भी स्वीकार करना चाहिए, जो हमें भोजन और पोषण प्रदान करने के लिए अथक परिश्रम करते हैं।’’

उल्लेखनीय है कि फसल पक कर तैयार होने के जश्न से जुड़े ये त्यौहार देश के विभिन्न भागों में अलग-अलग नाम से मनाये जाते हैं। विभिन्न राज्यों में ये पर्व शुक्रवार को मनाये जायेंगे।

हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को नववर्ष शुरू होता है। इस बार हिंदू नववर्ष, 13 अप्रैल से शुरू हो रहा है।

धनखड़ ने कहा, ‘‘इस शुभ अवसर पर, आइए हम अपने महान राष्ट्र को परिभाषित करने वाली एकता, विविधता और समावेशिता के मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करें। आइए हम अपने मतभेदों को भुलाकर जश्न मनाएं और अपनी साझा मानवता को गले लगाएं। ये त्यौहार सभी के लिए आनंद, खुशी और समृद्धि लेकर आएं।’’

भाषा ब्रजेन्द्र अर्पणा

अर्पणा

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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