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Friday, 23 October, 2026
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दाऊद की डी-कंपनी को ‘‘भारत स्थित’’ आपराधिक गिरोह बताने पर विहिप ने संरा की आलोचना की

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नयी दिल्ली, 23 अक्टूबर (भाषा) विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने संयुक्त राष्ट्र के एक विशेष प्रतिवेदक द्वारा गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी को ‘‘भारत स्थित’’ आपराधिक गिरोह बताए जाने पर शुक्रवार को आपत्ति जताते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने कई बार‘‘भारत विरोधी बयान’’ देकर अपनी विश्वसनीयता खो दी है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संगठन विहिप ने प्रवासियों के मानवाधिकारों पर एक रिपोर्ट में भारत के बारे में की गई ‘‘अमर्यादित’’ टिप्पणियों को लेकर भी संयुक्त राष्ट्र की आलोचना की।

‘आतंकवाद से निपटने के दौरान मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता के संवर्धन एवं संरक्षण’ के मामलों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक बेन सॉल ने दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी को ‘‘भारत स्थित’’ आपराधिक गिरोह बताया था।

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि संयुक्त राष्ट्र को यह पता होने के बावजूद कि दुनिया का अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में छिपा है और वहीं से अपनी गतिविधियां चला रहा है, वह डी-कंपनी को ‘भारत स्थित आपराधिक समूह’ बताकर शायद पाकिस्तान को बचाने का कुत्सित प्रयास कर रहा है।’’

उन्होंने कहा कि इससे संयुक्त राष्ट्र में अतिवादियों की पैठ के संकेत भी स्पष्ट रूप से नजर आते हैं।

बंसल ने कहा, ‘‘यह सभी को पता है कि 1993 के मुंबई बम धमाकों के सिलसिले में दाऊद भारत में एक वांछित अपराधी है और 2003 में संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल किए जाने से काफी पहले ही वह भारत से भाग चुका था। फिर भी भारत को बदनाम करने के षड्यंत्र जारी हैं।’’

भारत ने संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक द्वारा डी-कंपनी को भारत स्थित आपराधिक समूह बताए जाने को कड़ाई से खारिज किया है। भारत ने रिपोर्ट में ‘‘स्पष्ट रूप से गलत जानकारी’’ होने का मुद्दा उठाते हुए आगाह किया कि इस तरह की अक्षमता से संयुक्त राष्ट्र को भारी नुकसान पहुंचता है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में सॉल की रिपोर्ट पर भारत की ओर से जवाब देते हुए यह बात कही थी।

बंसल ने प्रवासियों के मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र की एक अन्य रिपोर्ट की भी आलोचना की और उसमें भारत के बारे में की गई टिप्पणियों को ‘‘अमर्यादित, अस्पष्ट और निराधार’’ बताया।

विदेश मंत्रालय में उप सचिव बरखा ताम्रकार ने प्रवासियों के मानवाधिकारों पर विशेष प्रतिवेदक के साथ संवाद सत्र के दौरान भारत का वक्तव्य प्रस्तुत किया था।ताम्रकार ने विशेष प्रतिवेदक की रिपोर्ट में भारत से संबंधित गलत जानकारियों का मुद्दा उठाया था।

उन्होंने कहा था, “इस रिपोर्ट में कानून, साक्ष्यों और सरकार की जिम्मेदारी से जुड़े मुद्दों को जिस तरह प्रस्तुत किया गया, भारत उस पर गंभीर चिंता दर्ज कराना चाहता है। किसी विषय पर आधारित रिपोर्ट में व्यापक नीतिगत प्राथमिकताओं, अपुष्ट आरोपों या पक्षकारों की ओर से दिए गए ज्ञापनों को संयुक्त राष्ट्र के स्थापित निष्कर्षों के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।”

बंसल ने हिंदुओं पर कथित हमलों को लेकर मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘‘ऐसी कथित मानवाधिकारवादी संस्थाओं के मुंह पर तब क्यों ताला लग जाता है, जब हिंदुओं के मानवाधिकार छीने जाते हैं, उनके घरों, दुकानों और आस्था केंद्रों पर जिहादियों, मिशनरियों और अन्य अतिवादियों द्वारा हमले किए जाते हैं?’’

उन्होंने कहा, ‘‘दोगला चरित्र अब ज्यादा नहीं चलेगा।’’

भाषा सिम्मी नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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