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Monday, 2 March, 2026
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वीबी-जीरामजी संविधान की आत्मा के खिलाफ: अरुणा रॉय

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जयपुर, दो फरवरी (भाषा) सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जीरामजी) को संविधान की आत्मा के खिलाफ बताते हुए सोमवार को कहा कि नया कानून ‘‘रोजगार के अधिकार को केंद्र सरकार की मर्जी पर निर्भर बना देता है।’’

रॉय यहां शहीद स्मारक पर कांग्रेस और विभिन्न संगठनों द्वारा आयोजित धरना-प्रदर्शन में शामिल हुईं। इस दौरान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की बहाली और वीबी-जीरामजी को रद्द करने की मांग को लेकर गीत गाकर और नृत्य कर विरोध जताया गया।

धरने में अरुणा रॉय के अलावा निखिल डे, कांग्रेस की जयपुर शहर इकाई के अध्यक्ष सुनील शर्मा, गोपाल शर्मा, पुष्पेंद्र भारद्वाज, अर्चना शर्मा, चाकसू से पूर्व विधायक वेदप्रकाश सोलंकी सहित कई कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।

इस मौके पर आयोजित मजदूर महापंचायत में अरुणा रॉय ने कहा, ‘‘वीबी-जीरामजी संविधान की आत्मा के खिलाफ है। मनरेगा ने पहली बार गांव के गरीब को राज्य से काम मांगने का अधिकार दिया था, लेकिन नया कानून उस अधिकार को छीनकर रोजगार को केंद्र सरकार की मर्जी पर निर्भर बना देता है। यह लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करता है और केंद्रीकृत नियंत्रण को बढ़ावा देता है।’’

निखिल डे ने कहा, ‘‘यह कानून रोजगार की गारंटी नहीं, बल्कि मजदूरों की असुरक्षा की गारंटी है। काम, मजदूरी और योजना—तीनों को ग्राम सभा और राज्यों से छीनकर केंद्र सरकार के नियंत्रण में सौंप दिया गया है। अब काम मांगना मजदूर का कानूनी अधिकार नहीं रहा, बल्कि रोजगार कब, कितना और किसे मिलेगा, यह केंद्र सरकार तय करेगी।’’

संसद के बीते शीतकालीन सत्र में मनरेगा के स्थान पर ‘विकसित भारत-जीरामजी विधेयक’ पारित किया गया था, जो अब कानून बन चुका है।

भाषा बाकोलिया खारी

खारी

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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