नई दिल्ली: उत्तराखंड पुलिस ने “अनुशासन, ईमानदारी और सेवा आचरण के नियमों का उल्लंघन” करने के आधार पर एक कांस्टेबल को बर्खास्त कर दिया है. यह कार्रवाई तब की गई जब वह पिछले महीने राष्ट्रीय राजधानी में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से आयोजित छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हुए थे.
पिथौरागढ़ पुलिस में कांस्टेबल के पद पर तैनात शेर सिंह को विभागीय जांच पूरी होने के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है. पिथौरागढ़ के पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रह्लाद कोंडे ने द प्रिंट को यह जानकारी दी.
24 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के मंच से CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को अपना बैज सौंपने के बाद शेर सिंह चर्चा में आए थे.
कोंडे ने एक बयान में कहा, “उत्तराखंड पुलिस की जीरो-टॉलरेंस नीति के तहत, पिथौरागढ़ जिले में तैनात कांस्टेबल शेर सिंह को अनुशासन, ईमानदारी और सेवा आचरण के नियमों का उल्लंघन करने के कारण कड़ी विभागीय कार्रवाई के बाद पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है.”
उन्होंने आगे कहा कि उपलब्ध सेवा रिकॉर्ड और विभागीय जांच के नतीजों की समीक्षा से पता चला कि सिंह की कार्रवाई “उत्तराखंड पुलिस अधिनियम, 2007 के तहत गंभीर कदाचार है और उत्तराखंड राज्य कर्मचारी आचरण नियम, 2002 के प्रावधानों का उल्लंघन है.”
एसपी ने अपने बयान में आगे कहा, “उत्तराखंड पुलिस ने साफ किया है कि विभागीय अनुशासन, सेवा आचरण या कानूनी प्रक्रिया से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. हर पुलिस अधिकारी और कर्मचारी से ईमानदारी, अनुशासन और जवाबदेही के सबसे ऊंचे मानकों को बनाए रखने की उम्मीद की जाती है. इन मानकों का उल्लंघन करने वाले किसी भी कर्मचारी के खिलाफ नियमों के अनुसार सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई जारी रहेगी.”
दीपके और प्रदर्शन स्थल पर मौजूद हजारों लोगों से बातचीत के दौरान शेर सिंह ने दावा किया था कि उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है. सिंह ने मंच से कहा था, “यह भगत सिंह का देश है और क्रांति विचारों से आती है और विचार कभी मरते नहीं हैं.” उन्होंने यह भी कहा था कि उन्होंने 15 दिन पहले ही नौकरी से इस्तीफा दे दिया था.
उत्तराखंड पुलिस ने तुरंत इसका खंडन करते हुए कहा था कि सिंह पहले से ही निलंबित थे. उन्हें स्वीकृत छुट्टी खत्म होने के बाद ड्यूटी पर नहीं आने के कारण निलंबित किया गया था और पिथौरागढ़ के एसपी ने उनसे इस बारे में जवाब मांगा था.
कुमाऊं रेंज की पुलिस महानिरीक्षक निवेदिता कुकरेती ने एक बयान जारी कर कहा था कि सिंह 28 जून से ड्यूटी से अनुपस्थित थे. इसके अलावा, आईजीपी ने बताया कि हरिद्वार में जमीन पर कब्जे से जुड़े एक मामले में सिंह को पहले गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: JPSC-JSSC विवाद: छात्रों की मांगें लेकर CM सोरेन से मिलेगा कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल