रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा प्रदर्शन तेज़ हो रहा है. इसी बीच कांग्रेस नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलने वाला है.
कांग्रेस झारखंड में झामुमो के नेतृत्व वाली सरकार की एक प्रमुख सहयोगी पार्टी है. सोरेन ने मंगलवार को पहली बार इस आंदोलन पर प्रतिक्रिया दी और छात्रों को भरोसा दिया कि उन्हें “न्याय” मिलेगा. वहीं, कांग्रेस नेतृत्व प्रदर्शन कर रहे छात्रों तक पहुंचने के लिए कदम उठाता दिख रहा है.
रांची जिला कांग्रेस के अध्यक्ष और एनएसयूआई के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कुमार राजा मंगलवार देर रात प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे. उन्होंने दिप्रिंट को बताया कि उन्होंने छात्रों की ओर से उठाए गए सभी मुद्दों को नोट किया है और इन्हें हल करने के लिए एक समिति बनाई है.
इस समिति में एआईसीसी के झारखंड प्रभारी के. राजू, झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, झारखंड की मौजूदा कैबिनेट में कांग्रेस के चार मंत्री—राधाकृष्ण किशोर, दीपिका पांडेय सिंह, इरफान अंसारी और शिल्पी नेहा तिर्की, कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप और खुद राजा शामिल हैं.
उन्होंने कहा, “हमने इस पर चर्चा की और उन मुद्दों का एक ज्ञापन तैयार किया, जो हमें सही लगे…यह सरकार के खिलाफ होने की बात नहीं है, हम छात्रों के साथ हैं.” राजा ने बताया कि एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ और भारतीय युवा कांग्रेस के दो सचिव भी बुधवार को प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने वाले हैं.
राजा मंगलवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे चार प्रदर्शनकारियों के लिए डॉक्टरों की एक टीम के साथ प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे थे. इन प्रदर्शनकारियों के अलावा झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JKLM) के नेता और छात्र कार्यकर्ता देवेंद्र नाथ महतो भी भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर भूख हड़ताल पर हैं.
राजा ने कहा कि वह प्रदर्शन स्थल पर छात्रों से लगातार मिल रहे हैं. राजा ने कहा, “हमने कहा है कि हमारे मुख्यमंत्री, हमारी सरकार, हमारा गठबंधन और हमारा नेतृत्व इन मुद्दों को लेकर संवेदनशील है और बच्चों को लेकर चिंतित है. हमने उनसे वादा किया कि हम एक प्रतिनिधिमंडल के साथ सीएम से मिलेंगे और छात्रों और सरकार के बीच पुल का काम करेंगे.”
उन्होंने आगे कहा, “हमें बातचीत में कमी नज़र आई…हम यहां के छात्रों को नजरअंदाज नहीं करना चाहते, जैसा कि दिल्ली में छात्रों को नज़रअंदाज़ किया गया.”
झारखंड के प्रदर्शन को कांग्रेस नेतृत्व और राहुल गांधी के समर्थन पर राजा ने कहा कि वह रांची में ‘छात्रों की गूंज’ के संयोजक थे. उन्होंने कहा, “इसलिए अगर मैं यहां हूं, तो आप समझ सकते हैं कि मैं नेतृत्व के समर्थन के साथ यहां हूं.”
उन्होंने आगे कहा, “हमारी पार्टी का रुख साफ है—हमें छात्रों के साथ खड़ा होना है, चाहे हम सत्ता में हों या नहीं. अगर कभी हमें सत्ता में रहने और छात्रों के बीच चुनाव करना पड़ा, तो हम हमेशा छात्रों के साथ खड़े होंगे.”
‘आउटसोर्सिंग नहीं, रिटायर्ड अधिकारी भी नहीं’
अपने ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों पर राजा ने कहा कि उन्होंने ऐसी परीक्षाएं कराने का काम अलग-अलग कंपनियों को “आउटसोर्स” किए जाने का मुद्दा उठाया है. उन्होंने कहा कि इन परीक्षाओं को कराने के लिए सरकार के पास खुद का एक “तय सिस्टम” होना चाहिए. इसके अलावा, उन्होंने कहा कि आमतौर पर इन आयोगों की जिम्मेदारी रिटायर्ड अधिकारियों के पास होती है, जबकि ऐसे मामलों में अभी सेवा में काम कर रहे सरकारी अधिकारी ज्यादा जवाबदेह हो सकते हैं.
उन्होंने कहा, “छात्र सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं, लेकिन सीबीआई अभी भी जेपीएससी की पहली और दूसरी परीक्षा की जांच कर रही है और इसका कोई नतीजा नहीं आया है.”
राजा ने पिछले कुछ दिनों में सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के बारे में भी बताया. इनमें कई कोचिंग सेंटरों पर कई जगह छापेमारी, पूर्व मुख्य सचिव और जेपीएससी अध्यक्ष एल खियांग्ते का इस्तीफा, आरोपों के संबंध में कई लोगों की गिरफ्तारी और 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा (JPSC CSE) की मेन्स परीक्षा को टालना शामिल है.
उन्होंने कहा, “ज़रूरत पड़ी तो हम परीक्षा रद्द भी करेंगे.” उन्होंने आगे कहा, “हमारी सरकार लगातार इस मामले को देखने की कोशिश कर रही है.”
‘एक दिन का गुस्सा नहीं’
दिप्रिंट से बात करते हुए राजा ने जोर देकर कहा कि यह एक दिन का गुस्सा नहीं है. उन्होंने झारखंड में पहले की बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकारों पर राज्य में कई साल तक परीक्षाओं में देरी करने का आरोप लगाया.
उन्होंने कहा, “हमारी कोशिश यह थी कि जो परीक्षा पटरी से उतर गई है, उसे वापस पटरी पर लाया जाए, लेकिन अगर आप हमें उलझा हुआ धागा देते हैं, तो उसे सुलझाने में थोड़ा समय लगता है.”
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