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Wednesday, 5 August, 2026
होमडिफेंस‘जब पाकिस्तान ने सीजफायर मांगा, हमने उसे इंतज़ार कराया’—जनरल अनिल चौहान

‘जब पाकिस्तान ने सीजफायर मांगा, हमने उसे इंतज़ार कराया’—जनरल अनिल चौहान

10 मई 2025 को सुबह करीब 9:30 बजे पाकिस्तान ने भारत से संपर्क किया था, लेकिन भारतीय DGMO ने दोपहर में ही बात की, हाल ही में रिटायर हुए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान ने दिप्रिंट के ‘ऑफ द कफ’ में बताया.

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नई दिल्ली: दस मई 2025 की सुबह पाकिस्तान ने डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) हॉटलाइन के जरिए सीजफायर की मांग करते हुए भारत से संपर्क किया था. इसके बावजूद भारत ने जानबूझकर इस्लामाबाद को उस दिन दोपहर तक इंतज़ार कराया क्योंकि “हमारे आधे से ज्यादा तय हमले अभी भी नहीं हुए थे.” हाल ही में रिटायर हुए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने यह जानकारी दी है.

दिप्रिंट के प्रमुख प्रोग्राम ‘ऑफ द कफ’ में ऑपरेशन सिंदूर के बारे में बात करते हुए जनरल चौहान ने कहा कि भारत तब तक अभियान रोकने के लिए तैयार नहीं था, जब तक उसे सैन्य रूप से निर्णायक नतीजा हासिल नहीं हो जाता.

उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने सीजफायर मांगने का फैसला इस सोच के कारण लिया था कि उसके भारत में किए गए हमले सफल रहे हैं और वह चाहता था कि भारत के आगे हमला करने से पहले स्थिति को वहीं रोक दिया जाए. इसी दौरान, इस्लामाबाद ने 9 मई की रात और 10 मई की सुबह भारतीय वायुसेना (IAF) के हमलों का असर भी देखा था. इसलिए उसने संघर्ष को खत्म करने की मांग की, इससे पहले कि भारत उसे और नुकसान पहुंचा पाता.

हालांकि, भारत के सैन्य नेतृत्व ने उस दिन हमलों की और लहरों की पहले ही योजना बना रखी थी, ताकि यह दिखाया जा सके कि पाकिस्तान में कोई भी सैन्य ठिकाना भारत की पहुंच से बाहर नहीं है.

ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़े आश्चर्य के बारे में पूछे जाने पर जनरल चौहान ने कहा, “मेरे लिए सबसे बड़ी हैरानी 10 मई को थी, जब पाकिस्तान ने फोन उठाया और कहा कि वे बात करना चाहते हैं. ऐसा इसलिए था क्योंकि 9 मई को उनकी तरफ से जिस तरह की बातें सामने आ रही थीं, उनमें कहा जा रहा था कि वे 48 घंटे में भारत को सबक सिखा देंगे. करीब आठ घंटे के अंदर ही उन्होंने फोन उठा लिया. हमने अपनी योजना का आधा हिस्सा भी लागू नहीं किया था.”

जनरल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान CDS के रूप में इसकी कमान संभाली थी.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के संपर्क करने के समय भारत का अभियान अभी भी जारी था. “मुझे लगता है कि यह सबसे बड़ा आश्चर्य था. दूसरी बात, जो शायद कोई आश्चर्य नहीं थी, लेकिन हमारी क्षमता को दिखाती थी, वह यह थी कि हमारे पास दुश्मन के मुकाबले युद्ध के मैदान की स्थिति की बेहतर जानकारी थी.”

विस्तार से बताते हुए जनरल चौहान ने कहा कि भारतीय कमांडर सीमा पार मौजूद अपने समकक्षों के मुकाबले भारतीय और पाकिस्तानी दोनों हमलों के असर का आकलन काफी तेजी से कर पा रहे थे.

उन्होंने आगे कहा, “हमें पता था कि हमारे हमलों से क्या हासिल हुआ है, पाकिस्तान के हमलों से क्या हासिल हुआ है और क्योंकि हम सभी एक ही तस्वीर देख रहे थे, इसलिए हम तेजी से फैसले ले सकते थे. युद्ध में तेज़ी से फैसला लेना जरूरी होता है ताकि दुश्मन हमेशा दबाव में रहे. हम ऐसा करने में सक्षम थे.”

पाकिस्तान को लगा कि वह भारत की तरह अंदर तक हमला कर सकता है

ऑपरेशन बुनयान-उन-मरसूस के जरिए क्या पाकिस्तान अपने मकसद में सफल रहा, इस सवाल पर जनरल चौहान ने कहा कि यह अभियान 9 मई की रात करीब 1 बजे शुरू हुआ था.

पूर्व CDS के मुताबिक, पाकिस्तान को लगा कि वह भी भारत की तरह अपने इलाके के अंदर से ही गहराई तक हमले कर सकता है. उन्होंने कहा, “हमने उनके कई रडार तबाह कर दिए थे, लेकिन हमने उनके एयरफील्ड को निशाना नहीं बनाया था. इसलिए उन्हें लगा कि अगर वे भी हमारी तरह तेजी से और गहराई तक हमला करेंगे, तो भारत को बड़ा नुकसान पहुंचा सकेंगे.”

हालांकि, भारत की जवाबी कार्रवाई ने जल्द ही युद्ध की स्थिति बदल दी. उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि 10 मई की सुबह करीब 9 या 9:30 बजे उन्होंने फोन इसलिए किया, क्योंकि भारतीय वायुसेना की कार्रवाई का उन पर बड़ा असर पड़ा था.”

जनरल चौहान ने कहा कि भारतीय वायुसेना (IAF) ने 10 मई की सुबह-सुबह पाकिस्तान के सरगोधा और नूर खान समेत कई अहम एयरबेस पर हमला किया, जिससे पाकिस्तान वायुसेना के अभियान को बड़ा झटका लगा.

उन्होंने कहा, “इनमें से कुछ एयरफील्ड पर आधी रात के आसपास और कुछ पर सुबह 4 या 5 बजे हमला हुआ.” उन्होंने बताया कि एयरस्ट्रिप खराब हो जाने के बाद पाकिस्तान वहां से लड़ाकू विमान उड़ाने की स्थिति में नहीं रहा.

उनके मुताबिक, पाकिस्तान को समझ आ गया था कि उसकी हवाई अभियान चलाने की क्षमता तेजी से खत्म हो रही है. वहीं, पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों को यह भी लगा कि रात 1 बजे से सुबह करीब 9 बजे तक उन्होंने भारत पर जो हमले किए, उससे काफी नुकसान पहुंचा है.

जनरल चौहान ने कहा, “उन्हें लगा कि उन्होंने काफी नुकसान कर दिया है और अब बात करना बेहतर रहेगा. नहीं तो मामला इससे भी आगे बढ़ जाता.”

भारत के पास युद्ध की स्थिति की कहीं ज्यादा साफ जानकारी थी

जनरल चौहान ने कहा, “हमें पता था कि पाकिस्तान की तरफ से क्या आया, हमने क्या रोका, क्या हमारे पास तक पहुंचा और अगर कोई नुकसान हुआ तो कितना हुआ.”

उन्होंने कहा, “उन्हें समझ आ गया था कि अगर संघर्ष जारी रहा, तो उनका नुकसान और तेजी से बढ़ेगा और हमने सुबह 9:30 बजे ही उनकी बात क्यों नहीं मानी और दोपहर तक अभियान क्यों जारी रखा? क्योंकि हम चाहते थे कि हमारी जीत और ज्यादा निर्णायक हो.”

उन्होंने आगे कहा कि इसी वजह से भारत ने हमलों का तीसरा चरण भी जारी रखा. “हमने सुबह करीब 10:30 बजे तीसरी लहर के तहत हमले किए और फिर करीब 1 बजे दोबारा हमला किया. आखिरी दो एयरफील्ड भोलारी और जैकबाबाद थे. जीत का पूरी तरह निर्णायक होना जरूरी था.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

 

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