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Saturday, 11 July, 2026
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मेरठ में दलित युवती की हत्या से बवाल: प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई से उठे सवाल, NHRC ने लिया संज्ञान

ललिता गौतम की मौत और उसके बाद हुए विरोध-प्रदर्शनों के हालात उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के लिए एक बड़ी मुश्किल बन गए हैं.

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मेरठ: 15 मई को जब ललिता गौतम BA फाइनल ईयर की परीक्षा देने घर से निकली थीं, तब उन्हें और उनके परिवार को ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि आगे क्या होने वाला है. दो दिन बाद मेरठ पुलिस को उनका चोटों से भरा शव एक गन्ने के खेत में मिला.

20 वर्षीय दलित युवती को न्याय दिलाने के लिए परिवार की लड़ाई अब सिर्फ एक परिवार की लड़ाई नहीं रह गई है. उनकी मौत की परिस्थितियां और उसके बाद हुए जातीय विरोध प्रदर्शन अब उत्तर प्रदेश पुलिस और सरकार, दोनों के लिए बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बन गए हैं.

बुधवार को प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई, जिसमें मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) द्वारा हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को वैन के अंदर थप्पड़ मारने का वीडियो भी सामने आया, ने सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा और बढ़ा दिया है.

पुलिस की कथित सख्ती के आरोपों को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने 8 जुलाई को मेरठ में हुए प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं पर उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक और राज्य के गृह सचिव से जवाब मांगा है.

Police action on protesters gathered outside Commissioner's Square Wednesday has sparked outrage | By special arrangement
बुधवार को कमिश्नर स्क्वायर के बाहर जमा हुए प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई से आक्रोश फैल गया है | विशेष व्यवस्था

उधर, पुलिस ने 16 नामजद और 25-50 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है. उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की 14 धाराएं लगाई गई हैं. अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

शुक्रवार दोपहर भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर ‘आज़ाद’ का काफिला मुजफ्फरनगर के एक टोल प्लाजा पर रोका गया, जहां उनकी पुलिस से बहस हो गई.

इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सवाल पूछा. वहीं बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने पीड़ित परिवार और दलित समाज से कानून अपने हाथ में न लेने की अपील की.

हालांकि, पुलिस ने मुख्य आरोपी अंकुश कुमार को गिरफ्तार कर लिया है, जिसने कथित तौर पर हत्या की बात कबूल की है, लेकिन ललिता का परिवार कहता है कि इस हत्या में और भी लोग शामिल थे. परिवार का यह भी आरोप है कि ललिता के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ था, हालांकि पुलिस ने इससे इनकार किया है. अंकुश पर अपहरण और हत्या का मामला दर्ज किया गया है.

ब्रह्मपुरी सर्किल ऑफिसर सौम्या अस्थाना ने दिप्रिंट से कहा, “पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि हुई है और उसमें दुष्कर्म का कोई संकेत नहीं है. मौत का कारण गला दबाना है. उनकी गर्दन की हड्डी टूट गई थी.”

दिप्रिंट ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देखी है, जिसमें दुष्कर्म का कोई ज़िक्र नहीं है.

वह दिन जिसने सब बदल दिया

ललिता 15 मई की सुबह करीब 9 बजे मेरठ के RG कॉलेज में राजनीति विज्ञान की परीक्षा देने के लिए घर से निकली थीं. उनके भाई टीनू गौतम ने बताया कि उन्हें शाम 5 बजे तक लौट आना था, लेकिन वह वापस नहीं आईं.

टीनू ने दिप्रिंट से कहा, “जब वह वापस नहीं आईं तो हमने उन्हें कई बार फोन किया. फिर हम कॉलेज पहुंचे, जहां पता चला कि उन्होंने परीक्षा ही नहीं दी. देर रात हम थाने जाकर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचे.”

पुलिस के मुताबिक, ललिता 15 मई को लापता हुई थीं और उनका परिवार अगले दिन TP नगर थाने पहुंचा था. उनका शव उस इलाके से मिला जो रोहटा थाने की सीमा में आता है.

मेरठ के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि शिकायत मिलते ही जांच शुरू कर दी गई थी. उन्होंने कहा कि शव किरोट गांव के पास उकासिया जंगल में गन्ने के खेत से बरामद हुआ.

गिरफ्तार मुख्य आरोपी अंकुश कुमार कथित तौर पर काफी समय से ललिता पर उससे शादी करने का दबाव बना रहा था.

ललिता की बहन तनु गौतम ने दिप्रिंट से कहा, “अंकुश बहुत लंबे समय से ललिता के पीछे पड़ा था. वह उस पर शादी का दबाव बना रहा था. ललिता लगातार मना करती रही. इसके बाद उसने धमकी दी कि अगर उसने शादी से इनकार किया तो वह उसे और उसके परिवार को मार देगा. आखिरकार उसने ऐसा ही किया.”

मुख्य आरोपी और पीड़िता दोनों एक ही गांव के रहने वाले हैं.

तनु ने बताया कि ललिता आगे पढ़ना चाहती थीं और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग करना चाहती थीं.

उन्होंने कहा, “इंटरमीडिएट में उनके 78 प्रतिशत अंक आए थे और उनका CGPA 7.2 था. उन्हें पढ़ाई करना और मेहनत करना बहुत पसंद था. वह अभी शादी करके बसना नहीं चाहती थीं. अंकुश ने उन पर दबाव बनाया और उनकी जान ले ली.”

फॉरेंसिक जांच और सर्विलांस से मिले सबूतों के आधार पर पुलिस अंकुश तक पहुंची.

जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “जांच में पता चला कि अंकुश और ललिता साथ थे. घटना वाले दिन अंकुश ने ललिता के मोबाइल में किसी दूसरे युवक के साथ उनकी चैट देख ली थी.”

अधिकारी के मुताबिक, इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद गुस्से में आकर अंकुश ने ललिता की हत्या कर दी और शव को गन्ने के खेत में छिपा दिया.

प्रदर्शन और विवाद

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दलित अधिकार कार्यकर्ता सुनील गौतम ने दिप्रिंट से कहा कि प्रदर्शन आखिरी विकल्प के तौर पर किया गया था. “इसलिए हमने प्रदर्शन करने का फैसला किया.”

गौतम और सैकड़ों प्रदर्शनकारी बुधवार को कमिश्नर चौराहे पर इकट्ठा हुए, जो मेरठ जिले के प्रशासनिक और न्यायिक तंत्र का मुख्य केंद्र है.

इस प्रदर्शन में मुरादाबाद, लखनऊ, बुलंदशहर, गाजियाबाद और नोएडा से भी दलित अधिकार कार्यकर्ता शामिल हुए.

अधिकार कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि जब प्रदर्शनकारी दलित महापंचायत में शांतिपूर्वक बैठे हुए विरोध कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें जबरन हटाना शुरू कर दिया.

उन्होंने आरोप लगाया, “पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की, बदसलूकी की और सभी को वहां से हटा दिया. यह पूरी तरह शांतिपूर्ण प्रदर्शन था. हम सिर्फ निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे.”

शोषित क्रांति दल (SKD) के अध्यक्ष रविकांत ने कलेक्ट्रेट गेट के बाहर शांतिपूर्ण धरने पर बैठे दलित प्रदर्शनकारियों पर पुलिस के लाठीचार्ज की निंदा की.

उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “यह पूरी तरह निंदनीय है और इसकी कड़ी से कड़ी निंदा होनी चाहिए. हम मुख्यमंत्री से मिलेंगे और लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ तुरंत और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग करेंगे.”

पुलिस का पक्ष

एक बयान में मेरठ के एसएसपी अविनाश ने कहा कि पुलिस ने गिरफ्तारियां इसलिए कीं क्योंकि कुछ प्रदर्शनकारियों ने “पीड़िता के परिवार के लोगों को भड़काया, गैरकानूनी तरीके से सड़क जाम की, भीड़ को उकसाया और कानून-व्यवस्था बिगाड़ी.”

एसएसपी ने कहा, “परिवार और जांच अधिकारी, संबंधित थाना प्रभारी तथा अन्य अधिकारियों के बीच लगातार बातचीत होती रही और परिवार की ओर से उठाए गए सभी मुद्दों का संतोषजनक समाधान किया गया.”

इसके बावजूद, पांडेय ने कहा, “उपद्रवी और गैरकानूनी तत्वों” ने परिवार को भड़काया और सड़क जाम कर दी.

उन्होंने कहा कि बार-बार अपील करने के बावजूद जाम नहीं हटाया गया. इसके बाद कानून-व्यवस्था और यातायात सुचारु रखने के लिए जरूरी न्यूनतम बल का इस्तेमाल कर सड़क खाली कराई गई.

Meerut Police say they carried out arrests after some of the protesters 'incited the victim's family members, illegally blocked the road, instigated a crowd'. | By special arrangement
मेरठ पुलिस का कहना है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने “पीड़िता के परिवार को भड़काया, गैरकानूनी तरीके से सड़क जाम की और भीड़ को उकसाया.” | विशेष व्यवस्था

बयान में कहा गया, “उपलब्ध वीडियो और सोशल मीडिया के विश्लेषण के आधार पर उन लोगों की पहचान कर ली गई है जिन्होंने सड़क जाम की साजिश रची, लोगों को भड़काया और पूरी घटना में सक्रिय भूमिका निभाई.” इसमें यह भी कहा गया कि इनमें से कुछ लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड भी है.

बुधवार के प्रदर्शन के बाद दर्ज एफआईआर में एक सब-इंस्पेक्टर (एसआई) ने आरोप लगाया कि यह सभा प्रशासन की अनुमति के बिना आयोजित की गई थी.

एसआई ने आरोप लगाया कि जब पुलिस ने हस्तक्षेप करने की कोशिश की तो किसी ने उनकी बात नहीं सुनी. एफआईआर में यह भी कहा गया कि दलित अधिकार कार्यकर्ता रवि गौतम ने आत्महत्या की कोशिश की.

एफआईआर के मुताबिक, थोड़ी ही देर में और लोग वहां पहुंच गए. “उन्होंने पहले से बनाई गई योजना के तहत सार्वजनिक सड़क जाम कर दी और जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय का गेट तोड़कर जबरन अंदर घुसने की कोशिश की.”

एफआईआर में कहा गया, “उनकी गैरकानूनी हरकतों का मकसद शांति भंग करना, पुलिस की वैध जांच में बाधा डालना, सरकारी कर्मचारियों को अपना काम करने से रोकना और जनता को नुकसान पहुंचाना था. इससे सार्वजनिक जगह पर अफरा-तफरी मच गई और लोगों को खतरा, बाधा और असुविधा हुई.”

दिप्रिंट ने एफआईआर को देखा है.

एफआईआर में कहा गया कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की अपील का भी कोई असर नहीं हुआ. इसके बजाय प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की.

एफआईआर में कहा गया, “प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बल पर जानलेवा हमला किया. इससे कुछ पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए. उनके साथ मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने किसी तरह उनकी जान बचाई.”

विवाद और बढ़ा

जिस बात ने सबसे ज्यादा गुस्सा बढ़ाया, वह तीन दिन पहले प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के वीडियो हैं. एक एक्स अकाउंट ने लिखा, “यह वर्दी की आड़ में गुंडागर्दी है.” एक अन्य ने लिखा, “क्या दलित बेटी के लिए न्याय मांगना अब अपराध है?”

इस मामले पर मायावती से लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव तक कई नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है.

बसपा प्रमुख ने एक्स पर लिखा कि बुधवार की घटना बेहद चिंताजनक है.

Social media users have called the police action uniform-enabled goondagiri | By special arrangement
सोशल मीडिया यूज़र्स ने पुलिस की कार्रवाई को ‘वर्दी की आड़ में गुंडागर्दी’ कहा है | विशेष व्यवस्था

उन्होंने लिखा, “संविधान का अनुच्छेद 19 हर नागरिक को अपने विचार रखने और शांतिपूर्ण तथा अहिंसक तरीके से विरोध दर्ज कराने का मौलिक अधिकार देता है. अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बल प्रयोग किया गया है तो इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए. दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए.”

अखिलेश यादव ने भी उत्तर प्रदेश पुलिस की आलोचना करते हुए कहा कि “भाजपा राज में पुलिस अन्याय के नए रिकॉर्ड बना रही है.”

सपा प्रमुख ने कहा, “मेरठ में दलित समाज की बेटी ललिता गौतम को न्याय दिलाने की आवाज उठाने पर पीड़ित परिवार और अन्य लोगों पर हमला और लाठीचार्ज किया जाना बेहद निंदनीय है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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