शिमला, 22 अक्टूबर (भाषा) जनवरी में जारी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की अधिसूचना वापस लेने और सर्वण आयोग के गठन की मांग को लेकर इस समुदाय के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को यहां हिमाचल प्रदेश सचिवालय का घेराव किया।
इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया।
राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी और उससे संबद्ध संगठनों के प्रदर्शनकारियों ने राज्य सचिवालय में घुसने की कोशिश की। इसी दौरान 21 दिनों की 600 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा ‘सवर्ण समाज अश्वमेध न्याय यात्रा’ शिमला पहुंची थी।
छोटा शिमला में यातायात पूरी तरह ठप हो गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें कीं और हल्का बल प्रयोग किया।
पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह को बृहस्पतिवार को प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के लिए भेजा गया। मुख्यमंत्री और प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे नेताओं के बीच शुक्रवार को बैठक भी निर्धारित की गई है।
पैदल यात्रा का आयोजन करने वाली राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के अध्यक्ष रूमित सिंह ठाकुर ने कहा कि यात्रा को जबरदस्त समर्थन मिला और उन्होंने इसे ‘‘पूरे समाज की जीत’’ बताया।
उन्होंने कहा कि वह इस बात के लिए आभारी हैं कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया।
ठाकुर ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस, दोनों की सरकारें उनकी पार्टी द्वारा उठाए गए मुद्दों का समाधान करने में विफल रही हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि सवर्ण समाज के समर्थन के बिना कोई भी राजनीतिक दल 2027 के विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाएगा, क्योंकि यह समुदाय राज्य की आबादी के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है और समाज में उसका काफी प्रभाव है।
उन्होंने कहा कि कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह को प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए भेजा गया, जो अपने आप में बड़ी बात है, क्योंकि वह सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं।
भाषा राखी राजकुमार
राजकुमार
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