सहारनपुर छह नवंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले की एक फास्ट ट्रैक अदालत ने सामूहिक दुष्कर्म के करीब 11 साल पुराने मामले में पुलिस के दो अधिकारियों को दोषी करार देते हुए 20-20 साल के कारावास की सजा सुनाई। एक अधिवक्ता ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
अदालत ने प्रत्येक पर 1.20 लाख हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता राजीव तोमर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (त्वरित अदालत) प्रबोध कुमार वर्मा ने तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक ब्रजमोहन यादव और उपनिरीक्षक वेगपाल सिंह को दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई।
तोमर के अनुसार, घटना के समय महिला ढाई महीने की गर्भवती थी और उससे थाने में सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। पुलिस ने बताया कि ब्रजमोहन यादव पदोन्नति के बाद पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) बने और बाद में सेवानिवृत्त हो गए जबकि वेगपाल सिंह (58) निरीक्षक पद पर पदोन्नत हो गए और वर्तमान में दूसरे जिले में तैनात हैं।
पुलिस के अनुसार, अगस्त 2015 में देवबंद थाना क्षेत्र की रहने वाली एक महिला के पति को कथित तौर पर एक फर्जी मुकदमे में गिरफ्तार किया गया था, जिसकी जानकारी मिलने पर महिला थाने पहुंची और पति की रिहाई की गुहार लगाई।
महिला ने आरोप लगाया कि तत्कालीन थाना प्रभारी ब्रजमोहन यादव, उप निरीक्षक वेगपाल सिंह और कुछ अन्य लोगों ने उससे सामूहिक दुष्कर्म किया।
शिकायतकर्ता ने बताया कि उस समय वह ढाई महीने की गर्भवती थी।
महिला ने बताया कि उसके मौजूद उसकी ननद ने जब इसका विरोध किया तो उसकी भी पिटाई की गई।
तोमर ने बताया कि पीड़िता ने चार आरोपियों के खिलाफ देवबंद थाने और तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके उसने उच्च न्यायालय का रुख किया।
उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने मामला दर्ज करने के निर्देश दिए थे।
आरोपियों को तलब किए जाने के बाद मामला सत्र न्यायालय और फिर फास्ट ट्रैक अदालत में पहुंचा।
वकील ने बताया कि मामले की जांच सीबीसीआईडी को भी सौंपी गई थी। अधिवक्ता के अनुसार, एक आरोपी तत्कालीन चौकी प्रभारी ने मानसिक रूप से अस्वस्थ होने का दावा किया था, जिसके कारण उसके खिलाफ मुकदमा नहीं चल सका।
वहीं, चौथे आरोपी सिपाही की पहचान और तलाश नहीं हो पाने के कारण मुकदमा केवल ब्रजमोहन यादव और वेगपाल सिंह के खिलाफ ही हुआ।
तोमर ने बताया कि करीब 11 साल तीन महीने बाद पीड़िता को अदालत से न्याय मिला और सजा सुनाए जाने के बाद दोनों दोषियों को जेल भेज दिया गया।
उन्होंने बताया कि दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दिलाने के लिए वे उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।
भाषा सं आनन्द रवि कांत जितेंद्र
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