scorecardresearch
Thursday, 26 March, 2026
होमदेशपूरे देश में लागू होनी चाहिए समान नागरिक संहिता : मोहन भागवत

पूरे देश में लागू होनी चाहिए समान नागरिक संहिता : मोहन भागवत

Text Size:

देहरादून, 23 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने उत्तराखंड की तर्ज पर समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को पूरे देश में लागू करने की वकालत की है।

संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में यहां आयोजित पूर्व सैनिक संवाद गोष्ठी में भागवत ने कहा, ”यूसीसी आता है तो बहुत अच्छी बात है। ……सारे देश में ऐसा होगा तो अच्छा होगा, लेकिन इस (उत्तराखंड जैसी) पद्धति से होना चाहिए, ऐसा मेरा कहना है।”

उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने पिछले साल 27 जनवरी को प्रदेश में यूसीसी लागू किया था।

संघ प्रमुख ने यूसीसी की तारीफ करते हुए कहा कि समाज को एक करने के लिए यह जरूरी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में इस संबंध में एक प्रस्ताव तैयार करने के बाद उसे सार्वजनिक रूप से चर्चा के लिए रखा गया और फिर तीन लाख लोगों के सुझाव आए, जिस पर विचार कर उसे स्वीकार कर लिया गया।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए भागवत ने कहा कि मामला अभी उच्चतम न्यायालय में है।

आरएसएस प्रमुख ने समाज में असामाजिक तत्वों और बाहरी खतरों से सुरक्षा के लिए एक सशक्त एवं सजग रक्षा व्यवस्था को अनिवार्य बताते हुए कहा कि देश स्वतंत्र है, लेकिन उसकी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सेना की आवश्यकता सदैव बनी रहती है।

उन्होंने कहा कि संघ बिना किसी बाह्य साधन के खड़ा हुआ और दो बार कठोर प्रतिबंध झेलने के बाद भी समाज की आत्मशक्ति के बल पर लगातार आगे बढ़ता रहा।

भागवत ने पूर्व सैनिकों से आह्वान किया कि वे संघ के शिविरों और कार्यक्रमों में आकर स्वयंसेवकों के समर्पित कार्य को निकट से देखें और अपनी रुचि तथा सामर्थ्य के अनुसार सेवा कार्यों से जुड़ें।

उन्होंने कहा कि भारत का स्वभाव तो विविधता में एकता का है।

भागवत ने कहा, ‘‘हमारे ऋषियों और पूर्वजों ने विश्व कल्याण की भावना से इस राष्ट्र की आधारशिला रखी थी और उसी सनातन चेतना को पुनः जागृत करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।’’

इस कार्यक्रम में थलसेना, नौसेना, भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), तटरक्षक बल समेत अन्य सैन्य एवं अर्द्धसैनिक बलों के सेवानिवृत्त पूर्व सैनिक और अधिकारी मौजूद रहे।

भाषा

दीप्ति

रवि कांत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments