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Friday, 6 March, 2026
होमदेश‘ट्राइब्स आर्ट फेस्ट’: चार दिन के भीतर बिकीं 30 लाख रुपये मूल्य की कलाकृतियां

‘ट्राइब्स आर्ट फेस्ट’: चार दिन के भीतर बिकीं 30 लाख रुपये मूल्य की कलाकृतियां

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नयी दिल्ली, छह मार्च (भाषा) नयी दिल्ली में आयोजित ‘ट्राइब्स आर्ट फेस्ट 2026’ में भाग लेने के लिए सुदूर गांवों और वन क्षेत्रों से आए आदिवासी कलाकारों की कलाकृतियों को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है और पहले चार दिन में ही लगभग 30 लाख रुपये की कलाकृतियों की बिक्री हुई है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा ने बताया कि तीन मार्च को शुरू हुई यह प्रदर्शनी 13 मार्च तक आम लोगों के लिए खुली रहेगी।

चोपड़ा ने बताया, ‘‘प्रदर्शनी में अब तक लगभग 30 लाख रुपये की कलाकृतियों की बिक्री हो चुकी है। प्रदर्शनी में प्रदर्शित कई चित्रों की मांग ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी और स्विट्जरलैंड जैसे देशों से भी आ रही है।’’

अधिकारियों ने बताया कि इस आयोजन में 45 से अधिक महिलाओं सहित कुल 73 कलाकारों ने भाग लिया है। सरकार का उद्देश्य इन कलाकारों को एक बड़ा मंच प्रदान करना और उनके काम को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना है।

कुछ होनहार कलाकारों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि झारखंड के हजारीबाग की 50 वर्षीय पुतली गांजू अपनी पारंपरिक सोहराई कला के लिए जानी जाती हैं। गांजू ने इस कार्यक्रम में अपनी कलाकृतियां प्रदर्शित की हैं।

चोपड़ा ने बताया कि गांजू ने पहले विदेशों में भी अपनी कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई है और यूरोपीय देशों में कला प्रेमियों के बीच धीरे-धीरे पहचान बना रही हैं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘इसी तरह, मध्य प्रदेश के भोपाल की 32 वर्षीय संतोषी श्याम गोंड कला की कलाकार हैं। पहले संतोषी प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करती थीं और पूरी तरह से हाथ से चित्रकारी करती थीं, लेकिन अब उन्होंने गोंड कला को आधुनिक शैली में प्रस्तुत करने के लिए ऐक्रेलिक रंगों और ब्रशों का उपयोग करना शुरू कर दिया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘उनकी एक पेंटिंग की कीमत लगभग 1,20,000 रुपये है और ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस जैसे देशों में उनकी कलाकृतियों की मांग है।’’

प्रदर्शनी में सबसे महंगी पेंटिंग की कीमत 15 लाख रुपये है। इस पेंटिंग पर प्रकाश डालते हुए अधिकारियों ने कहा कि इसे मध्य प्रदेश के कलाकार रवि कुमार टेकाम ने बनाया है।

दिल्ली के त्रावणकोर पैलेस में आयोजित प्रदर्शनी में 16 राज्यों के कलाकारों की कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं और इसमें आदिवासी कला की 30 से अधिक शैलियां शामिल हैं। इनमें वारली, गोंड, भील, धोकरा, सोहराई, कोया, कुरुम्बा, सौरा, बोडो, ओरांव, मंदाना और गोदना जैसी पारंपरिक शैलियों के साथ-साथ पूर्वोत्तर भारत की बांस शिल्पकला भी शामिल है।

जनजातीय कार्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के तहत भारत की पारंपरिक कलाओं को वैश्विक मंच प्रदान करने के लिए ऐसी पहल को बढ़ावा दिया जा रहा है।’’

दिल्ली के कला प्रेमी 13 मार्च तक इस प्रदर्शनी में जा सकते हैं और एक ही स्थान पर 73 कलाकारों की 1,000 से अधिक कलाकृतियों का अवलोकन कर सकते हैं।

भाषा सुरभि अविनाश

अविनाश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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