(तस्वीरों के साथ)
गुवाहाटी, छह नवंबर (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने शुक्रवार को कहा कि जुबिन गर्ग की मौत के मामले में दो मुख्य आरोपियों को जमानत मिलने पर उनके आवास का घेराव करने की एक समूह की धमकी को राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय और गुवाहाटी उच्च न्यायालय के संज्ञान में लाएगी।
यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायक के नेतृत्व वाले एक समूह की ओर से दी गई धमकी ‘मेरे परिवार के लिए खतरा है और यह मेरी हत्या की सीधी कोशिश भी हो सकती है।’
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अदालतों के आदेशों का सम्मान करती है, जबकि उन पर सवाल उठाने वाले लोग राज्य में अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मामले के मुख्य आरोपी श्यामकानु महंत और सिद्धार्थ शर्मा की जमानत याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय में 30 नवंबर को सुनवाई होगी।
शर्मा ने कहा, ”अदालतें न्याय सुनिश्चित करेंगी। मैं उन लोगों से कहना चाहता हूं जो किसी आरोपी को जमानत दिए जाने के संबंध में मुझसे सवाल कर रहे हैं कि वे याद रखें कि विधानसभा में मैंने जो कहा था, उसका उल्लेख आरोपपत्र में भी है।”
गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने जुबिन गर्ग की मौत के मामले में आरोपी गायिका अमृतप्रभा महंत को नौ अक्टूबर को 50,000 रुपये के मुचलके और इतनी ही राशि के दो जमानतदारों की शर्त पर जमानत दी थी। अदालत ने इस मामले में संदीपन गर्ग को भी जमानत दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अमृतप्रभा महंत को जमानत देते हुए उच्च न्यायालय के आदेश में उल्लेख है कि सुनवाई के दौरान 160 गवाहों ने उनका नाम नहीं लिया, जबकि विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच के दौरान उन्होंने उनका नाम लिया था।
शर्मा ने कहा, ‘‘लोगों को मुझसे नहीं, बल्कि गवाहों से सवाल करना चाहिए। अदालत को अपना काम करने देना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि एक विधायक के नेतृत्व वाले समूह की ओर से, श्यामकानु महंत और सिद्धार्थ शर्मा को जमानत मिलने पर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की धमकी ‘‘गंभीर मामला’’ है। उन्होंने विधि विभाग को इस मामले को अदालत के संज्ञान में लाने का निर्देश दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘वे मुख्यमंत्री कार्यालय के पास प्रदर्शन करने की बात नहीं कह रहे हैं, बल्कि मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की धमकी दे रहे हैं। यह मेरे परिवार के लिए खतरा है और हत्या की सीधी कोशिश भी हो सकती है।’’
शर्मा ने कहा, ‘‘एक वर्ग की ओर से ऐसा माहौल बनाया गया है कि दोनों आरोपियों को जमानत मिल जाएगी, लेकिन मुझे जानकारी मिली है कि अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी।’’
उन्होंने कहा कि अदालत को अपना काम करने देना चाहिए और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले लोग न्याय के मार्ग में बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं।
शर्मा ने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय के आदेशों को, चाहे वे अच्छे हों या बुरे, लोगों को स्वीकार करना चाहिए। उच्चतम न्यायालय राज्य सरकार के अधीन नहीं है।’’
रायजोर दल के विधायक अखिल गोगोई के नेतृत्व वाली ‘जुबिन गर्ग न्याय समिति’ ने बृहस्पतिवार को कहा था कि यदि श्यामकानु महंत और सिद्धार्थ शर्मा को जमानत मिलती है या राज्य सरकार उनकी जमानत का प्रभावी कानूनी विरोध करने में विफल रहती है, तो समिति मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेगी।
जुबिन गर्ग की पिछले साल 19 सितंबर को सिंगापुर में समुद्र में तैरते समय मौत हो गई थी। सिंगापुर पुलिस ने कहा था कि उनकी मौत में किसी तरह की साजिश की भूमिका नहीं थी। गर्ग सिंगापुर में नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल (एनईआईएफ) के चौथे संस्करण में शामिल होने गए थे।
इस मामले में अमृतप्रभा महंत और शेखर ज्योति गोस्वामी के अलावा एनईआईएफ के मुख्य आयोजक श्यामकानु महंत, गायक के प्रबंधक सिद्धार्थ शर्मा, उनके चचेरे भाई एवं निलंबित पुलिस उपाधीक्षक संदीपन गर्ग तथा उनके निजी सुरक्षा अधिकारी नंदेश्वर बोरा और प्रबीन बैश्य भी आरोपी हैं।
भाषा संतोष पवनेश
पवनेश
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