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Thursday, 1 October, 2026
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हिरासत में लिए जाने के समय से शुरू होती है मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने की समय-सीमा : अदालत

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लखनऊ, एक अक्टूबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने कहा है कि गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने की समय-सीमा औपचारिक गिरफ्तारी ज्ञापन में दर्ज समय से नहीं, बल्कि वास्तव में हिरासत में लिए जाने और उसकी स्वतंत्रता सीमित किए जाने के समय से शुरू होती है।

न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने सोने की बरामदगी से जुड़े एक मामले में यह टिप्पणी की। उन्होंने सीमा शुल्क अधिकारियों द्वारा गिरफ्तार किए गए दो लोगों की हिरासत का आदेश रद्द करते हुए उन्हें तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति विद्यार्थी ने संदीप जायसवाल और एक अन्य की याचिका स्वीकार करते हुए 28 सितंबर को यह आदेश पारित किया।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, 22 अगस्त को कन्नौज के तिर्वा क्षेत्र में उनकी कार एक पुलिस वाहन से टकरा गई थी। पुलिस को कार से कथित तौर पर करीब 10 किलोग्राम सोना मिला और दोनों को सुबह करीब पौने छह बजे हिरासत में ले लिया गया। बाद में उन्हें सीमा शुल्क अधिकारियों को सौंप दिया गया।

याचिका के मुताबिक, सीमा शुल्क विभाग ने गिरफ्तारी ज्ञापन अगले दिन यानी 23 अगस्त को शाम छह बजकर 38 मिनट पर तैयार किया, जबकि दोनों को 24 अगस्त को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया।

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि उन्हें औपचारिक गिरफ्तारी ज्ञापन तैयार किए जाने से काफी पहले ही प्रभावी रूप से हिरासत में ले लिया गया था और इसलिए उन्हें संविधान के अनुच्छेद 22(2) में निर्धारित 24 घंटे की अवधि के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया।

अदालत ने इस दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि 24 घंटे की अवधि तय करने के लिए केवल गिरफ्तारी ज्ञापन में दर्ज समय पर निर्भर नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि जैसे ही किसी व्यक्ति की आवाजाही और स्वतंत्रता पर अधिकारियों का प्रभावी नियंत्रण हो जाता है, उसे अनुच्छेद 22(2) के तहत हिरासत माना जाएगा।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह संवैधानिक सुरक्षा केवल पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि सीमा शुल्क या अन्य सक्षम अधिकारियों द्वारा किसी व्यक्ति को हिरासत में लिए जाने पर भी लागू होती है।

याचिकाकर्ताओं के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होने की बात कहते हुए अदालत ने 24 अगस्त का हिरासत आदेश रद्द कर दिया और दोनों को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया। साथ ही अदालत ने उन्हें रिहाई के 24 घंटे के भीतर संबंधित अधीनस्थ अदालत में पेश होकर कानून के अनुसार जमानत या अग्रिम जमानत का अनुरोध करने का निर्देश दिया।

भाषा सं. सलीम सिम्मी

सिम्मी

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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