नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर (भाषा) विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपकर आग्रह किया कि देश में ‘‘लोकतंत्र की दिनदहाड़े हत्या हो रही है’’ और ऐसे में वह इस मामले में दखल दें तथा यह सुनिश्चित करें कि विपक्ष की मांगें मानी जाएं।
ज्ञापन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर देश की चुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने का आरोप लगाया गया है।
विपक्ष ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर तत्काल रोक और सभी चुनावों में मतपत्रों से चुनाव कराने समेत चार प्रमुख मांगें रखी हैं।
राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में विपक्षी नेताओं ने दावा किया है कि देश में लगातार हुए कई चुनावों में बड़े पैमाने पर ‘वोट चोरी’ हुई है।
उन्होंने हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, दिल्ली और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में धांधली का आरोप लगाया है।
उनका कहना है कि इसके अलावा, कुछ अन्य विधानसभा और लोकसभा चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों और मतदाता सूचियों में हेरफेर की गई।
ज्ञापन में विपक्ष ने कहा, “लोकतंत्र की दिनदहाड़े हत्या हो रही है…चुनावी प्रक्रिया में कथित हेरफेर ने लोकतंत्र की बुनियाद को नुकसान पहुंचाया है और करोड़ों भारतीयों के मतदान के संवैधानिक अधिकार को छीन लिया है।’’
विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर दावा किया कि उन्होंने कथित चुनावी अनियमितताओं को छिपाने के लिए उच्चतम न्यायालय को गुमराह किया और गलत जानकारी दी।
ज्ञापन में निर्वाचन आयोग की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि आयोग संविधान के प्रति जवाबदेह है, न कि राजनीतिक नेतृत्व के प्रति।
ज्ञापन में कहा गया है, “निर्वाचन आयोग मताधिकार का संवैधानिक संरक्षक है, उसका मालिक नहीं।”
विपक्ष ने संविधान के अनुच्छेद 326 का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदान का अधिकार प्रतिनिधि लोकतंत्र की बुनियाद है और चुनाव आयोग की जिम्मेदारी इस अधिकार की रक्षा करना है।
विपक्ष के मुताबिक, किसी भी संवैधानिक संस्था को मतदान के अधिकार से जुड़े नियमों में बदलाव करने, अपने फैसलों की जवाबदेही से बचने या सवाल पूछने वालों को दबाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
ज्ञापन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को कानूनी प्रतिरक्षा देने वाले 2023 के कानून को निरस्त करने की मांग भी की गई है।
विपक्ष ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को तत्काल रोकने और ‘‘अवैध रूप से हटाए गए’’ 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग की है।
उन्होंने पिछले दो वर्षों में हुए उन विधानसभा चुनावों को रद्द करने की मांग की है, जिनमें ‘‘वोट चोरी’’ के निर्णायक सबूत पेश किए गए हैं।
विपक्ष ने राष्ट्रपति से इस मामले में संज्ञान लेने और अपनी संवैधानिक भूमिका के तहत हस्तक्षेप करने की अपील की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि जब अन्य सभी रास्ते बंद हो जाते हैं, तब देश के लोग राष्ट्रपति के कार्यालय को संविधान की रक्षा करने वाले अंतिम संरक्षक के रूप में देखते हैं।
ज्ञापन में राष्ट्रपति से न्याय और संवैधानिक जिम्मेदारी के आधार पर कार्रवाई करने की अपील करते हुए कहा गया है कि देश के नागरिकों की आवाज को दबने नहीं दिया जाना चाहिए।
विपक्ष ने राष्ट्रपति से संविधान की रक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाने का आग्रह किया है।
भाषा हक हक माधव
माधव
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