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Sunday, 17 May, 2026
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पुजारियों और मंदिर कर्मचारियों के वेतन की समीक्षा के लिए दायर याचिकाओं पर सुनवाई करेगा न्यायालय

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नयी दिल्ली, 17 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय सरकार के नियंत्रण वाले मंदिरों में पुजारियों, सेवादारों एवं मंदिर कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन और अन्य लाभों की समीक्षा के लिए एक न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति के गठन संबंधी याचिका पर सोमवार को सुनवाई करेगा।

न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ द्वारा अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई किए जाने की संभावना है।

अधिवक्ता अश्विनी दुबे के माध्यम से दायर याचिका में सरकार के नियंत्रण वाले मंदिरों में पुजारियों और मंदिर कर्मचारियों को दिए जाने वाले पारिश्रमिक तथा अन्य लाभों की समीक्षा के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को एक न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

याचिका के अनुसार, याचिकाकर्ता ने यह घोषणा करने का अनुरोध किया है कि पुरोहित और मंदिर कर्मचारी वेतन संहिता, 2019 की धारा 2(के) के तहत कर्मचारी हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि जब सरकार मंदिरों पर प्रशासनिक, आर्थिक और वित्तीय नियंत्रण अपने हाथ में ले लेती है, तो नियोक्ता-कर्मचारी संबंध स्थापित हो जाता है और पुरोहितों तथा मंदिर कर्मचारियों को सम्मानजनक वेतन से वंचित करना अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत आजीविका के अधिकार का उल्लंघन है।

उपाध्याय ने कहा कि चार अप्रैल को वह एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए वाराणसी गए थे और सरकार द्वारा नियंत्रित काशी विश्वनाथ मंदिर में ‘रुद्राभिषेक’ करने के बाद उन्हें पता चला कि पुजारियों और मंदिर के कर्मचारियों को सम्मानजनक जीवनयापन के लिए न्यूनतम वेतन भी नहीं दिया जा रहा है।

याचिका में कहा गया, ‘‘हाल में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में पुजारियों और मंदिर कर्मचारियों ने न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। पुजारियों और मंदिर कर्मचारियों को सरकार द्वारा अकुशल और अर्ध-कुशल श्रमिकों के लिए निर्धारित न्यूनतम पारिश्रमिक भी नहीं मिल रहा है। यह एक व्यवस्थित शोषण है। राज्य बंदोबस्ती विभाग के माध्यम से एक आदर्श नियोक्ता के रूप में कार्य कर रहा है, लेकिन न्यूनतम मजदूरी अधिनियम और राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों (अनुच्छेद 43) का उल्लंघन कर रहा है।’’

उपाध्याय ने कहा कि आजीविका की अनिश्चित प्रकृति सात फरवरी, 2025 को स्पष्ट रूप से उजागर हुई जब तमिलनाडु के एक विभाग ने मदुरै के ‘दंडायुथापानी स्वामी मंदिर’ में एक परिपत्र जारी कर पुजारियों को ‘आरती की थालियों’ में ‘दक्षिणा’ स्वीकार करने से सख्ती से प्रतिबंधित कर दिया।

भाषा सुरभि नेत्रपाल

नेत्रपाल

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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