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Tuesday, 28 April, 2026
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न्यायालय ने क्लिनिकल ट्रायल नियमों, उनमें मौजूद कमियों पर समग्र दस्तावेज सौंपने का निर्देश दिया

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नयी दिल्ली, 21 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को एक गैर सरकारी संगठन को 2024 के उन नियमों में कथित कमियों का विस्तृत विवरण देते हुए समग्र दस्तावेज दाखिल करने को कहा, जिन्हें देश में टीकों और नयी दवाओं के ‘क्लिनिकल ट्रायल’ की मंजूरी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए तैयार किया गया था।

न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ 2012 में गैर सरकारी संगठन स्वास्थ्य अधिकार मंच द्वारा दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) की सुनवाई कर रही है, जिसमें बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों द्वारा देश भर में बड़े पैमाने पर दवा का क्लिनिकल परीक्षण करने का आरोप लगाया गया था।

अपर्याप्त सुरक्षा प्रावधानों का हवाला देते हुए, जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि गरीब लोगों का उपयोग ‘‘गिनी पिग’’ के रूप में किया जा रहा है और उन्हें पर्याप्त मुआवजा नहीं दिया जा रहा है।

गैर सरकारी संगठन की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख ने कहा कि दवाओं के क्लिनिकल ट्रायल के लिए ‘‘विषयों के पंजीकरण’’ की उचित प्रक्रिया का अभाव है।

वरिष्ठ वकील ने बताया कि इस तरह के ​​परीक्षणों के दौरान लगभग 8,000 लोगों की मौतें हुई हैं और पीड़ितों के कई आश्रितों को पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला है।

पीठ ने पारिख और अन्य वकीलों को अब तक किये गए उपायों और नियमों में मौजूद कमियों के बारे में समग्र दस्तावेज दाखिल करने को कहा और याचिका पर विचार करने के लिए 27 अप्रैल की तारीख तय की।

भाषा सुभाष माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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