जम्मू, आठ अप्रैल (भाषा) केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रीजीजू ने शनिवार को कहा कि अदालतों में करीब पांच करोड़ मामले लंबित हैं और प्रौद्योगिकी न केवल लंबित मामलों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, बल्कि न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया को लोगों तक आसानी से पहुंचाने में भी अहम योगदान कर सकती है।
रीजीजू ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि ई-न्यायालय परियोजना के तीसरे चरण के पूरा होने के बाद, वह समय दूर नहीं होगा जब देश की सभी अदालतें पूरी तरह से कागज-रहित हो जाएंगी।
मंत्री ने जम्मू विश्वविद्यालय में डोगरी भाषा में भारतीय संविधान के पहले संस्करण के विमोचन के मौके पर कहा, ‘‘हम अपनी अदालतों में लंबित मामलों को कम करने के लिए समाधान के रूप में प्रौद्योगिकी का उपयोग कर सकते हैं।’’
समारोह में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश कोटेश्वर सिंह, उच्च न्यायालय के कई वरिष्ठ न्यायाधीश, जम्मू विश्वविद्यालय के कुलपति उमेश राय, कानून सचिव अचल सेठी और जम्मू की उपायुक्त अवनी लवासा शामिल थे।
न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया को आसान और किफायती बनाने के घटनाक्रम के बारे में, रीजीजू ने कहा कि सरकार सभी नागरिकों की समझ के लिए कानून की एक मूल शब्दावली तैयार करने के वास्ते लगभग 65,000 शब्दों का डिजिटलीकरण कर रही है।
कानून मंत्री ने कहा, ‘निचली न्यायपालिका में बुनियादी ढांचे के उन्नयन के लिए 9,000 करोड़ रुपये और ई-कोर्ट परियोजना के लिए 7,000 करोड़ रुपये के आवंटन का उद्देश्य न्याय वितरण की प्रक्रिया को आसानी से सुलभ और स्वतंत्र रूप से उपलब्ध कराना है।’?
रीजीजू ने कहा कि ई-कोर्ट परियोजना ने कोविड महामारी के दौरान अदालतों के कामकाज में काफी मदद की है और वह समय दूर नहीं जब परियोजना के तीसरे चरण के पूरा होने के बाद सभी अदालतें पूरी तरह से कागज रहित हो जाएंगी।
केंद्रीय मंत्री ने डोगरी भाषा में संविधान के अनुवाद के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान करने को लेकर विश्वविद्यालय की प्रशंसा भी की।
भाषा सुरेश पवनेश
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