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Monday, 16 March, 2026
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विलय की अटकलों पर तटकरे ने उठाए सवाल, राकांपा के एकजुट होने की वार्ता अधर में

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कराड (महाराष्ट्र), दो फरवरी (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष सुनील तटकरे ने सोमवार को कहा कि पार्टी ने दिवंगत अजित पवार के नेतृत्व में सामूहिक रूप से भाजपा नीत राजग में शामिल होने का फैसला किया था और वह सत्तारूढ़ गठबंधन में ही रहेगी। राकांपा के दोनों गुटों के विलय को लेकर अटकलों पर उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कौन सा गुट किसके साथ विलय करेगा।

तटकरे ने कहा कि शनिवार को अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को राकांपा विधायक दल का प्रमुख नियुक्त करना पार्टी का निर्णय था और सत्तारूढ़ ‘महायुति’ गठबंधन का नेतृत्व करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का इस कदम से कोई लेना-देना नहीं था।

सातारा जिले के कराड में पत्रकारों से बातचीत में तटकरे ने कहा कि ‘‘कौन सी पार्टी का किस पार्टी के साथ विलय होना था’’ इस बारे में स्पष्टता होनी चाहिए। इन टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि प्रतिद्वंद्वी गुटों- सत्तारूढ़ राकांपा और विपक्षी राकांपा (शरदचंद्र पवार) के एक होने को लेकर वार्ता फिलहाल अधर में है।

महाराष्ट्र की नवनियुक्त उपमुख्यमंत्री और राकांपा नेता सुनेत्रा पवार ने कराड में राज्य के पहले मुख्यमंत्री वाई.बी. चव्हाण के स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान तटकरे उनके साथ थे।

पुणे जिले के बारामती में विमान दुर्घटना में अपने पति और उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मृत्यु के तीन दिन बाद, सुनेत्रा पवार ने शनिवार को उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।

प्रस्तावित विलय के प्रति अपने विरोध के बारे में पूछे गए एक प्रश्न पर तटकरे ने कहा कि इस मुद्दे पर उनके या पार्टी सांसद प्रफुल्ल पटेल की अलग राय होने का कोई सवाल ही नहीं है।

तटकरे ने कहा, ‘‘अजित दादा के नेतृत्व में हमने भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल होने का सामूहिक निर्णय लिया था और राज्य की जनता ने (2024) विधानसभा चुनाव में अजित दादा के इस निर्णय को अपनी स्वीकृति दी। विलय की बात करने वालों को यह जवाब देना चाहिए कि क्या वे इससे सहमत हैं।’’

रायगढ़ से लोकसभा सदस्य तटकरे ने यह भी दावा किया कि राकांपा विधायक दल नए नेता की नियुक्ति के संबंध में अपने स्वयं के निर्णय लेने के लिए पर्याप्त रूप से मजबूत है।

विपक्षी दल राकांपा (शप) के शरद पवार समेत अन्य नेताओं ने दावा किया है कि विलय की वार्ता काफी आगे बढ़ गई थी और अजित पवार ने राकांपा गुटों के बीच विलय की घोषणा के लिए 12 फरवरी की तारीख तय कर ली थी।

वहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को कहा कि अगर ऐसा होता तो अजित पवार ने उनके साथ विवरण साझा किया होता।

जब तटकरे से पूछा गया कि राकांपा (शप) के वरिष्ठ नेता शरद पवार और सुप्रिया सुले सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण समारोह में क्यों उपस्थित नहीं थे, तो उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के लिए निमंत्रण भेजना प्रोटोकॉल विभाग का काम है।

उन्होंने कहा, ‘‘सुनेत्रा पवार के राकांपा विधायक दल की नेता चुने जाने के बाद हमने मुख्यमंत्री फडणवीस से मुलाकात की और उन्हें अपने फैसले से अवगत कराया। भाजपा ने हमें कभी नहीं बताया कि हमें अपनी पार्टी के बारे में क्या फैसले लेने चाहिए।’’

जब उनसे पूछा गया कि अजित पवार के बेटे पार्थ मुंबई में शपथ ग्रहण समारोह में क्यों उपस्थित नहीं थे, तो तटकरे ने कहा कि दिवंगत नेता के बड़े बेटे के रूप में, वह अपने गृहनगर बारामती में थे, जहां लोग शोक जताने आ रहे थे।

राकांपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री हसन मुश्रीफ ने पत्रकारों को बताया कि सुनेत्रा और पवार परिवार विलय के मुद्दे पर फैसला लेंगे।

मुश्रीफ ने दावा किया, ‘‘मैंने अजित दादा को स्थानीय निकाय चुनावों के लिए आयोजित प्रचार कार्यक्रमों में विलय के बारे में बोलते सुना था, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और राकांपा (शप) पदाधिकारियों के साथ विलय पर कोई बातचीत नहीं हुई। (राकांपा-शप नेता) जयंत पाटिल ने मुझे बताया कि इस मुद्दे पर अजित पवार से बातचीत चल रही थी, लेकिन मुझे नहीं पता कि भाजपा को इसकी जानकारी थी या नहीं और क्या वह विलय के लिए सहमत हुई थी।’’

उन्होंने कहा कि सुनेत्रा पवार द्वारा उपमुख्यमंत्री पद स्वीकार करने का निर्णय पार्टी को एकजुट रखने के उद्देश्य से लिया गया।

राकांपा (शप) नेता जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि इसमें ‘2000 प्रतिशत सचाई’ है कि प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच विलय की वार्ता चल रही थी।

विलय की अटकलों के बारे में पूछे जाने पर, राकांपा (शप) के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने कहा कि उनकी पार्टी अब महाराष्ट्र में सात फरवरी को होने वाले जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि राकांपा के गुटों के विलय को रोकने के लिए साजिश रची गई। उन्होंने कहा कि 28 जनवरी को अजित पवार के निधन के बाद हुए राजनीतिक घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

वडेट्टीवार ने दावा किया कि शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार के बीच दोनों धड़ों के विलय को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ गई थी। भाजपा पर निशाना साधते हुए, कांग्रेस नेता ने पूछा कि क्या किसी पार्टी से संबंधित निर्णयों के लिए भाजपा या मुख्यमंत्री की मंजूरी आवश्यक है?

भाषा आशीष प्रशांत

प्रशांत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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