पणजी: तहलका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल ने 2013 के रेप केस में सोमवार को गोवा की मापुसा कोर्ट के सामने सरेंडर कर दिया. यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद उठाया गया है, जिसमें तेजपाल को अपनी सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई शुरू होने से पहले सरेंडर करने को कहा गया था.
यह मामला एक महिला पत्रकार के आरोपों से जुड़ा है. महिला ने तेजपाल पर 7 और 8 नवंबर 2013 को एक होटल की लिफ्ट में यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था. इन आरोपों में तेजपाल को 30 नवंबर 2013 को गिरफ्तार किया गया था.
पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने सरेंडर से छूट देने की मांग की थी. कोर्ट ने उसे तीन हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया था.
जस्टिस अलोक अराधे की पीठ ने तेजपाल को सरेंडर सर्टिफिकेट कोर्ट में जमा करने का भी निर्देश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि अगर वह 22 सितंबर तक सरेंडर सर्टिफिकेट जमा कर देगा, तो उसकी आपराधिक अपील को 22 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा.
तेजपाल की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि उनकी अपील को पहले सूचीबद्ध कर सुनवाई की जानी चाहिए और उचित मामलों में आरोपी के सरेंडर की शर्त से छूट देने का कोर्ट के पास अधिकार है.
वहीं, गोवा सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मांग का विरोध किया था. उन्होंने कहा था कि तेजपाल को रेप के गंभीर मामले में 10 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है.
कोर्ट ने तेजपाल से पूछा था कि सरेंडर करने के लिए उसे कितना समय चाहिए. तीन हफ्ते का समय मांगे जाने के बाद कोर्ट ने सरेंडर से छूट की याचिका खारिज कर दी और तीन हफ्ते के भीतर सरेंडर करने तथा इसका सबूत जमा करने का निर्देश दिया था.
अब सरेंडर सर्टिफिकेट जमा होने के बाद तेजपाल की बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील को 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध किया जाएगा.