नई दिल्ली: ‘प्रॉक्सी वॉर बंद करो, मणिपुर बचाओ’, ‘हमें प्रॉक्सी वॉर नहीं, शांति चाहिए’ और ‘मणिपुर के मूल निवासी चाहते हैं कि भारत के प्रॉक्सी वॉर खत्म हों’ जैसे नारे लिखे पोस्टर और बैनर लेकर प्रदर्शनकारियों ने शनिवार को मणिपुर की राजधानी इंफाल की सड़कों पर मार्च निकाला.
हजारों पुरुष और महिलाएं कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (COCOMI) की ओर से आयोजित इस रैली में शामिल हुए. प्रदर्शनकारी लगातार जारी हिंसा को लेकर मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के इस्तीफे, मूल निवासियों की सुरक्षा और उग्रवादी समूहों के साथ सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौता रद्द करने की मांग कर रहे थे.
इस रैली को नगा समुदाय के शीर्ष संगठन और यूनाइटेड नगा काउंसिल का भी समर्थन मिला. हालांकि, तांगखुल नगा जनजाति के एक समूह, जिसका प्रतिनिधित्व तांगखुल नगा लॉन्ग करता है, ने आखिरी समय में रैली से दूर रहने का फैसला किया.
यह रैली ऐसे दिन निकाली गई, जब पहाड़ी जिले नोनी में संदिग्ध हथियारबंद लोगों के साथ मुठभेड़ में कुकी गांवों के तीन स्वयंसेवकों की मौत हो गई. इन हत्याओं से इस साल की शुरुआत से संघर्ष कर रहे दोनों समुदायों के बीच तनाव और बढ़ गया है. अब तक दोनों जनजातीय समुदायों के करीब 60 लोग इन झड़पों में मारे जा चुके हैं.
प्रदर्शनकारियों ने इंफाल पश्चिम जिले के तिद्दिम ग्राउंड से थाऊ ग्राउंड की ओर मार्च शुरू किया. COCOMI के संयोजक वाई. धीरन ने कहा, “हम राज्य के मूल निवासियों की जान और संपत्ति की सुरक्षा करने में नाकाम रही मौजूदा सरकार का इस्तीफा चाहते हैं. यह एक ऐतिहासिक रैली है. इन मांगों के समर्थन में हजारों लोग इसमें शामिल हुए हैं. लोग उन नीतियों और कार्यक्रमों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, जो राज्य के मूल निवासियों के हित में नहीं हैं.”
एक प्रदर्शनकारी ने मीडिया से कहा, “मणिपुर में साढ़े तीन साल से चल रहे संकट के बाद नगा जनजातियां, मैतेई और यहां के मूल निवासी सरकार की उन नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए एक साथ आ रहे हैं, जो राज्य के मूल निवासियों के खिलाफ हैं. हमने बहुत दर्द सहा है और जान-माल का नुकसान उठाया है.”
नगा नागरिक संगठनों ने चंदेल जिले में भी एक रैली निकाली. उन्होंने उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन के इस्तीफे और SoO समझौते को रद्द करने की मांग की.
SoO समझौते पर अगस्त 2008 में केंद्र सरकार, मणिपुर सरकार और कुकी-जो उग्रवादी समूहों ने हस्ताक्षर किए थे. इसका मकसद हिंसा रोकना और बातचीत के जरिए राजनीतिक समाधान के लिए माहौल तैयार करना था. इसके तहत हथियारबंद कैडरों को तय शिविरों में रखा जाना था. SoO समझौते के मुताबिक, कैडरों को हिंसा से दूर रहना, तय शिविरों में रहना और निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था के तहत अपने हथियार रखना जरूरी है.
प्रदर्शनकारियों ने सभी आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (IDPs) को तुरंत, सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थायी रूप से फिर से बसाने की भी मांग की. COCOMI की मांगों की सूची में कहा गया, “3 मई 2023 से अपने घरों से विस्थापित हुए और अब भी राहत शिविरों, अस्थायी आश्रयों और विस्थापन वाली अन्य जगहों पर रह रहे IDPs को फिर से बसाया जाना चाहिए.”
प्रदर्शनकारियों ने असम राइफल्स को हटाने, सीमा प्रबंधन की एक निष्पक्ष और प्रभावी व्यवस्था बनाने, NRC लागू करने और उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन को हटाने की भी मांग की.
इस बीच, दो कुकी युवकों के बुधवार को अपहरण के बाद कमेटी ऑफ ट्राइबल यूनिटी (CoTU) ने कांगपोकपी में बंद और विरोध प्रदर्शन जारी रखा.
CoTU के बंद के आह्वान के बाद गुरुवार से कांगपोकपी जिले की सभी दुकानें, बाजार और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद हैं. सार्वजनिक और निजी वाहन सड़कों से नदारद हैं. प्रमुख रास्तों और प्रवेश बिंदुओं पर आवाजाही भी प्रभावित हुई है.
स्कूल, सरकारी दफ्तर और निजी प्रतिष्ठान भी बंद रहे. हालांकि, CoTU ने आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं, मीडिया कर्मियों और सुरक्षा बलों जैसी जरूरी सेवाओं को काम जारी रखने की अनुमति दी है.
CoTU ने राज्य प्रशासन और सुरक्षा बलों पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है. संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि अधिकारियों की ओर से दूसरे समुदायों से जुड़े मामलों में तुरंत कार्रवाई की जाती है, लेकिन कुकी-जो लोगों को निशाना बनाए जाने पर कार्रवाई में देरी होती है.
CoTU की ओर से जारी बयान में कहा गया, “बहुत लंबे समय से हमारे लोग असुरक्षा, डराने-धमकाने, तकलीफ और अनसुलझी शिकायतों के नतीजे झेल रहे हैं. हमारे लोगों की लगातार बनी हुई मुश्किलें सरकार की जान की सुरक्षा करने, संवैधानिक अधिकारों को बनाए रखने, सबको बराबर न्याय देने और कानून के शासन में लोगों का भरोसा बहाल करने की प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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