Wednesday, 29 June, 2022
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कानों पर चाकू से वार, गले में गहरे घाव, छाती में कट का निशान; मॉब लिंचिंग से ऐसे हुई रूपेश पांडेय की मौत

रूपेश पांडेय की मां दस दिन से कुछ भी नहीं खा रही. उन्होंने कहा है कि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वो आत्मदाह कर लेंगी. वहीं घटना के बारे में कई तरह की बातें सामने आ रही हैं.

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रांची: कानून बनने के बाद भी झारखंड में मॉब लिंचिंग की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही है. बीते 6 फरवरी को हजारीबाग जिले के बरही थाना के दुलमाहा गांव में भीड़ ने रुपेश पांडेय (17) नामक युवक की हत्या कर दी. घटना के संबंध में कुल पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई है. वहीं घटना के बाद पुलिस ने पूरे 37 घंटे तक इंटरनेट सेवा बंद कर दी थी. इस दौरान हुए आगजनी, सड़क जाम और तोड़फोड़ में पुलिस ने कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया है.

घटना सरस्वती पूजा के दौरान की है, ऐसे में घटना ने तुरंत सांप्रदायिक रंग ले लिया. इसके साथ-साथ मामले में राजनीति भी हर दिन तेज हो रही है. मृतक के परिजनों से मिलने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, बाबूलाल मरांडी सहित बीजेपी के कई वर्तमान और पूर्व विधायक पहुंचे हैं. रांची के सांसद संजय सेठ ने चालू लोकसभा सत्र में इस मामले को उठाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है.

इसके अलावा हेमंत सरकार के तीन मंत्री बादल पत्रलेख, सत्यानंद भोक्ता और मिथिलेश ठाकुर भी परिवार वालों से मिलने पहुंचे. तीनों ने परिवार को एक-एक लाख रुपए देने का वादा किया और साथ ही दशकर्म यानी श्राद्ध के बाद सीएम हेमंत सोरेन से मिलाने की बात भी कही है.

ताजा घटनाक्रम के तहत बीजेपी नेता कपिल मिश्रा 16 फरवरी को मृतक रूपेश के परिजनों से मिलने दिल्ली से रांची पहुंचे. उन्हें झारखंड पुलिस ने रांची एयरपोर्ट पर ही रोक दिया गया. इसके बाद कपिल मिश्रा ने ट्वीट कर कहा कि, ‘झारखंड पुलिस द्वारा मुझे रांची एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा. मेरी बात स्पष्ट है, रूपेश पांडेय जी के शोक संतप्त परिवार से मिलने आया हूं, पुलिस के वाहन में चंद लोगों के साथ रूपेश जी के घर जाने को तैयार हूं. मुझे रोकना झारखंड सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करता है.’


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दस दिन से क्यों भूखी है मां

बरही थाना के ही नईटांड़ पिपराघोघर गांव के निवासी और पेशे से किसान रूपेश के पिता सिकंदर पांडेय (45) ने दिप्रिंट को बताया कि, ‘पांच साल पहले उनके छोटे बेटे शुभम की मौत सांप काटने से हो गई थी. ये उनका बड़ा बेटा था, जो परिवार का सहारा बनता. फिलहाल वह साइंस से 12वीं का छात्र था. उनकी पत्नी उर्मिला देवी (40) बीते दस दिनों से कुछ भी नहीं खा रही हैं. केवल जूस पीकर रह रही हैं. वो कह रही हैं कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो वो आत्मदाह कर लेंगी. फिलहाल वह बेहोश पड़ी हैं.’

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वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट (दिप्रिंट के पास कॉपी मौजूद है) देखने के बाद डॉ सिद्धार्थ सिन्हा ने बताया कि रुपेश पाण्डेय के पूरे शरीर में चोट के निशान हैं. शरीर के अंदर खून जमा हुआ था, जिससे ये पता चलता है कि किसी मजबूत, भारी सामान से उस पर हमला किया गया है. दोनों कानों में चाकू से वार किया गया होगा, गले में दस बाई सात का निशान पाया गया है. बाएं छाती के निचले हिस्से में कट के निशान हैं. चोट की वजह से स्प्लीन फट गई. जिससे पूरे शरीर में खून के थक्के जम गए. इसके अलावा गला दबाने की कोशिश की गई. यह एक हत्या है. मारपीट के चार से आठ घंटे बाद बॉडी को डॉक्टरों के सामने लाया गया है.

रूपेश की लाश के साथ बैठे हुए उसके पिता। फोटोः आनंद दत्त

मृतक के परिजनों की तरफ से दर्ज एफआईआर के मुताबिक कुल 27 नामजद लोगों को आरोपी बनाया गया है. वहीं 100 अज्ञात पर भी इसमें शामिल होने के आरोप हैं. इन सभी पर आईपीसी की धारा 147 (उपद्रव करना), 148 (उपद्रव के दौरान घातक हथियार से लैस), 149 (जनसमूह के द्वारा हमला और उपद्रव), 341 (किसी व्यक्ति को गलत तरीके से रोकना), 323 (मारपीट), 302 (मर्डर), 109 (अपराध के लिए उकसाना), 120बी (अपराधिक षडयंत्र रचना) के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है.

एसपी के मुताबिक मॉब लिंचिंग कहना गलत

हजारीबाग के एसपी मनोज रतन चौथे के मुताबिक पूरे मामले में कुल सात एफआईआर दर्ज की गई है. उन्होंने दिप्रिंट को बताया कि, ’इसमें चार सरकारी एफआईआर हैं. हत्याकांड में जिन पांच लोगों को जेल भेजा गया है, शुरूआती रिसर्च में उनकी सीधी भूमिका नजर आ रही है. जहां तक इस कांड में भीड़ के शामिल होने का सवाल है, ये आगे जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा. ऐसे में फिलहाल इसे मॉब लिंचिंग कहना गलत होगा.’ उन्होंने यह भी बताया कि दो चश्मदीदों के बयान भी कोर्ट में दर्ज कराए गए हैं.

स्थानीय पत्रकार कृष्णा प्रजापति के मुताबिक, ‘जिस गांव (दुलमाहा) में घटना घटी है वो हिन्दू बहुल गांव है. हालांकि कुछ घर जरूर मुसलमानों के हैं. लेकिन ठीक पास का गांव लखना, मुस्लिम बहुल है. रूपेश के गांव नईटांड पिपराघोर से दुलमाहा की दूरी एक किलोमीटर है. जबकि वह करियातपुर गांव के जिस मोबाइल दुकान में काम करता था उसकी दूरी भी दुलमाहा से एक किलोमीटर ही है.’

तोड़फोड़ करने वाली भीड़ फोटोः आनंद दत्त

पूरे घटनाक्रम के बारे में उन्होंने बताया, ‘छह तारीख की शाम को 7.30 बजे जैसे ही लोगों को पता चला, भीड़ सीधे घटनास्थल पर चली गई. यहां दो घरों में आग लगाई. इसके अलावा तीन कार, तीन टेंपो, दो बाइक में आग लगा दी. ये सभी मुसलमानों के थे. यहां से आगे बढ़ने पर लगभग एक किलोमीटर दूर करियातपुर गांव में मुस्लिमों के तीन दुकान जिसमें टेंट के सामान और सिलाई मशीन थे, उसमें भी आग लगाई.’

आगे उन्होंने कहा, ‘सात तारीख को रोड जाम किया. वहीं 13 की शाम को बरही चौक पर कैंडल जुलूस निकाला. इस दौरान सड़क किनारे लगे परिवहन विभाग के बोर्ड और पहले से टंगे मुस्लिमों के झंडे (इस्लामी झंडे) को जलाया और वहां भगवा झंडा टांग दिया. बरही चौक से 500 मीटर दूर तिलैया रोड स्थित एक हनुमान मंदिर में मूर्ति टूटने की घटना भी घटी. यहां से वे धनबाद रोड निकले, मुस्लिमों की दुकानें बंद कराईं. हिन्दुओं ने दुकान बंद कर दिया, लेकिन मुस्लिमों ने इसका विरोध किया और रोड जाम लगा दिया.’

हनुमान मंदिर में टूटी हुई मूर्ति । फोटोः आनंद दत्त

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हो रहीं हैं तीन तरह की बातें

पहला पक्ष- मृतक रूपेश के चाचा अनिल पांडेय ने दिप्रिंट को बताया कि, ’रूपेश पढ़ाई के साथ एक मोबाइल की दुकान पर काम करता था. घटना के दिन वह दुकान पर ही था. इसी दौरान उसके दोस्त हिमांशु, राजवीर, गुलशन यादव और दिवाकर ने फोन किया. कहा कि दुलमाहा गांव में सरस्वती पूजा का मूर्ति विसर्जन होने जा रहा है, उसमें चलो. पूजा स्थल पर पहुंचने से पहले दुलमाहा गांव में ही मुस्लिम बस्ती में लोगों ने उसे रोक लिया. किसी बात को लेकर कहा-सुनी हुई. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि किस बात को लेकर बहस हुई. इसके बाद भीड़ ने उसे घेर लिया और मारपीट शुरू हुई. इस दौरान रूपेश के चारों दोस्त भागने में सफल रहे. जबकि रूपेश भीड़ का शिकार हो गया.’

दूसरा पक्ष- दुलमाहा पंचायत की मुखिया तबस्सुम आरा के पति पप्पू असलम इस मामले में गिरफ्तार हुए हैं. उन पर मारपीट का आरोप है. तबस्सुम बताती हैं, ’उनके पंचायत में 70 प्रतिशत हिन्दू हैं, जबकि मात्र 30 प्रतिशत मुसलमान. बीते पंचायत चुनाव में उन्हें पूरे मुस्लिम वोट का महज 40 प्रतिशत हिस्सा ही मिल पाया था. पंचायत में कुल वोटर लगभग छह हजार हैं.’

वो आगे बताती हैं, ‘घटना के दिन उनकी बेटी-दामाद घर आए थे. हम लोग साथ खाने के बाद आपस में बातचीत कर रहे थे. इस दौरान मेरे पति के मोबाइल पर किसी का फोन आया और वो घर से निकल गए. थोड़ी देर बाद लौटे तो उन्होंने बताया कि पूरे इलाके में घरों को जलाया जा रहा है, एक लड़के की मौत भी हो गई है. हमने देखा कि खिड़कियों में लगे शीशे फूट रहे थे. घटना के अगले दिन पुलिस घर आई और मेरे पति को पकड़ ले गई.’

जब उनसे पूछा गया कि लोगों का कहना है कि आपके देवर की बेटी और मृतक का आपस में प्रेम-प्रसंग था. शायद ये घटना इसी का परिणाम हो? तो, इस सवाल के जवाब में तबस्सुम कहती हैं, ‘ऐसी कोई बात नहीं है. हमें बिल्कुल भी नहीं पता है कि रूपेश को क्यों मारा गया. हां ये बात सही है कि घटना मेरे घर के बगल में ही घटी है.’

तीसरा पक्ष- स्थानीय लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि क्रिकेट में हार जीत को लेकर दोनों पक्षों के लड़कों में पहले से कहासुनी होती रही थी. ये घटना उसी की प्रतिक्रिया का परिणाम है. जबकि पुलिस के मुताबिक भीड़ नहीं, केवल पांच लोगों ने मिलकर इसे अंजाम दिया है.

घटना के छह दिन बाद एक मुस्लिम घर से झंडा निकाल कर जलाया गया. बरही चौक स्थित हनुमान मंदिर की मूर्ति को नुकसान पहुंचाया गया है. सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक मूर्ति तोड़नेवाला चप्पल खोल कर मंदिर में घुसता दिखाई दे रहा है. हिन्दू संगठन हर दिन न्याय मार्च निकाल रहे हैं.

सरकार भले ही बदल गई, लेकिन मॉब लिंचिंग की घटनाएं राज्य में रुकने का नाम नहीं ले रही हैं. बीते 17 मार्च 2016 से 4 जनवरी 2022 तक कुल 58 मामले सामने आए हैं. इस दौरान कुल 35 लोग मरे हैं. मरने वालों में 15 मुस्लिम, 11 हिन्दू, 5 आदिवासी, 4 ईसाई शामिल हैं. वहीं इस दौरान कुल 24 लोग घायल भी हुए हैं. घायल होने वालों में 13 ईसाई, 5 आदिवासी, 3 मुस्लिम, 3 हिन्दू शामिल हैं.


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