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Tuesday, 23 April, 2024
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स्वर्ण मंदिर: दो महीने बाद भी मॉब लिंचिंग में मारे गए युवक की पहचान कर पाने में पंजाब पुलिस नाकाम

कुछ लोगों का कहना है कि एक युवक गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी करने की कोशिश कर रहा था. वहां काम करने वाले कर्मचारियों का आरोप है कि उसने पवित्र कपड़ा ‘रुमाला’ को अपने पैरों से छुआ. रुमाला, जिससे इस धर्म ग्रंथ को ढंका जाता है.

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अमृतसर: वह दूसरे लोगों की तरह ही सिर झुकाकर प्रार्थना कर रहा था. उसने रेलिंग से छलांग लगा दी और गुरुग्रंथ साहिब के करीब पहुंच गया. उसने वहां रखी धार्मिक कृपाण उठा ली. इस बीच वह नीली पगड़ी वालों से घिर चुका था. उसके हाथ की कृपाण भी उसे बचा न सकी. उनलोगों ने उस ‘अधर्मी’ को सबक सिखा दिया था. वह भीड़ के हाथों मारा गया. सिख के सबसे बड़े धार्मिक स्थल में उसकी मौत हो गई. दो महीने बाद भी मरने वाला गुमनाम है. उसे मारने वाले का भी कोई पता नहीं है.

कुछ लोगों का कहना है कि एक युवक गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी करने की कोशिश कर रहा था. वहां काम करने वाले कर्मचारियों का आरोप है कि उसने पवित्र कपड़ा ‘रुमाला’ को अपने पैरों से छुआ. रुमाला, जिससे इस धर्म ग्रंथ को ढंका जाता है.

इस मामले की जांच में शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में पिछले साल 18 दिसंबर को मॉब लिंचिंग में मारे गए उस युवक के बारे में पुलिस कुछ भी पता नहीं लगा पाई है और न ही उसके हत्यारों की पहचान कर पाई है.

अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (डीसीपी) परमिंदर सिंह भंडाल कहते हैं, ‘वहां पर बहुत सारे लोग मौजूद थे ऐसे में यह कह पाना मुश्किल है कि किसने क्या किया और वहां क्या हुआ.’ अब तक इस मामले में कोई गिरफ़्तारी नहीं हो पाई है.

वह कहते हैं कि मोहाली के लैब में फॉरेंसिक जांच के लिए नमूने भेजे गए हैं, लेकिन मौत के कारणों का पता अबतक नहीं चल पाया है.

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स्वर्ण मंदिर में लगे सीसीटीवी की फुटेज में पीड़ित युवक, गुरुग्रंथ साहिब के पास रखी कृपाण को उठाने की कोशिश करते हुए दिख रहा है. जिसके बाद, उस युवक को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के कर्मचारियों ने पकड़ लिया और पीट-पीटकर हत्या कर दी.

गुरुग्रंथ साहिब को ‘जीवित गुरु’ माना जाता है. इसलिए, घटना के अगले दिन अमृतसर पुलिस ने मारे गए युवक के खिलाफ हत्या का प्रयास और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मामला दर्ज किया.

जिस दिन एफआईआर दर्ज की गई उसी दिन पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भंडाल की अगुवाई वाली स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) के गठन की घोषणा की. यह टीम छह सप्ताह में जांच रिपोर्ट सौंपेगी.

डीसीपी भंडाल ने माना कि पुलिस मारे गए युवक की पहचान नहीं कर पाई है. उन्होंने कहा, ‘हमने पूरे देश में उसकी फ़ोटो शेयर की है, पुलिस बलों को और टेलीविजन चैनलों के पास उसकी फोटो भेजी है.’ इस बयान के बाद से मामले की जांच में मामूली प्रगति ही हुई है.

भाडल के मुताबिक, पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से हत्या से पहले की घटनाओं की टाइमलाइन तैयार की है. सीसीटीवी फुटेज देखने से पता चलता है कि पीड़ित युवक, घटना के चार दिन पहले ही स्वर्ण मंदिर पहुंच गया था. इस चार दिनों तक वह गुरुद्वारे में ही खाना खाया और सोया. इस दौरान उसे किसी से कोई खास बातचीत करते हुए नहीं देखा गया है.

भंडाल ने कहा, ‘एक दिन उसने कुत्ते के सोने के लिए बरामदे पर रखे कंबल को उठाकर ले जाने लगा. जब गार्ड ने उससे पूछा कि वह कुत्ते के कंबल को क्यों ले जा रहा हो, तो उसने कोई जवाब नहीं दिया. वह कुछ बुदबुदाया जिसे समझना मुश्किल था.’

‘ऐसे आदमी को सजा मिलनी चाहिए, उसने गलत काम किया’

अमृतसर के लोगों को अब भी उस दिन की घटना याद है. यहां के कई लोग लिंचिंग को सही ठहराते हैं.


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रुपिंदर सिंह, स्वर्ण मंदिर आने वाले लोगों को मुफ़्त में व्हीलचेयर मुहैया करवाते हैं. वह कहते हैं कि कथित बेअदबी के बाद, मंदिर के आसपास लाखों लोग इकट्ठा हो गए.

गुरुग्रंथ साहिब को बाइबिल और गीता की तरह बताते हुए रुपिंदर कहते हैं कि यह ग्रंथ उनके लिए गुरु भी है और पिता भी है, अगर कोई उनके पिता की पगड़ी हटाएगा, तो ऐसा करने वाले को वो छोड़ेंगे नहीं.

वह कहते हैं, ‘ऐसे आदमी को सजा मिलनी चाहिए, क्योंकि जो हुआ वह ठीक नहीं था.’

रवि कुमार पिछले दो दशकों से स्वर्ण मंदिर के बाहर जूता बेचते हैं. वह कहते हैं, ‘वह पहले सम्मान में सिर झुकाया, उसके बाद उसने कृपाण उठा ली और गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी करने की कोशिश की. उन्होंने (मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं) पकड़ लिया और पिटाई कर दी.’

उन्होंने कहा, ‘उसने गलत किया, तो उसपर उसके हिसाब से कार्रवाई की गई. इस तरह की हरकत करने से लोग डरे इसलिए लिंचिंग ज़रूरी था.’

पेशे से ट्रक ड्राइवर रुपल सिंह घटना के दिन दिल्ली से स्वर्ण मंदिर दर्शन करने पहुंचे थे. उन्होंने उस दिन की घटना को याद करते हुए कहते हैं कि बेअदबी की खबर सुनकर उनके दिल को गहरी ठेस लगी.

वह कहते हैं, ‘बेअदबी करने वालों को सजा दी गई. सजा या तो पुलिस दे या भगवान दें, दोनों ही ठीक है.’

कई लोगों को गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी का मामला राजनीतिक साजिश लगता है. वह कहते हैं कि राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं जिसकी वजह से यह सब हुआ है.

राज्य में 20 फ़रवरी को वोट डाले जाएंगे. बेअदबी के पूरे मामले को राजनीतिक साजिश मानने वाले लोग भी लिंचिंग को गलत नहीं मानते हैं.

कपूरथला लिंचिंग

अमृतसर में हुई मॉब लिंचिंग के ठीक एक दिन बाद कपूरथला से 70 किलोमीटर दूर एक गुरुद्वारे में भी इसी तरह की घटना हुई. आरोप है कि पीड़ित ने निशान साहिब को हटाने की कोशिश की थी. गुरुद्वारे पर लगे धार्मिक झंडे को निशान साहिब कहते हैं.

पुलिस की मौजूदगी में यह लिंचिंग हुई. इस मामले में भी मृतक की पहचान नहीं हो पाई है. हालांकि, इस मामले में गुरुद्वारे के केयरटेकर अमरजीत सिंह को गिरफ्तारी किया गया है. इसके साथ ही, 100 अज्ञात लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है.

घटना के बाद, पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने गुरुद्वारे में किसी भी बेअदबी होने की घटना से इनकार कर दिया था.
उन्होंने कहा, ‘हमें कपूरथला में बेअदबी होने के कोई सबूत नहीं मिले हैं. एक व्यक्ति गुरुद्वारा की तरफ भागा था. इसकी वजह से उसकी हत्या हो गई. मामले की जांच चल रही है. एफआईआर (जो पहले ही इस मामले में दर्ज था) को संशोधित किया गया है.’

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें )

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