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Sunday, 26 May, 2024
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झारखंड में सोरेन सरकार नहीं रोक पा रही मॉब लिंचिंग की घटनाएं, अब तक 9 घटनाओं में 5 की मौत और 13 घायल

हेमंत सोरेन ने हाल ही में अधिकारियों को मॉब लिचिंग को लेकर कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है. संभावना है कि चालू सत्र में ही सरकार इस बिल को लाएगी.

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रांची: झारखंड में रघुवर दास सरकार के दौरान मॉब लिंचिंग के खिलाफ मुखर रहे वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद की सरकार में भी इसे रोक नहीं पा रहे हैं. उनके शासनकाल में मॉब लिंचिंग की कुल नौ घटनाएं हुई हैं. इसमें पांच लोगों की मौत और 13 लोग घायल हुए हैं.

2021 के मार्च में ही तीन घटनाएं हुईं और सभी में पीटे जाने वाले लोगों की मौत हो गई.

राज्य में हेमंत सोरेन सरकार आने के बाद से मॉब लिंचिंग के शिकार हुए लोगों में 11 आदिवासी, तीन मुसलमान और चार हिंदू हैं. ये सभी घटनाएं अप्रैल 2020 से मार्च 2021 के बीच हुई हैं.


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‘मुर्दहिया शांति’

रांची जिला मुख्यालय से 27 किलोमीटर दूर अनगड़ा ब्लॉक के महेशपुर गांव में मोबारक खान के घर में ‘मुर्दहिया’ शांति छाई हुई है. कुछ दिन बाद, यानी 29 मार्च को शब-ए-बरात है. भला मातम के माहौल में इस त्योहार का इस परिवार के लिए क्या ही मतलब है.

बीते 13 मार्च की रात को भीड़ ने मोटरसाइकिल चोरी के आरोप में पीट-पीट कर उनकी हत्या कर दी थी. मोबारक के दो बच्चे और पत्नी के अलावा भाई और मां हैं और पत्नी बीमार रहती हैं.

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रांची जिला मुख्यालय से मात्र एक किलोमीटर दूर सचिन वर्मा का घर है. ट्रक चोरी के आरोप में भीड़ ने 10 मार्च को उनकी भी हत्या कर दी थी.

वर्मा की हत्या उस दिन हुई, जिस दिन उनका जन्मदिन था. उनके घर से सटे बाजार में दुकानदार होली के सामान सजा चुके हैं लेकिन सचिन के घर में इस बार होली का रंग बेरंग होने जा रहा है.


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कब, कहां और कैसे हुई हत्या

18 अप्रैल 2020– रामगढ़: पेशाब कर रहे जाबिर अंसारी उर्फ राजू का नाम पूछकर पीटा गया.

11 मई 2020– दुमका: शुभान अंसारी को बकरी चोरी के आरोप में पीट-पीट कर मार दिया, वहीं दुलाल मियां घायल हो गए थे.

23 जून 2020गोड्डा: बकरी चोरी के आरोप में बबलू शाह और उचित्त कुमार यादव को भीड़ ने जमकर पीटा था. जिसमें बबलू शाह की मौत हो गई थी.

2 जुलाई 2020– पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर): गाय का मांस खाने के आरोप में रमेश बेसरा को पीटा गया.

2 जुलाई 2020– दुमका: गाय मांस बेचने के आरोप में छोटेलाल टुडू और मंडल मुर्मू को पीटा गया.

16 सितंबर 2020– सिमडेगा: राज सिंह, दीपक कुल्लू, इमानुएल टेटे, सुगाद डाग, सुलीन बारला, रोशन डांग, सेम किड़ो को गौकशी के आरोप में पीटा गया, उनका सर मुंडवाया गया और जय श्री राम के नारे लगवाए गए.

10 मार्च 2021– रांची: सचिन कुमार वर्मा  को ट्रक चोरी के आरोप में पीट-पीट कर मार दिया गया.

13 मार्च 2021– रांची: मोबारक खान को बाइक चोरी के आरोप में पीट-पीट कर मार डाला गया.

19 मार्च 2021 – गुमला: हत्या के आरोपी रामचंद्र उरांव को भीड़ ने पीटकर मार डाला.


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नियंत्रण नहीं कर पा रहे हेमंत- रघुवर दास

अपनी सरकार में मॉब लिंचिंग को लेकर कड़ी आलोचना झेलने और फिर बाद में सत्ता गंवाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने दिप्रिंट से कहा, ‘एक घटना के बाद झारखंड को मॉब लिंचिंग का अड्डा बताने वाले नेता आज कहां सो गए हैं.’

दास ने कहा, ‘राज्य में लगभग हर माह मॉब लिंचिंग की एक घटना हो रही है, लेकिन सरकार के मुखिया दावा कर रहे हैं कि झारखंड में मॉब लिंचिंग बंद हो गई है.’

दास ने कहा, ‘2019 में तबरेज अंसारी की मौत को मानवता पर धब्बा बताने वाले राहुल गांधी और सोनिया गांधी आज मौन क्यों हैं. उनके समर्थन से चल रही झारखंड सरकार में आए दिन मॉब लिंचिंग, बलात्कार, हत्या, नक्सली घटनाएं हो रही हैं लेकिन कोई आंसू नहीं बहा रहा है. आखिर आपके आंसू भी आप लोगों की तरह इतने सेलेक्टिव क्यों हैं.’

वहीं तबरेज अंसारी की पत्नी साईस्ता ने दिप्रिंट को बताया, ‘उसके पति के मामले में 13 लोग गिरफ्तार हुए थे. इसमें 12 लोगों को हाई कोर्ट से बेल मिल चुका है. अब तक ट्रायल भी शुरू नहीं हुआ है. पूरी लड़ाई में अब वह अकेली रह गई है.’

सीएम हेमंत सोरेन ने उसे नौकरी और मुआवजा देने का आश्वासन दिया था. वह उनसे तीन बार मिल भी चुकी है. लेकिन आज तक कुछ नहीं मिला है. अंसारी की पत्नी ने यह भी कहा कि अगर उसके पति के केस में आरोपियों को सजा हुई होती तो आज बाकि लोगों को इसका शिकार नहीं होना पड़ता.

वर्तमान सरकार के परिवहन एवं संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम ने दिप्रिंट से कहा, ‘हम कानून के साथ इसके लिए अलग फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने पर विचार कर रहे हैं. ऐसा कानून बने कि लोगों को दहशत रहे.’

हालांकि आलम ये नहीं बता पाए कि पिछली सरकार की तरह उनकी सरकार में भी लगातार ऐसी घटनाएं क्यों घट रही है.

उन्होंने कहा कि हम घटना के 24 घंटे के अंदर आरोपी को गिरफ्तार कर रहे हैं.

वर्तमान में जारी विधानसभा सत्र में बीते 14 मार्च को सीपीआई (एमएल) के विधायक विनोद सिंह ने विधानसभा को हाल में हुए इन घटनाओं की तरफ ध्यान आकृष्ट कराया था.

इसके बाद कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी ने कहा कि वर्तमान सरकार में भी इस तरह की घटनाओं का न रुकना बहुत ही दुखद है. पिछली सरकार में इसकी मानसिकता डेवलप की गई. जो इस सरकार में भी जारी है.

दिप्रिंट से अंसारी ने कहा, ‘मैंने अपने सरकार को भी कटघरे में खड़ा किया है. दोबारा इसे सदन में उठाउंगा और कानून बनाने की मांग करूंगा.’


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सबसे अधिक घटनाओं के बावजूद झारखंड में अब तक कानून नहीं

मॉब लिंचिंग के मामले में हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर करने वाले एस अली ने बताया, ’17 मार्च 2016 से 13 मार्च 2021 तक 42 लोगों की मॉब लिंचिग हुई है. जिसमें 23 की मौत और 19 गंभीर रूप से घायल हुए हैं.’

उन्होंने यह भी बताया कि साल 2017 में देशभर मे हो रही मॉब लिंचिंग की घटना को लेकर तहसीन पूनावाला सुप्रीम कोर्ट गए थे. उस मामले में झारखंड को भी पार्टी बनाया गया था. उसी साल झारखंड हाई कोर्ट में रंजीत उरांव ने भी ऐसी ही घटनाओं पर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की. उसके बाद कोर्ट ने कहा कि चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है, ऐसे में वहां से जो डायरेक्शन आएगा, उसे राज्य में लागू करना होगा.

जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने साल 2018 में 29 बिंदुओं का एक डायरेक्शन दिया. इसमें मॉब लिंचिंग को रोकने के प्रयासों, पीड़ित को मुआवजा, घटना न रोक पाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई आदि का जिक्र था.

इसके बाद साल 2019 में तबरेज अंसारी नामक युवक की हत्या भीड़ द्वारा कर दी गई थी. एस अली के मुताबिक इस घटना के बाद उन्होंने भी झारखंड हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की. इसका विरोध सरकारी वकीलों ने यह कह कर किया कि यह राज्य को बदनाम करने की कोशिश है. तबरेज की मौत हार्ट अटैक से हुई है. कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी.

वहीं झारखंड हाई कोर्ट के वकील शादाब अंसारी ने दिप्रिंट को बताया, ‘पूरे देशभर में मॉब लिंचिंग के मामलों में मात्र दो केस में कंविक्शन हुआ है. पहला रामगढ़ के अलीमुद्दीन और दूसरा लातेहार के मजलूम अंसारी और इम्तेयाज हत्या मामले में. दोनों ही मामले झारखंड के हैं.’

मॉब लिंचिंग को लेकर मणिपुर, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में कानून बनाया जा चुका है. लेकिन झारखंड में अब तक ऐसा कोई कानून नहीं है.

हाल ही में सीएम हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को बुलाकर इस बाबत जानकारी ली है और कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है. संभावना है कि चालू सत्र में ही सरकार इस बिल को लाएगी.

(आनंद दत्ता स्वतंत्र पत्रकार हैं)


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