पटना: दिल्ली की तिहाड़ जेल में मिलने वाले खाने को “ज्यादा मसालेदार, तेल वाला, डीप-फ्राइड और चिकना” बताते हुए अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक ने अदालत से अपने लिए खुद खाना बनाने की अनुमति मांगी है. उन्हें इस साल मार्च में भारत की एजेंसियों ने एक आतंकी साजिश के मामले में गिरफ्तार किया था.
इसके लिए वैनडाइक ने अदालत से अनुरोध किया है कि उनके परिवार को जेल में उनके लिए खाना बनाने का सामान, जैसे कुकिंग स्टोव और इंडक्शन कुकर, साथ ही ऑलिव ऑयल और पास्ता जैसी खाने की चीजें लाने की अनुमति दी जाए.
राष्ट्रीय राजधानी में एनआईए की विशेष अदालत के जज के सामने दायर अपनी याचिका में वैनडाइक ने कहा कि न्यायिक हिरासत में तीन महीने के दौरान उनका 14 किलो तक वजन कम हो गया है. उन्होंने कहा कि जेल का खाना न खा पाने की वजह से उन्हें मजबूर होकर लंबे समय तक भूख हड़ताल करनी पड़ी.
वैनडाइक को छह यूक्रेनी नागरिकों के साथ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गिरफ्तार किया था. आरोप है कि वे पहले अवैध तरीके से भारत के सीमावर्ती राज्य मिजोरम में दाखिल हुए, फिर वहां से म्यांमार गए और वहां ऐसे एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स (EAGs) को ट्रेनिंग दी, जो भारत में सक्रिय आतंकी संगठनों का समर्थन करते हैं और म्यांमार की जुंटा सरकार को निशाना बनाते हैं.
वैनडाइक को सबसे पहले इस साल मार्च में कोलकाता इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था. इसके कुछ समय बाद छह यूक्रेनी नागरिकों को लखनऊ, दिल्ली और मुंबई के एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया. बाद में सभी को एनआईए के हवाले कर दिया गया. वैनडाइक 6 अप्रैल से तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में हैं.
पटियाला हाउस कोर्ट में दायर अपनी याचिका, जिसकी कॉपी दिप्रिंट ने देखी है, में वैनडाइक ने कहा कि “उन्हें 06.05.2026 से भूख हड़ताल पर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है और इस आवेदन की तारीख तक उनकी भूख हड़ताल 50 दिनों से जारी है.”
उन्होंने कहा, “आवेदक/आरोपी अमेरिका का नागरिक है और वह भारतीय जेलों में मिलने वाले खाने का आदी नहीं है, जो ज्यादातर मसालेदार, तेल वाला, डीप-फ्राइड और चिकना होता है.”
उन्होंने आगे कहा, “आवेदक न तो इस तरह का खाना खाने का आदी है और न ही मेडिकल तौर पर इसे नियमित रूप से खा सकता है. इस खाने की वजह से उसे गंभीर शारीरिक परेशानी हुई है और उसकी सेहत पर बुरा असर पड़ा है. इसलिए, पर्याप्त पोषण लेने की इच्छा होने के बावजूद वह जेल का खाना नहीं खा पा रहा है और उसकी भूख हड़ताल जारी है.”
वैनडाइक ने जेल में एक और स्वास्थ्य संबंधी खतरे का भी जिक्र किया. उन्होंने अदालत से जेल अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की कि उन्हें मच्छर भगाने की दवा, मच्छरदानी या दूसरी जरूरी सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए.
उन्होंने कहा, “आवेदक यह भी कहना चाहता है कि जेल परिसर और उसकी बैरक में बड़ी संख्या में मच्छर हैं. आवेदक की कमजोर शारीरिक स्थिति और कम हुई रोग प्रतिरोधक क्षमता को देखते हुए उसे मलेरिया और डेंगू जैसी मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा है.”
उन्होंने आगे कहा, “इसलिए जरूरी है कि जेल नियमों के तहत मच्छरदानी, मच्छर भगाने की दवा या कोई दूसरी उपयुक्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, ताकि उसकी सेहत सुरक्षित रह सके.”
अदालत ने इस मामले में सुनवाई के लिए 21 जुलाई की तारीख तय की है. साथ ही तिहाड़ जेल प्रशासन से वैनडाइक की याचिका पर जवाब मांगा है.
वैनडाइक के खिलाफ मामला
यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन करने के बाद वैनडाइक ने जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से सिक्योरिटी स्टडीज में मास्टर्स किया. उनकी वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, वह इस कोर्स में दाखिला पाने वाले सबसे कम उम्र के छात्रों में से एक थे. उनकी मास्टर्स थीसिस इस बात पर आधारित थी कि ओसामा बिन लादेन के नेतृत्व वाला अल कायदा अमेरिका को क्यों निशाना बनाता है.
उन्हें इस साल 13 मार्च को भारतीय अधिकारियों ने गिरफ्तार किया था. इसके बाद उन्हें एनआईए की हिरासत में भेज दिया गया. एजेंसी की ओर से विशेष लोक अभियोजक राहुल त्यागी और वकील जतिन खत्री व अमित रोहिल्ला ने अदालत में कहा कि विदेशी नागरिकों का यह समूह म्यांमार में मौजूद एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स (EAGs) को पहले से तय ट्रेनिंग देने के लिए वहां गया था. आरोप है कि उन्होंने भारत की जमीन का इस्तेमाल करते हुए ड्रोन वॉरफेयर, ड्रोन ऑपरेशन, ड्रोन असेंबली और जैमिंग टेक्नोलॉजी जैसी ट्रेनिंग दी, जिसका इस्तेमाल म्यांमार की जुंटा सरकार को निशाना बनाने के लिए किया जाना था.
अदालत में सुनवाई के दौरान एनआईए के वकीलों ने यह भी कहा कि विदेशी नागरिकों ने इस साजिश से जुड़ी “महत्वपूर्ण जानकारी” दी है. उन्होंने बताया कि वे ऐसे आतंकियों के “सीधे संपर्क” में थे, जिनके पास AK-47 राइफलें थीं.
एजेंसी ने मोबाइल फोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी जांच के लिए भेजे. डेटा की जांच में पता चला कि वैनडाइक ने पिछले साल भी भारत का इस्तेमाल ट्रांजिट रूट के तौर पर किया था.
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