कोलकाता, 14 जून (भाषा) पश्चिम बंगाल के हिंसा प्रभावित जिलों में मंगलवार को स्थिति शांतिपूर्ण रही। हालांकि, इन इलाकों में अब भी भारी संख्या में पुलिस बल तैनात हैं। पुलिस ने यह जानकारी दी।
पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर हुए प्रदर्शनों के बाद पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में तनाव व्याप्त हो गया था।
पुलिस ने बताया कि राज्य में नौ जून को हुई हिंसा के संबंध में 240 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 42 मामले दर्ज किए गए हैं।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) जावेद शमीम ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है और शाम छह बजे तक किसी अप्रिय घटना की कोई सूचना नहीं है। हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। हमारे वरिष्ठ अधिकारी जिलों में मौजूद हैं।’’
उन्होंने कहा कि हिंसा प्रभावित इलाकों में सोमवार रात पुलिसकर्मियों ने छापेमारी की और गश्त लगाई। कुछ और लोगों को गिरफ्तार भी किया गया।
आरोपियों के खिलाफ हावड़ा, मुर्शिदाबाद, नादिया और उत्तर तथा दक्षिण 24 परगना जिलों में प्राथमिकी दर्ज की गई है, जहां हिंसा हुई थी।
हावड़ा, मुर्शिदाबाद के बेल्दंगा और नादिया के बेथुंदाहरी में 15 जून तक दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई है।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि हावड़ा में सोमवार से इंटरनेट सेवाएं फिर से शुरू कर दी गईं, लेकिन बेल्दंगा में 15 जून तक इंटरनेट सेवाएं निलंबित रहेंगी।
राज्य के गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बेथुंदाहरी में इंटरनेट सेवाओं को बहाल करने पर फैसला वहां की स्थिति की समीक्षा के बाद किया जाएगा।
इस बीच, किसी भी अप्रिय घटना और ट्रेन सेवाओं में व्यवधान से बचने के लिए राज्य के विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) तथा राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के जवानों को तैनात किया गया है।
उधर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो निलंबित नेताओं द्वारा पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का विरोध करने के लिए यहां एस्पलेनेड इलाके में अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के लिए कोलकाता पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए।
राज्य सरकार ने सोमवार को राज्य में सभी बहु प्रणाली ऑपरेटर (एमएसओ) और केबल ऑपरेटर के लिए एक सलाह जारी की कि वे केबल टेलीविजन नेटवर्क अधिनियम, 1995 का उल्लंघन करने वाली किसी भी संवेदनशील सामग्री को प्रसारित करने से बचें।
इस सलाह पर प्रतिक्रिया देते हुए विपक्षी दल भाजपा ने आरोप लगाया कि तृणमूल सरकार ‘‘मीडिया को चुप कराने और सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रही है।’’
भाषा सिम्मी पारुल
पारुल
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