गंगटोक, 10 अप्रैल (भाषा) सिक्किम विधानसभा ने सोमवार को एक प्रस्ताव पारित कर हाल ही में पारित वित्त अधिनियम, 2023 में सिक्किमी की परिभाषा के विस्तार पर केंद्र से स्पष्टीकरण मांगा।
इस मामले पर चर्चा के लिए बुलाए गए एक दिन के सत्र के दौरान सदन ने ध्वनि मत से संकल्प को स्वीकार कर लिया।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही शिक्षा मंत्री लुंगा नीमा लेपचा ने विधानसभा अध्यक्ष अरुण उप्रेती की अनुमति से प्रस्ताव पेश किया।
सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग को मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग के जवाब को बाधित करने के लिए सदन से बाहर कर दिया गया।
पच्चीस साल तक मुख्यमंत्री रहे चामलिंग ने अपने उत्तराधिकारी पर सिक्किम के लोगों को विशेष अधिकार प्रदान करने वाले अनुच्छेद 371 एफ पर वित्त अधिनियम के प्रभाव पर सदन को ‘गुमराह’ करने का आरोप लगाया।
चामलिंग ने मीडिया से कहा कि वित्त अधिनियम 2023 में अनुच्छेद 371एफ को हल्का कर दिया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘अगले कुछ वर्षों में, अधिक बाहरी लोगों के लिए सिक्किम आने और विशेष अधिकारों का आनंद लेने के लिए दरवाजे खोल दिए गए हैं।’’
बाद में, संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सिक्किम के लोगों के अधिकारों से किसी भी तरह से समझौता नहीं किया गया है और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि सिक्किमी की परिभाषा का विस्तार केवल आयकर छूट के लिए है।
उन्होंने कहा, ‘अगर पुराने बाशिंदों और उनके वंशजों को आयकर से छूट मिलती है, तो इससे हम क्या खोएंगे?’
इस बीच, वित्त अधिनियम के लागू होने के बाद अनुच्छेद 371एफ के कथित रूप से कमजोर होने के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो नेताओं-एसबी कार्की और लातेन शेरपा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
शेरपा ने 2019 में भाजपा के टिकट पर सिक्किम की एकमात्र लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था, जबकि कार्की पार्टी की प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष थे।
भाषा नेत्रपाल दिलीप
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