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Sunday, 12 April, 2026
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शिवसेना ने बागी विधायकों को चुनाव लड़ने की चुनौती दी; केंद्र ने 15 बागियों को दी ‘वाई-प्लस’ सुरक्षा

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मुंबई/गुवाहाटी, 26 जून (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे के बीच जारी सत्ता संघर्ष रविवार को और बढ़ गया। पार्टी के सांसद संजय राउत ने बागी विधायकों को विधानसभा की सदस्यता त्याग कर चुनाव लड़ने की चुनौती दी। इसबीच, पार्टी के कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन लगातार जारी हैं।

वहीं, केंद्र सरकार ने रविवार को शिवसेना के कम से कम 15 बागी विधायकों को सीआरपीएफ जवानों से लैस ‘वाई प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया जिन विधायकों को सुरक्षा मुहैया कराई गई है, उनमें रमेश बोर्नारे, मंगेश कुदलकर, संजय शिरसत, लताबाई सोनवणे, प्रकाश सुर्वे और 10 अन्य विधायक शामिल हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, महाराष्ट्र में रह रहे इन विधायकों के परिवारों को भी सुरक्षा प्रदान की जाएगी, क्योंकि सुरक्षा घेरे के अंतर्गत गृह सुरक्षा दल भी शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा गृह मंत्रालय से की गई एक सिफारिश के बाद विधायकों को ‘वाई प्लस’ श्रेणी की सीआरपीएफ सुरक्षा प्रदान करने की मंजूरी दी गई है।

वहीं, शिवसेना के नेता और महाराष्ट्र के मंत्री आदित्य ठाकरे ने मुंबई में लगातार दूसरे दिन शिवसेना कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि बागी विधायकों के लिए राज्य और पार्टी के द्वार बंद हो गए हैं।

शिवसेना के अध्यक्ष एवं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के पुत्र आदित्य (30) ने कहा, ”दोबारा चुनाव लड़िए, हम आपको हराकर दिखाएंगे।”

राज्य के पर्यावरण एवं वन मंत्री आदित्य ने कहा, ‘‘जब ये विधायक राज्य विधानसभा में आएं, तो हमारी आंखों में आंखें डालने की हिम्मत दिखाएं और हमें बताएं कि हमने उनके लिए क्या नहीं किया है। इन लोगों की महत्वाकांक्षा कभी खत्म नहीं होने वाली है।”

आदित्य ने कहा कि सभी विधायकों को पर्याप्त विकास निधि उपलब्ध कराई गई । ठाकरे ने कहा कि शिवसेना आम लोगों की आवाज बन गई है।

उन्होंने कहा, ”शिवसेना में एकनाथ शिंदे के लिए बहुत सम्मान था। मई में उनसे पूछा भी गया था कि क्या वह मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं … मुझे उन पर दया आती है, मैं आक्रोशित नहीं हूं। वह बगावत करके सूरत और फिर गुवाहाटी भागने के बजाय ठाणे या मुंबई में रहकर अपनी महत्वाकांक्षाएं जाहिर कर सकते थे।”

इससे पहले शनिवार को पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने बागी विधायकों को चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि मुंबई हवाईअड्डे से विधान भवन तक जाने वाली सड़क वर्ली से होकर गुजरती है।

मुंबई का वर्ली इलाका पारंपरिक रूप से शिवसेना का गढ़ रहा है, जहां से आदित्य ठाकरे विधायक हैं।

विद्रोही समूह ने कहा है कि उसे विधायक दल में दो-तिहाई बहुमत प्राप्त है और वह सदन में अपना संख्या बल साबित करेगा। असंतुष्टों ने अपने समूह का नाम ”शिवसेना (बालासाहेब)” रखा है।

आदित्य ने अपने संबोधन में कहा था, ”हवाईअड्डे से विधान भवन तक का रास्ता वर्ली से होकर गुजरता है। अच्छा हुआ कि बागी (शिवसेना से) चले गए। पार्टी में विद्रोहियों के लिए कोई जगह नहीं है।”

पार्टी के प्रवक्ता संजय राउत ने उपनगर दहिसर में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने संकटग्रस्त पार्टी नेतृत्व के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश की और शिंदे गुट पर हमला बोला।

राउत ने कहा कि मौजूदा संकट शिवसेना को पुनर्जीवित करने का एक अवसर है।

उन्होंने शिवेसना कार्यकर्ताओं को संबोधित करने के दौरान शिंदे के साथ गुवाहाटी में मौजूद विधायकों की संख्या की ओर इशारा करते हुए कहा, ”हमने सबक सीख लिया है कि किस पर भरोसा किया जाना चाहिए। वे ऐसे शरीर हैं, जिनकी आत्मा मर चुकी है। 40 शव असम से आएंगे और पोस्टमॉर्टम के लिए सीधे मुर्दाघर भेजे जाएंगे।”

इससे पहले राउत ने पत्रकारों से कहा, ”विद्रोहियों को मेरी खुली चुनौती है कि वे इस्तीफा दें और अपने मतदाताओं से नए सिरे से जनादेश मांगें। अतीत में, छगन भुजबल, नारायण राणे और उनके समर्थकों ने अन्य दलों में शामिल होने के लिए शिवसेना विधायक के रूप में इस्तीफा दे दिया था। यहां तक ​​​​कि मध्य प्रदेश में (केंद्रीय मंत्री) ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों ने (मार्च 2020 में) कांग्रेस विधायकों के रूप में इस्तीफा दे दिया था। ”

उन्होंने कहा कि शिवसेना नेता व कार्यकर्ता तैयार हैं और शीर्ष नेतृत्व के इशारे का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी विद्रोहियों से निपटने के लिए तैयार है।

राउत ने कहा कि पार्टी के दरवाजे उन विधायकों के लिए खुले हैं जो वापस आना चाहते हैं। उन्होंने कहा, ”मैं उनमें से कई के संपर्क में हूं। देखते हैं कि भाजपा शिंदे को मुख्यमंत्री बनाती है या नहीं।”

वहीं, राकांपा प्रमुख शरद पवार ने रविवार को पार्टी के नेताओं, कांग्रेस के मंत्रियों बालासाहेब थोराट व अशोक चव्हाण और शिवसेना के अनिल परब तथा अनिल देसाई से मुलाकात की और छह दिन पहले हुई बगावत के राजनीतिक परिणामों पर चर्चा की।

शिवसेना के एक अन्य नेता और उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री उदय सामंत से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है और वह कथित तौर पर सूरत से गुवाहाटी जा रहे हैं।

अब तक, राज्य के मंत्री गुलाबराव पाटिल, दादा भुसे, संदीपन भुमरे, और राज्य मंत्री शंबुराजे देसाई तथा अब्दुल सत्तार विद्रोहियों के खेमे में शामिल हो चुके हैं। प्रहार जनशक्ति पार्टी के एक अन्य मंत्री बच्चू कडू और शिवसेना कोटे से एक निर्दलीय मंत्री राजेंद्र येद्रावकर भी शिंदे के साथ गुवाहाटी में डेरा डाले हुए हैं।

मुंबई में महिलाओं सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता प्रभादेवी स्थित ‘सामना’ के कार्यालय के बाहर जमा हुए और शिंदे और बागी विधायकों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मोटरसाइकिल रैली निकाली।

विद्रोहियों में शामिल भायखला की विधायक यामिनी जाधव के नाम वाले एक साइनबोर्ड पर कालिख पोती गई।

वहीं, असम के मंत्री अशोक सिंघल और पीयूष हजारिका रविवार को गुवाहाटी के लग्जरी होटल पहुंचे, जहां एकनाथ शिंदे अन्य विधायकों के साथ डेरा डाले हुए हैं। इस दौरान मंत्रियों ने विधायकों के साथ चर्चा की। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय कुमार ने आरोप लगाया है कि भाजपा के नेतृत्व वाली असम सरकार महाराष्ट्र के बागी विधायकों को लग्जरी होटल में ‘कॉकटेल-मॉकटेल’ परोसने में व्यस्त है, लेकिन राज्य में बाढ़ प्रभावित लोगों को मुफ्त पेयजल भी उपलब्ध नहीं करा पा रही है।

भाषा जोहेब सुभाष

सुभाष

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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