नयी दिल्ली, 22 अक्टूबर (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 8,941 करोड़ रुपये की लागत वाली 43 परियोजनाओं का बृहस्पतिवार को उद्घाटन एवं शिलान्यास किया, जिनमें यमुना नदी की सफाई के लिए ओखला में दिल्ली का सबसे बड़ा सीवेज शोधन संयंत्र (एसटीपी) भी शामिल है।
शाह ने कहा कि दिल्ली सरकार ने यमुना में डाले जाने वाले मल-जल की मात्रा को कम किया है। उन्होंने संकल्प लिया कि भाजपा सरकार दिल्ली में यमुना की मई 2029 तक पूर्ण सफाई हो जाने को सुनिश्चित करेगी।
शुरू की गई परियोजनाओं में ओखला में एक नया एसटीपी, 29 विकेंद्रीकृत सीवेज शोधन संयंत्र (डीएसटीपी) और नयी सीवर लाइन शामिल हैं। इसका उद्घाटन नजफगढ़ में किया गया।
शाह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘ये परियोजनाएं यमुना नदी की सफाई की रीढ़ की तरह हैं। केंद्र, दिल्ली सरकार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा, ये ‘चार इंजन’ जनता को स्वच्छ यमुना और पेयजल उपलब्ध कराने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।’
दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के अधिकारियों ने कहा कि ओखला में नए 124 मिलियन गैलन प्रतिदिन (एमजीडी) संयंत्र का निर्माण 1,161 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर किया गया है। इसे देश और दिल्ली में सबसे बड़ा एसटीपी माना जा रहा है।
यह संयंत्र राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन और दिल्ली जल बोर्ड के बीच एक संयुक्त उद्यम है, जिसे मूल रूप से 2017 में मंजूरी दी गई थी।
बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा, “यमुना एक्शन प्लान-3 के तहत निर्मित यह संयंत्र अपशिष्ट जल का शोधन करेगा। यह सुनिश्चित करने के लिए भी व्यवस्था की गई है कि शोधित पानी निर्धारित मानकों पर खरा उतरे। इस परियोजना से ओखला क्षेत्र के लगभग 70 लाख लोगों को लाभ होने की उम्मीद है।”
शाह ने कहा, ‘पिछली सरकारें केवल बहाने बनाती थीं, लेकिन अब वर्तमान भाजपा सरकार मई 2029 से पहले यमुना को साफ कर देगी। योजना तीन साल में हर घर में सीवर कनेक्शन और पीने का साफ पानी उपलब्ध कराने की है।’
कार्यक्रम में दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री और अन्य उपस्थित थे।
गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार नालों के पानी को सीधे नदी में जाने से रोकने, पुराने एसटीपी का आधुनिकरण करने, नए एसटीपी स्थापित करने, सीवर लाइन बिछाने और सीवर नेटवर्क को एसटीपी से जोड़ने पर विशेष ध्यान दे रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य हर घर को सीवर नेटवर्क से जोड़ना और प्रत्येक सीवर लाइन को एसटीपी से जोड़ना है, ताकि अशोधित पानी यमुना में न पहुंचे।
बाहरी दिल्ली में 29 नए डीएसटीपी और सीवेज पंपिंग स्टेशन 358 अनधिकृत कॉलोनियों और 113 गांवों को कवर करेंगे, जिससे नरेला, बवाना, कंझावला, बिजवासन, टिकरी कलां और आसपास के क्षेत्रों के 36.29 लाख निवासियों को लाभ होगा।
गुप्ता ने कहा, ‘विकेंद्रीकृत एसटीपी और सीवेज पंपिंग स्टेशनों का निर्माण 3,113.67 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा।’
वहीं, 1,034 किलोमीटर लंबा नया सीवर नेटवर्क बिछाने से जुड़ी एक और परियोजना शुरू की गई, जिसकी लागत लगभग 1,691 करोड़ रुपये है, जिससे लगभग 25.82 लाख लोगों को लाभ हुआ।
दिल्ली सरकार चंद्रावल के पुराने मल-जल शोधन संयंत्र (डब्ल्यूटीपी) की जगह नया संयंत्र बनाने जा रही है। इस परियोजना के लिए शिलान्यास समारोह आयोजित किया गया।
नए संयंत्र को 298.3 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा और इससे से लगभग 22 लाख निवासियों को लाभ होगा। यह 1935 और 1955 में स्थापित दो पुराने डब्ल्यूटीपी की जगह लेगा।
जल मंत्री वर्मा ने कहा कि ये परियोजनाएं यमुना को साफ करने के दिल्ली सरकार के प्रयासों को बल देंगी।
वर्मा ने कहा, ‘इन परियोजनाओं के माध्यम से, जल शोधन संयंत्रों के विकास, सीवर नेटवर्क के विस्तार, अपशिष्ट जल शोधन क्षमता में वृद्धि और जल निकासी प्रणाली में सुधार जैसी प्रमुख पहल को गति मिलेगी।’
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