Wednesday, 29 June, 2022
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‘सीरियल ऑफेंडर मुनव्वर को रंगे हाथ पकड़ना था’—कैसे बनी कॉमेडियन की गिरफ्तारी की ‘योजना’

शिकायतकर्ता और हिंद रक्षक संगठन के प्रमुख एकलव्य सिंह गौर का कहना है कि मुनव्वर फारुकी ने हिंदू भगवानों का अपमान किया है. इस आरोप से कॉमेडियन ने साफ इनकार किया है.

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इंदौर/दिल्ली: हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी के कारण कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी की इंदौर में हुई गिरफ्तारी हिंद रक्षक संगठन (एचआरएस) की एक ‘ठोस योजना’ का नतीजा थी जैसा इंदौर स्थित इस संगठन के प्रमुख और भाजपा विधायक मालिनी गौर के बेटे एकलव्य सिंह गौर ने दिप्रिंट से कहा कि उनका संगठन उसे ‘रंगे हाथ पकड़ना’ चाहता था.

मध्य प्रदेश के दिवंगत मंत्री और एकलव्य के पिता लक्ष्मण सिंह गौर द्वारा 1996 में स्थापित एचआरएस खुद को राष्ट्र, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए समर्पित एक संगठन बताता है.

खुद को भाजपा की युवा शाखा भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजुयमो) का सदस्य बताने वाले एकलव्य इस मामले में शिकायतकर्ता है. इनकी शिकायत के आधार पर ही 1 जनवरी को फारुकी और चार अन्य स्टैंड-अप कॉमेडियन को हिंदू देवताओं के अपमान और अन्य आपत्तिजनक टिप्णियों के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

ये आपत्तिजनक कॉमेडी कथित तौर पर इंदौर के 56 दुकान क्षेत्र स्थित कैफे मुनरो में नए साल के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की गई थी.

जहां एकलव्य का दावा है कि फारुकी ने हिंदू देवी-देवताओं, केंद्रीय मंत्री अमित शाह और गुजरात दंगों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की, वहीं कॉमेडियन ने इस आरोप का खंडन किया है.

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फारुकी ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक याचिका दायर करके उनकी जमानत अर्जी खारिज करन के ट्रायल कोर्ट के 5 जनवरी के आदेश को चुनौती दी है. मामला शुक्रवार को हाई कोर्ट की इंदौर पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है, जिसमें उनकी तरफ से कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा दलीलें पेश कर सकते हैं.

उन्होंने एफआईआर को तीन तर्कों के आधार पर चुनौती दी है, जिसमें यह भी शामिल है कि उन्हें तो इस कार्यक्रम में परफॉर्म करने का मौका ही नहीं मिला था.


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‘सीरियल ऑफेंडर’

गौर ने दिप्रिंट से बातचीत में फारुकी को ‘सीरियल ऑफेंडर’ करार दिया. उन्होंने कहा कि नए साल के कार्यक्रम के बारे में उन्हें पहले से ही जानकारी मिल गई थी और उन्होंने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर बतौर दर्शक इसमें शामिल होने का फैसला किया.

उन्होंने कहा, ‘वह बार-बार वही गलतियां करता है. इस बार भी उसने हिंदू देवताओं के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी की.’

गौर ने बताया, ‘हमें पहले से ही इस कार्यक्रम के बारे में पता चल गया था और हममें से पांच-छह लोगों ने उसे रंगे हाथ पकड़ने के लिए दर्शकों के रूप में उसमें शामिल होने का फैसला किया. हमने उस कार्यक्रम का वीडियो भी बनाया जिसमें स्टैंड-अप कॉमेडियन फारुकी ने, जैसा कि हमें अंदाजा था, हिंदू देवी-देवताओं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां की. उन्होंने इसमें गोधरा के दंगों को भी जिक्र किया.’ साथ ही बताया कि कार्यक्रम का वीडियो फुटेज पुलिस को सौंप दिया गया है.

उन्होंने कहा, ‘इससे पहले उन्होंने कारसेवकों का मजाक उड़ाया था जिनकी (गोधरा ट्रेन में आग लगने के कारण) मौत हो गई थी.’

‘उन्होंने वहां परफॉर्म ही नहीं किया’

फारुकी के खिलाफ एफआईआर, जो दिप्रिंट के पास मौजूद है, में धार्मिक भावनाओं को आहत करने संबंधी आईपीसी की धाराओं के अलावा सार्वजनिक प्रशासन की तरफ से जारी आदेशों (कोविड-19 को लेकर पाबंदियों के संदर्भ में) के उल्लंघन के आरोप भी लगाए गए हैं.

अन्य बातों के अलावा उन पर महिलाओं और बच्चों की मौजूदगी वाले एक कार्यक्रम में सार्वजनिक तौर पर एक कंडोम दिखाने का आरोप लगाया गया है, जिसका एफआईआर में ‘आपत्तिजनक वस्तु’ के तौर पर जिक्र किया गया है.

एफआईआर में वीडियो फुटेज का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इसमें नजर आ रहा है कि ‘फारुकी भगवान शिव, गणेश, कार्तिकेय और देवी पार्वती का मजाक उड़ा रहे हैं.’

पुलिस ने पांच अन्य कॉमेडियन के खिलाफ कार्यक्रम के आयोजक के रूप में मामला दर्ज किया है.

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के समक्ष अपनी याचिका में फारुकी ने कहा है कि उन्होंने वो लाइनें कभी नहीं बोलीं जिनका एफआईआर में जिक्र किया गया है. उन्होंने अपने खिलाफ मामले को तीन तर्कों के आधार पर चुनौती दी है.

उनके वकील अंशुमान श्रीवास्तव ने दिप्रिंट को बताया कि पुलिस ने इस घटना के वीडियो को ठीक से नहीं खंगाला है क्योंकि फारुकी को तो वहां परफॉर्म करने का मौका ही नहीं मिला था.

श्रीवास्तव ने कहा, ‘गौर और उसके साथियों ने तो उसे बोलने से पहले ही रोक दिया था और वीडियो यह बात साबित करता है. इसके अलावा, वह गौर को यह समझाने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं कि उन्होंने वहां मौजूद दर्शकों की भावनाओं को आहत करने के लिए कुछ भी नहीं कहा.’

वकील ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि गौर पहले की एक घटना का जिक्र कर रहे हैं जिसमें फारुकी ने हिंदू देवता राम को लेकर कुछ टिप्पणी की थी. इसी के जवाब में फारुकी ने गौर को बताया था कि उन्होंने उस घटना के लिए माफी मांग ली थी, जिसका एक वीडियो उनके यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किया गया था.

जमानत मांगने का दूसरा आधार यह है कि याचिकाकर्ता का दावा है कि आईपीसी की धारा 295ए के तहत लगाए गए आरोप—‘किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं अथवा उसके धर्म या धार्मिक आस्थाओं को आहत करने के उद्देश्य के साथ जानबूझकर किया गया और दुर्भावनापूर्ण कार्य—पूरी तरह गलत हैं.

वकील ने कहा, ‘एफआईआर में ऐसा कोई खास आरोप नहीं लगाया गया है, जैसे किस अभिव्यक्ति का इस्तेमाल किया गया या क्या बोला गया है, जो यह दर्शाता हो कि यह दंड प्रक्रिया के तहत आता है.’

उन्होंने आगे कहा कि इसके अलावा धारा 295ए के तहत अभियुक्त की ओर से जानबूझकर अपराध करने का इरादा स्पष्ट होना चाहिए.

श्रीवास्तव ने कहा कि फारुकी ने न तो शो की कोई योजना बनाई थी और न ही उनका इरादा किसी का अपमान करने का था. उन्होंने आगे जोड़ा कि भीड़ तो वहां स्वेच्छा से मौजूद थी और वह उनके कहने पर वहां नहीं आई थी.

तीसरा आधार यह है कि किसी सरकारी अधिकारी की तरफ से जारी आदेशों का उल्लंघन करने के आरोप क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर जोड़े गए हैं.

श्रीवास्तव ने कहा, ‘फारुकी आयोजक नहीं थे, इसलिए, उन्हें इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता है. यही नहीं अगर यह माना जाता है कि कोविड-19 प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ था, तो वहां मौजूद सभी लोगों के साथ-साथ उस जगह के मालिक के खिलाफ भी एक साझी एफआईआर होनी चाहिए थी जहां कार्यक्रम हुआ था.’

दिप्रिंट के पास मौजूद फारूकी की याचिका के अनुसार, पांच कॉमेडियन के खिलाफ कोविड-19 प्रोटोकॉल के उल्लंघन का आरोप सही नहीं है क्योंकि अभियुक्त घटना के आयोजक नहीं थे, बल्कि कलाकार के रूप में शो में शामिल हुए थे.

फारूकी के वकील ने कहा कि कानूनन पुलिस को उस जगह के मालिक के खिलाफ मामला दर्ज करना चाहिए जहां घटना हुई थी, जो कि कथित तौर पर नहीं किया गया.


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पुलिस का दावा ‘सारे सबूत मौजूद’

फारुकी के वकील के तर्कों का विरोध करते हुए इंदौर के उपमहानिरीक्षक (डीआईजी), हरिनारायण चारी मिश्रा ने कहा, ‘सभी पांच आयोजकों, जिनमें फारुकी और अन्य शामिल हैं, को उनकी सामूहिक भागीदारी के लिए बुक किया गया है. एक बार जब हम चार्जशीट दाखिल करने के स्तर पर आएंगे तो फिर उनमें से सबकी अलग-अलग भूमिका देखेंगे और उसके हिसाब से ही आरोप तय करेंगे.’

इंदौर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) विजय खत्री ने भी फारुकी के वकील की बातों को पूरी तरह खारिज किया और कहा कि पुलिस के पास सभी सबूत मौजूद हैं.

उन्होंने कहा, ‘ऐसी भ्रामक खबरें फैलाई जा रही हैं कि हमारे पास उनके खिलाफ सबूत नहीं हैं. हमारे पास सभी सबूत हैं, जिन्हें हम अदालत में पेश करेंगे. मीडिया को तो नहीं देंगे. यह तय करना अदालत का काम है कि वह उस सबूत से संतुष्ट है या नहीं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ कुछ अभद्र टिप्पणियां और चुटकुले सुनाए गए थे. हमने आयोजकों को गिरफ्तार किया, जिन्होंने मजाक उड़ाया था, और जो वहां परफॉर्म करने वाले थे.

उन्होंने कहा कि पुलिस को दर्शकों की तरफ से फोन आया था कि हंगामा हो रहा है और यह कैफे में कानून-व्यवस्था की स्थिति का मामला था.

खत्री ने कहा, ‘हमने तो वास्तव में इन लोगों (फारुकी और अन्य) को बचाया है. हिंद रक्षक संगठन के एकलव्य सिंह गौर ने एक शिकायत दर्ज कराई है और वीडियो फुटेज भी पेश किया है, जिसकी जांच की जा रही है.’

कोविड-19 प्रोटोकॉल के उल्लंघनों के आरोपों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि महामारी के मद्देनजर धारा 144 लागू होने के बावजूद आयोजक की तरफ से कार्यक्रम की कोई अनुमति नहीं ली गई थी.

इस बारे में पूछे जाने पर कि कैफे मालिक को कोविड-19 प्रोटोकॉल तोड़ने के लिए क्यों बुक नहीं किया गया है, मध्य प्रदेश पुलिस के सूत्रों ने कहा कि मामले में जांच अभी जारी है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘अगर कोई सबूत मिला तो हम उसके अनुसार कार्रवाई करेंगे.’

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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1 टिप्पणी

  1. एक टुच्चे से लड़के के लिए थे प्रिंट दो बार लेख निकलता है उसके समर्थन के लिए।।।इसलिए कि बो एक मुसलमान है ओर हिन्दू देवी देवताओं का अपमान करता है। तो सेक्युलर गिरोह के लिए बो एक आदर्श बन गया ।।।।।शर्म करो शेकर गुप्ता ।।।।न्यूज के बामे प्र पब्लिक को मूर्ख नहीं बना सकते।।।।।यह दो कौड़ी के लिख न। वाले बिके हुए है।।।।।।

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