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Thursday, 26 February, 2026
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सिंक्रो, ट्रैकर और एलेक्सिस: ग्रेटर नोएडा के चार इंजीनियर दुनिया के लिए रोबोट बना रहे हैं

रोबोटिक्स और ऑटोमेशन सेक्टर भारतीय कंपनियों के बीच तेज़ी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसमें ऐडवर्ब, ग्रेऑरेंज, अनबॉक्स रोबोटिक्स और ग्रिडबॉट टेक्नोलॉजीज ऑटोमेटेड सर्विस देने के लिए AI और रोबोटिक्स का इस्तेमाल कर रही हैं.

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नोएडा/ग्रेटर नोएडा: इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में एक हफ्ता बिताने के बाद — जहां उसने अपनी चाल दिखाई, आगे-पीछे चला, सामान उठाया और जिज्ञासु लोगों के साथ सेल्फी ली — एलेक्सिस-डब्ल्यू अब अपने घर नोएडा लौट आया है. यह ऐडवर्ब टेक्नोलॉजीज के मुख्यालय में है.

इस वैश्विक प्रदर्शनी का आकर्षण रहा यह भारत में बना ह्यूमनॉइड रोबोट अपनी निर्माता कंपनी ऐडवर्ब की सोच के केंद्र में है — मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड. उनके ग्राहकों की सूची में अब भारत और विदेश की बड़ी कंपनियां शामिल हैं, जैसे अमेजन, फ्लिपकार्ट, आईटीसी, कोका कोला, पेप्सिको और प्रॉक्टर एंड गैंबल यानी पी एंड जी. भारत में अपने रोबोट बनाना उनके लिए सिर्फ गर्व की बात नहीं है, बल्कि इससे समय और पैसे दोनों की बचत होती है. भारत से रोबोट बनाना काफी सस्ता पड़ता है, जिससे उनके उत्पाद ज्यादा किफायती हो जाते हैं.

2016 में स्थापित ऐडवर्ब टेक्नोलॉजीज चार पूर्व एशियन पेंट्स इंजीनियरों — संगीत कुमार, प्रतीक जैन, सतीश कुमार शुक्ला और बीर सिंह — की सोच का नतीजा है. वेयरहाउस ऑटोमेशन में विशेषज्ञता हासिल करने के बाद अब कंपनी भारतीय कोलैबोरेटिव रोबोट यानी कोबोट, क्वाड्रुपेड रोबोट और ह्यूमनॉइड के लिए वैश्विक बाजार तैयार कर रही है.

ऐडवर्ब टेक्नोलॉजीज के सीईओ और को-फाउंडर संगीत कुमार ने ग्रेटर नोएडा स्थित मुख्यालय में दिप्रिंट से बातचीत में कहा, “हम हर तरह के रोबोट बनाते हैं. दरअसल हमारे पास रोबोट की 22 फैमिली हैं. दुनिया में कोई कंपनी नहीं है जिसके पास रोबोटिक्स के क्षेत्र में इतना व्यापक उत्पाद रेंज हो.”

Co-founder Sangeet Kumar with Addverb's humanoid robot
एडवर्ब के ह्यूमनॉइड रोबोट के साथ को-फाउंडर संगीत कुमार | फोटो: सूरज सिंह बिष्ट | दिप्रिंट

इनोवेशन को बढ़ावा

नोएडा सेक्टर-156 में 2.5 एकड़ में फैला ऐडवर्ब टेक्नोलॉजीज का ‘बॉट वैली’ टेक्नोलॉजी पसंद करने वालों के लिए किसी सपने जैसा है. बाहर से यह खुले लॉन के बीच खड़े दूसरे ऑफिस की तरह ही दिखता है. लेकिन साधारण से दिखने वाली काली इमारत के अंदर असली कमाल होता है.

यह अनोखी सुविधा 2021 में रोबोट निर्माण के लिए शुरू की गई थी. इसमें बेहतरीन इलेक्ट्रॉनिक्स मशीनें लगी हैं. अभी यह हर साल 50,000 तक रोबोट बनाने की क्षमता रखती है.

इस सुविधा का शॉप फ्लोर वह जगह है जहां सारी गतिविधियां होती हैं. पीछे की दीवार पर एक बड़ा ग्रैफिटी म्यूरल है जो इनोवेशन, इंसान और तकनीक के मेल को दिखाता है. हर आकार और प्रकार के रोबोट बिना रुके अपने-अपने काम करते दिखते हैं.

पूरी जगह मशीनों की घूमने, सरकने और बीप की आवाजों से गूंजती रहती है. सिर्फ कुछ इंजीनियर इस लगभग पूरी तरह ऑटोमेटेड जगह की निगरानी करते हैं. भारी सामान उठाने से लेकर ट्रांसपोर्ट और क्वालिटी जांच तक सब कुछ रोबोट संभालते हैं.

एक इंजीनियर ने, जब वह रिमोट से एक क्वाड्रुपेड यानी रोबोट कुत्ते को चला रहे थे, कहा, “यहां कोई किसी की नौकरी लेने नहीं आया है. ये रोबोट इंसानों का काम आसान बनाने के लिए हैं.”

Addverb's headquarters in Noida Sector-156 is spread across an area of 2.5 acres
नोएडा सेक्टर-156 में एडवर्ब का हेडक्वार्टर 2.5 एकड़ एरिया में फैला हुआ है | फोटो: सूरज सिंह बिष्ट | दिप्रिंट

दिप्रिंट को अपनी सुविधा दिखाते हुए कुमार ने कहा कि कंपनी करीब 25 देशों को रोबोट सप्लाई कर रही है. आने वाले पांच साल में उनका लक्ष्य लगभग 100 देशों में अपनी मौजूदगी बनाना है.

कुमार ने कहा, “इस क्षेत्र में अवसर बहुत बड़ा है. विकसित देशों में वेयरहाउस और फैक्ट्री में कठिन और बार-बार होने वाले काम करने के लिए पर्याप्त लोग नहीं हैं. इसका मतलब है कि उनके पास रोबोटिक्स अपनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.”

भारत की कंपनियों के बीच यह क्षेत्र तेजी से रफ्तार पकड़ रहा है. ऐडवर्ब के अलावा ग्रेऑरेंज, अनबॉक्स रोबोटिक्स और ग्रिडबॉट टेक्नोलॉजीज जैसे घरेलू ब्रांड भी एआई और रोबोटिक्स का इस्तेमाल कर ऑटोमेटेड सेवाएं दे रहे हैं.

सहकर्मी से बिजनेस पार्टनर बने

ऐडवर्ब टेक्नोलॉजीज के को-फाउंडर अपनी साझेदारी को “स्वर्ग में बना मेल” कहते हैं. कुमार, जैन, शुक्ला और सिंह एशियन पेंट्स में साथ काम करते थे. वहीं उन्होंने पहली बार वेयरहाउस ऑटोमेशन की सेवा शुरू करने का विचार किया. 2016-17 के आसपास जब भारत में जीएसटी लागू हो रहा था, तब उन्हें लगा कि औद्योगिक ऑटोमेशन सेवा शुरू करने का यह सही समय है, जो भारत की औद्योगिक विकास कहानी में योगदान देगा.

कुमार ने कहा, “हम एशियन पेंट्स में बड़े वेयरहाउस के ऑटोमेशन पर काम करते थे. तभी हमें एहसास हुआ कि इस क्षेत्र में बहुत बड़ा अवसर है, सिर्फ भारत में नहीं बल्कि पूरी दुनिया में.”

शुरुआत में लोगों को शक था, लेकिन “फैंटास्टिक फोर” ने जल्दी ही ऐसा काम खड़ा कर दिया जिसने दोस्तों और पुराने सहकर्मियों का ध्यान खींचा. एशियन पेंट्स में उनके पूर्व बॉस जलज दानी ने भी निवेश किया और बाद में ऐडवर्ब के चेयरपर्सन बने. हाल ही में कंपनी को रिलायंस रिटेल से करीब 130 मिलियन डॉलर की फंडिंग भी मिली.

Addverb Technologies' robotics team is set on a mission to bring effective robotic technology from India to the world
एडवर्ब टेक्नोलॉजीज की रोबोटिक्स टीम भारत से दुनिया में असरदार रोबोटिक टेक्नोलॉजी लाने के मिशन पर है | फोटो: सूरज सिंह बिष्ट | दिप्रिंट

कंपनी में “रोबोट मैन” के नाम से जाने जाने वाले कुमार आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियर हैं. रोबोटिक्स, एआई और दुनिया भर में मशीन लर्निंग के नए विकास के प्रति उनका जुनून उन्हें हर नए उत्पाद के साथ ऐडवर्ब को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए प्रेरित करता है.

जैन, जो आईआईटी बॉम्बे के पूर्व छात्र हैं, उनके साथ मिलकर वेयरहाउस सॉल्यूशंस में करीब दो दशक का अनुभव रखते हैं. दूसरी ओर सिंह को कंपनी का “दिल” कहा जाता है. वे प्रोडक्ट डिजाइन, डेवलपमेंट और सॉल्यूशन इंजीनियरिंग के विशेषज्ञ हैं. वे जयपुर के मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से ग्रेजुएट हैं. शुक्ला ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज यानी टीआईएसएस से मानव संसाधन प्रबंधन और श्रम संसाधन में मास्टर्स किया है. उन्होंने जॉनसन एंड जॉनसन और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी कंपनियों में काम किया है.

प्रोडक्ट्स

ट्रैकर नाम का रोबोट कुत्ता ऐडवर्ब कैंपस में दौड़ता और उछलता नजर आता है. कभी-कभी वह आदेश मिलने पर आगंतुकों का स्वागत भी करता है.

एआई इम्पैक्ट समिट में गलगोटियास यूनिवर्सिटी विवाद के बाद, जहां संस्थान ने चीनी बने रोबोट कुत्ते को अपनी खोज बताया था, क्वाड्रुपेड रोबोट चर्चा में रहे. लेकिन ट्रैकर पूरी तरह भारतीय है.

वह अपने धातु के हाथ जोड़कर ‘नमस्ते’ भी करता है और कर्मचारियों व मेहमानों का स्वागत करता है.

ऐडवर्ब का यह क्वाड्रुपेड दूर से निरीक्षण और रियल टाइम डेटा संग्रह के लिए बनाया गया है. यह तेल और गैस क्षेत्रों, वेयरहाउस, रिफाइनरी और अन्य कठिन जगहों पर स्वचालित सुरक्षा गश्त के लिए उपयुक्त है. कंपनी ने भारतीय रक्षा सेवाओं के साथ मिलकर निगरानी बेहतर करने के लिए ट्रैकर के विशेष संस्करण विकसित और सप्लाई करने की साझेदारी भी की है.

कंपनी ने सिंक्रो नाम का हाई-प्रिसीजन कोबोट भी डिजाइन और सप्लाई किया है, जो इंसान और रोबोट के साथ काम करने के लिए बनाया गया है.

Addverb Technologies' humanoid robot Elixis-W
एडवर्ब टेक्नोलॉजीज का ह्यूमनॉइड रोबोट एलिक्सिस-डब्ल्यू | फोटो: सूरज सिंह बिष्ट | दिप्रिंट

कंपनी अपनी वेबसाइट पर कहती है, “फैक्ट्री, लैब और रिसर्च वातावरण में सिंक्रो कोबोट स्मूथ ट्रैजेक्टरी कंट्रोल, फोर्स और टॉर्क कंट्रोल और डेवलपर-रेडी कंट्रोल देता है.”

सबसे ज्यादा चर्चा में उनकी एलेक्सिस ह्यूमनॉइड रेंज है. इसे सामान्य उपयोग के रोबोट के रूप में डिजाइन किया गया है, जिसे हेल्थकेयर, वेयरहाउसिंग और रिटेल जैसे कई क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जा सकता है. ये दोहराए जाने वाले और खतरनाक काम कर सकते हैं, जिससे इंसानों को ज्यादा मूल्य वाले काम के लिए समय मिलता है.

ये रोबोट अलग-अलग देशों की जरूरत और सर्टिफिकेशन के मुताबिक ढाले जा सकते हैं.

एलेक्सिस अभी दो मॉडल में उपलब्ध है — पहियों वाला और पैरों वाला — दोनों करीब 6 फुट लंबे हैं. ऐडवर्ब 4 फुट लंबे संस्करण पर भी प्रयोग कर रही है. वे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी डीआरडीओ के साथ मिलकर उनकी जरूरत के मुताबिक ह्यूमनॉइड का संस्करण विकसित कर रहे हैं.

कुमार ने कहा, “आने वाले महीनों में हम ह्यूमनॉइड पर काम जारी रखेंगे ताकि उनकी परफॉर्मेंस और अलग-अलग क्षेत्रों में उपयोग बेहतर हो सके. हम डेटा फैक्ट्री बनाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं, जहां हमारे रोबोट डेटा के संग्रह और सुरक्षित रखने में इस्तेमाल होंगे.”

ग्लोबल कॉम्पिटिशन

दुनिया में रोबोटिक्स का बाजार उम्मीद भरा दिख रहा है और ऐडवर्ब जैसी भारतीय कंपनियों को कड़ी कॉम्पिटिशन का सामना करना होगा.

ह्यूमनॉइड रोबोट ग्लोबल मार्केट रिपोर्ट 2024 के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में ह्यूमनॉइड रोबोट का बाजार तेजी से बढ़ा है. यह बाजार 2023 में 2.44 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2024 में 3.7 बिलियन डॉलर हो गया, जो 51.6 प्रतिशत की वार्षिक संयुक्त वृद्धि दर को दर्शाता है.

दुनिया के कई देश इस दौड़ में आगे रहने के लिए संसाधन और मानवबल लगा रहे हैं. चीन ने 2025 तक रोबोटिक्स उद्योग के विकास के लिए समर्पित ‘14वीं पंचवर्षीय योजना’ चलाई, ताकि वह रोबोटिक्स तकनीक और औद्योगिक विकास में विश्व नेता बन सके.

मुख्य क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए करीब 45.2 मिलियन डॉलर का बजट तय किया गया, जिसमें जेनरेटिव एआई मॉडल के प्रशिक्षण जैसी मूलभूत तकनीकें शामिल हैं.

Robotic arms being tested by Addverb team
Addverb टीम द्वारा रोबोटिक आर्म्स का परीक्षण | फोटो: सूरज सिंह बिष्ट | दिप्रिंट

जापान ने भी देश को दुनिया का नंबर एक रोबोट नवाचार केंद्र बनाने के लिए ‘न्यू रोबोट स्ट्रैटेजी’ शुरू की है. वे मैन्युफैक्चरिंग, नर्सिंग, मेडिकल जरूरतों और कृषि में एआई और रोबोट के उपयोग पर भारी निवेश कर रहे हैं. जापान का ‘मूनशॉट रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रोग्राम’ 2020 में शुरू हुआ और 2050 तक 440 मिलियन डॉलर के बजट के साथ चलेगा.

लेकिन भारत भी इन देशों का मुकाबला करने के लिए तैयार है. फिलहाल ऐडवर्ब अमेरिका, सिंगापुर और यूरोप के कुछ हिस्सों में रोबोट सप्लाई कर रही है.

कुमार ने कहा, “हम इन देशों से मुकाबला करते हैं और कई ऑर्डर उनसे जीतते हैं. हमारे उत्पाद भरोसेमंद हैं, हमारा सॉफ्टवेयर बेहतर है और सबसे बड़ी बात यह है कि हमारे साथ भरोसे का तत्व जुड़ा है.”

उन्होंने कहा, “भारत से आने वाला कोई भी उत्पाद ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है और हम उस भरोसे को बनाए रखने के लिए यहां हैं.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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