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Monday, 2 March, 2026
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न्यायालय ने तूत्तुकुडी से कनिमोई के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

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नयी दिल्ली, चार मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की नेता कनिमोई को राहत देते हुए तमिलनाडु के तुत्तूकुडी लोकसभा क्षेत्र से 2019 में उनके निर्वाचन को बृहस्पतिवार को बरकरार रखा। न्यायालय ने उनके निर्वाचन को चुनौती देने वाली एक याचिका में उनके खिलाफ लगाये गये आरोपों को ‘‘अस्पष्ट’’ बताते हुए खारिज कर दिया।

ए. सनातन कुमार नामक एक मतदाता ने इस आधार पर कनिमोई के निर्वाचन को चुनौती दी थी कि उन्होंने परिवार की संपत्तियों का खुलासा करने वाले अपने चुनावी हलफनामे में अपने पति के पैन नंबर (स्थाई खाता संख्या) का विवरण नहीं दिया था।

कनिमोई ने 2019 के लोकसभा चुनाव में तूत्तुकुडी निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उम्मीदवार तमिलिसाई सुंदरराजन के खिलाफ जीत दर्ज की थी। सुंदरराजन अब तेलंगाना की राज्यपाल हैं।

कनिमोई ने मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने द्रमुक सांसद के निर्वाचन के खिलाफ दायर कुमार और भाजपा के एक नेता की याचिकाओं को खारिज करने से इनकार कर दिया था।

न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने कहा कि बिना किसी आधार के केवल ‘‘अस्पष्ट’’ आरोप चुनावी याचिका में ठोस तथ्यों को पेश करने की अनिवार्यता का पर्याप्त अनुपालन नहीं हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘इस बारे में कोई ठोस तथ्य नहीं दिया गया कि संविधान या जन प्रतिनिधित्व अधिनियम या उसके तहत बनाए गए नियमों या आदेश के प्रावधानों का कैसे अनुपालन नहीं हुआ और इस तरह के गैर-अनुपालन ने चुनाव के परिणाम को कैसे प्रभावित किया।’’

उसने कहा कि इस प्रकार के अहम और मूल तथ्यों के न होने पर याचिका को खारिज किया जाता है।

उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 83 (एक) (ए) में कहा गया है कि एक चुनावी याचिका में उन ठोस तथ्यों का संक्षिप्त विवरण होना चाहिए, जिस पर याचिकाकर्ता निर्भर करता है।

पीठ ने कहा कि यदि चुनावी याचिका में ठोस तथ्य नहीं बताए गए हैं, तो इसे केवल इसी आधार पर खारिज किया जा सकता है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि कनिमोई के नामांकन पत्र और उनके द्वारा प्रस्तुत प्रपत्र 26 में दिए गए हलफनामे की जांच के समय न तो कोई आपत्ति उठाई गई और न ही निर्वाचन अधिकारी ने कोई चूक या नियमों का गैर-अनुपालन पाया।

कनिमोई के निर्वाचन को चुनौती देने वाली एक अन्य याचिका सुंदरराजन ने दायर की थी। हालांकि, तेलंगाना की राज्यपाल चुनी जाने के बाद उन्होंने यह याचिका वापस ले ली थी।

भाजपा के स्थानीय नेता ए मुथुरामलिंगम ने उच्च न्यायालय में सुंदरराजन की जगह खुद को वादी के रूप में बताया था।

मद्रास उच्च न्यायालय ने कनिमोई के निर्वाचन को चुनौती देने वाली दोनों याचिकाओं को खारिज करने की द्रमुक सांसद की अर्जी यह कहते हुए अस्वीकार कर दी थी कि चुनाव याचिकाओं को अनिवार्य रूप से उनके तार्किक अंत तक ले जाना चाहिए।

उच्च न्यायालय ने कहा था कि चुनाव याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ताओं को नामांकन की अनुचित स्वीकृति के अपने दावे को साबित करने के लिए उचित साक्ष्य पेश करने का मौका दिया जाना चाहिए।

कनिमोई ने अपनी अर्जी में दलील दी थी कि उनके पति एक प्रवासी भारतीय हैं, जो सिंगापुर में रहते हैं। उन्होंने कहा था कि उनके पति के पास न तो पैन कार्ड है, न ही वह भारत में आयकर भरते हैं।

भाषा पारुल सिम्मी देवेंद्र

देवेंद्र

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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