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Monday, 1 June, 2026
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साकेत घटना ने छोड़ दी दर्द और टूटे सपनों की विरासत, शवों की पहचान तक नहीं कर सके परिजन

ढही 4-मंज़िला इमारत की वैधता को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी—AAP के सौरभ भारद्वाज ने MCD पर अवैध निर्माण की अनुमति देने का आरोप लगाया, दिल्ली के CM ने कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.

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नई दिल्ली: शनिवार शाम करीब 6 बजे कपिल ने अपने फ्लैटमेट्स और कोचिंग सेंटर के दोस्तों को पार्टी देने के लिए बुलाया. 28 वर्षीय कपिल ने अपने दोस्तों को मैसेज किया, “आज पार्टी मेरी तरफ से. लगता है कि मेरा चयन भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) में हो जाएगा.”

शाम 6:30 बजे कपिल सैदुलाजाब, जिसे आधिकारिक तौर पर सैद-उल-अजायब कहा जाता है, में अपने किराए के कमरे से निकला और आधा किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित पार्वती द्वारा चलाए जाने वाले एक लोकप्रिय कैंटीन में पहुंच गया. पार्वती नेपाल की नागरिक थीं. थोड़ी ही देर में उसके छह दोस्त भी वहां पहुंच गए. उसका फ्लैटमेट आदर्श देर से आ रहा था.

लेकिन ऐसा नहीं हो सका.

शाम 7 बजे के बाद आदर्श अपने दोस्तों से मिलने की जल्दी में था और कैंटीन से 100 मीटर से भी कम दूरी पर था, तभी उसने कैंटीन की तरफ धूल का एक बड़ा गुबार उठते देखा और उसके बाद जोरदार आवाज सुनी.

GATE परीक्षा की तैयारी कर रहे आदर्श ने दिप्रिंट को बताया, “इमारत ताश के पत्तों के घर की तरह ढह गई. कुछ मिनट तक लोग सदमे में थे. फिर जैसे ही उन्हें समझ आया कि क्या हुआ है, वे वहां मौजूद छात्रों और कर्मचारियों को बचाने के लिए दौड़ पड़े.”

आदर्श को यह भी नहीं पता था कि उसके छह दोस्तों में से कितने लोग वास्तव में कैंटीन पहुंच चुके थे. उसने सभी को फोन करना शुरू किया.

उसने कहा, “मैंने पहले कपिल को फोन किया, फिर अनुज और नलिन को फोन मिलाया, लेकिन किसी से संपर्क नहीं हो सका.”

AIIMS ट्रॉमा सेंटर के बाहर खड़े आदर्श ने बताया कि अगले कुछ घंटों में पुलिस की गाड़ियां और फायर ब्रिगेड की टीमें पहुंच गईं, लेकिन रात 12 बजे तक अधिकारियों ने पीड़ितों के दोस्तों और रिश्तेदारों को कोई जानकारी नहीं दी.

पुलिस को शाम करीब 7:35 बजे साकेत मेट्रो स्टेशन के पास इमारत गिरने की सूचना मिली. दिल्ली सरकार के अधिकारियों के अनुसार, छह लोगों की मौत हुई और आठ अन्य घायल हुए.

रात करीब 1 बजे आदर्श को पता चला कि उसका फ्लैटमेट कपिल अपनी चोटों के कारण दम तोड़ चुका है.

उसने कहा, “हमारे उन दोस्तों में से जो कपिल के साथ BARC में चयन की खुशी और IIT बॉम्बे से इंटरव्यू कॉल मिलने का जश्न मनाने पहुंचे थे, कपिल, नलिन और आलोक की मौत हो गई. हम उन्हें पहचान भी नहीं पा रहे थे.”

उत्तर प्रदेश के बांदा के रहने वाले कपिल पिछले छह महीनों से GATE की तैयारी कर रहे थे.

इमारत गिरने की धूल अभी पूरी तरह बैठी भी नहीं थी कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए.

रविवार को आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि दिल्ली नगर निगम (MCD) इस इमारत के बिल्डर के साथ मिलीभगत करके काम कर रहा था.

भारद्वाज ने कहा, “दिल्ली हाई कोर्ट में इस इमारत के अवैध निर्माण को लेकर मामला चल रहा है. दिल्ली पुलिस को भी शिकायत दी गई थी कि इमारत झुक रही है. इसके बावजूद निर्माण की अनुमति दी गई.”

दिप्रिंट द्वारा देखे गए अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, याचिकाकर्ता ने अनुपम अपार्टमेंट्स गेट नंबर 4 के सामने सैदुलाजाब में हो रहे “अवैध निर्माण” को रोकने की मांग की थी.

दस्तावेज में लिखा है, “एमसीडी की ओर से पेश हुए वकील रोशन लाल गोयल ने कहा कि संबंधित संपत्ति में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं चल रहा है.”

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सभी अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “हर स्तर पर लापरवाही की जवाबदेही तय की जाएगी. कोई भी बिल्डर, अधिकारी या संस्था कानून से ऊपर नहीं है. नियमों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. दिल्ली सरकार न्याय, जवाबदेही और जन सुरक्षा के लिए अपने लोगों के साथ खड़ी है.”

लेकिन इससे मृतकों और उनके परिवारों को कोई राहत नहीं मिली.

रजत, जिन्हें अपने दोस्त आलोक वर्मा के शव की पहचान के लिए अस्पताल से फोन आया था, ने कहा, “मैं और आलोक दोपहर में उसी कैंटीन में खाना खाने गए थे. किसे पता था कि वह आखिरी बार होगा जब हम साथ खाना खाएंगे.”

उन्होंने दिप्रिंट को बताया कि आलोक का “पूरा शरीर बुरी तरह बदल गया था” और उसकी पहचान केवल उसकी कलाई में पहने हुए ब्रेसलेट से हो सकी.

लखनऊ के रहने वाले आलोक वर्मा दिसंबर 2025 से दिल्ली में भारतीय इंजीनियरिंग सेवा (IES) की तैयारी कर रहे थे.

घटना से कुछ मिनट पहले कैंटीन चलाने वाली पार्वती ने अपनी बेटी को फोन किया था.

उनकी बेटी ने दिप्रिंट को बताया, “उन्होंने मुझे जल्दी आने और मदद करने के लिए बुलाया था, लेकिन जब तक मैं वहां पहुंची, सब कुछ धूल और मलबे में बदल चुका था और लोग चीख रहे थे.”

पार्वती की भाभी गौरी ने दिप्रिंट को बताया कि पार्वती ने लगभग नौ महीने पहले यह कैंटीन शुरू की थी और यह बहुत लोकप्रिय हो गई थी.

गौरी ने कहा, “युवा नौकरीपेशा लोग और छात्र यहां आते थे. वे कहते थे कि वह आसपास का सबसे अच्छा घर जैसा खाना बनाती हैं.”

दिल्ली सरकार के अधिकारियों के अनुसार, रवि (24), कपिल (28), नलिन (23), आलोक (28), पार्वती (48) और एकता की चोटों के कारण मौत हो गई.

वहीं क्षितिज प्रताप (25), अनुज दीक्षित (22), आस्था (26), आदित्य शर्मा (24), विशाल (25), नीलम यादव (25), तरुण (25) और साइका खान (27) घायल हुए.

Civil defence and police personnel on their way to the site of collapse | Alisha Dutta | ThePrint
ढहने की जगह की ओर जाते सिविल डिफेंस और पुलिसकर्मी | अलीशा दत्ता | दिप्रिंट

मृतकों में विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्र, भारतीय इंजीनियरिंग सेवा के अभ्यर्थी और कैंटीन की मालिक शामिल हैं.

घटना के बाद एमसीडी ने जूनियर इंजीनियर (बिल्डिंग विभाग) अमन जैन और असिस्टेंट इंजीनियर (बिल्डिंग विभाग) सुदेश सिंह चौहान को निलंबित कर दिया.

दिप्रिंट द्वारा देखे गए दस्तावेज में लिखा है, “30.05.2026 को सैद-उल-अजायब, नई दिल्ली स्थित संपत्ति खसरा नंबर 262, गली नंबर 5, वेस्टर्न मार्ग के ढहने के मामले में कर्तव्य में लापरवाही और ढिलाई के आधार पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है.”

दक्षिणी दिल्ली के डीसीपी अनंत मित्तल ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), 290 (लापरवाहीपूर्ण आचरण) और 125(2) (मानव जीवन को खतरे में डालने वाली लापरवाही) के तहत एफआईआर दर्ज की है.

अधिकारी ने कहा कि कई टीमें बनाई गई हैं और आरोपियों की पहचान के लिए छापेमारी की जा रही है.

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि इमारत की नींव और बेसमेंट कमजोर थे.

बताया जाता है कि इस इमारत में स्टार्टअप्स और अन्य निजी कंपनियों के दफ्तर थे.

अधिकारी ने कहा, “मालिक वसंत कुंज का निवासी है. दक्षिण दिल्ली में उसके कई प्लॉट हैं, जिनसे उसे किराये की आय होती है.”

अधिकारी ने यह भी बताया कि दिल्ली पुलिस ने दो बार एमसीडी को पत्र लिखकर “अतिरिक्त मंजिलों के निर्माण” की जानकारी दी थी, क्योंकि इलाके की कई इमारतें चार मंजिल की स्वीकृत सीमा से अधिक बनाई जा रही थीं.

अधिकारी ने कहा, “जब इमारत गिरी, तब भूतल पर केवल एक व्यक्ति मौजूद था, जिसे बाद में मलबे से निकाल लिया गया. बाकी सभी मंजिलें खाली थीं.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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