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Tuesday, 16 June, 2026
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आरएसएस पंजीकरण मुद्दा मुख्यमंत्री शिवकुमार के खिलाफ प्रियंक खरगे की ‘रणनीति’ : भाजपा

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बेंगलुरु, 16 जून (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने मंगलवार को कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पंजीकरण मुद्दे को लेकर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि यह खरगे रणनीति है ताकि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार का मुकाबला किया जा सके, जो यह “सपना देख रहे हैं” कि 2028 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का मुख्यमंत्री उम्मीदवार केवल वही होंगे।

अशोक ने सत्तारूढ़ कांग्रेस द्वारा आरएसएस के पंजीकरण, उसकी कानूनी स्थिति और वित्तीय स्रोतों पर उठाए गए सवालों की भी आलोचना की।

उन्होंने प्रियंक खरगे के कदम को मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के खिलाफ ‘‘रणनीति’’ करार देते हुए कहा कि शिवकुमार ‘‘दिन में सपने’’ देख रहे हैं कि 2028 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार केवल वही होंगे।

अशोक ने आरोप लगाया कि प्रियंक खरगे ने दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व को खुश करने और खुद को मुख्यमंत्री पद का संभावित दावेदार बनाने के लिए आरएसएस को मुद्दा बनाया है।

अशोक ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में सवाल किया, “कांग्रेस को आरएसएस पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार क्या है, जबकि उसने केवल सत्ता हासिल करने के लिए मुस्लिम लीग जैसे संगठन के साथ राजनीतिक गठबंधन किया है, जिसे देश के विभाजन के लिए जिम्मेदार माना जाता है और वह ऐसे गठबंधनों के सहारे दो राज्यों में शासन कर रही है?”

उन्होंने आरोप लगाया कि विधान सौध के सामने देशविरोधी ‘‘पाकिस्तान जिंदाबाद’’ के नारे लगाए जाने की घटना पर प्रियंक खरगे ने कोई कार्रवाई नहीं की और आरोपियों का बचाव किया।

उन्होंने कहा, “यह न केवल हास्यास्पद है बल्कि बेहद शर्मनाक भी है कि ऐसी राष्ट्र-विरोधी सोच का समर्थन करने वाले लोग आरएसएस की वैधता और देशभक्ति पर सवाल उठा रहे हैं। आरएसएस एक ऐसा राष्ट्रवादी संगठन है जो पिछले सौ सालों से निस्वार्थ भाव से ‘भारत माता’ की सेवा कर रहा है।”

अशोक ने कहा कि प्रियंक खरगे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति तथा ‘‘दान, अंशदान और आय के स्रोतों’’ के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है।

उन्होंने कहा कि पत्र में खरगे ने आरएसएस से ‘‘अधिकृत पदाधिकारियों’’ को नामित कर यह बताने को कहा है कि संगठन किस कानूनी आधार पर कार्य कर रहा है।

अशोक ने आरोप लगाया, ‘‘समाज में वैचारिक विवाद खड़े कर अपने राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के उनके (प्रियंक खरगे के) प्रयासों से कर्नाटक के जागरूक लोग भली-भांति परिचित हैं।’’

उन्होंने दावा किया कि प्रियंक खरगे सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी-बीटी), ग्रामीण विकास विभाग और कलबुर्गी जिले के प्रभारी मंत्री के रूप में सौंपी गई जिम्मेदारियों को निभाने में पूरी तरह ‘‘विफल’’ रहे हैं। अशोक ने उन्हें कर्नाटक के इतिहास का ‘‘सबसे विफल’’ मंत्री भी करार दिया।

अशोक ने कहा, “विकास के मोर्चे पर कुछ भी हासिल नहीं कर पाने के बाद वह अब गृह विभाग का इस्तेमाल कर किसी तरह पार्टी आलाकमान का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वह 24 घंटे आरएसएस का नाम जपते रहते हैं और समाचारों तथा सोशल मीडिया में बने रहने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “यह तय है कि कर्नाटक के जागरूक और विवेकशील लोग ऐसी घिसी-पिटी राजनीतिक रणनीतियों और राष्ट्रविरोधी सोच को करारा जवाब देंगे।”

इस बीच, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र ने भी खरगे पर निशाना साधते हुए कहा कि पारदर्शिता की बात उस व्यक्ति के मुंह से अजीब लगती है, जो कांग्रेस जैसी पार्टी से जुड़ा है और जिसकी राजनीतिक व्यवस्था को अब भी नेशनल हेराल्ड विवाद पर देश को स्पष्ट जवाब देना बाकी है।

उन्होंने कहा, “हर कोई जानता है कि यह चयनात्मक नैतिक आक्रोश कुछ नहीं, बल्कि अपने आलाकमान को खुश करने और अपने मंत्री पद को उचित ठहराने की आपकी हताश कोशिश है।”

विजयेंद्र ने कहा कि आरएसएस को कांग्रेस से वैधता का प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा, “मोहन भागवत जी इसका उपयुक्त जवाब पहले ही दे चुके हैं, लेकिन असली जवाब जनता देगी और वह समय अब दूर नहीं है।”

भाषा

राखी प्रशांत

प्रशांत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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