गुरुग्राम: रेप के दोषी और डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह मंगलवार सुबह करीब 6 बजे रोहतक की सुनारिया जेल से 21 दिन की फर्लो पर बाहर आया. पिछले 9 साल में यह 17वीं बार है, जब उसे जेल से अस्थायी रिहाई मिली है.
दो लैंड क्रूजर, दो फॉर्च्यूनर, दो इनोवा और पुलिस की दो एस्कॉर्ट गाड़ियों का काफिला उसे सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय ले गया, जहां वह सुबह 8 बजे तक पहुंच गया.
इस साल यह उसकी तीसरी रिहाई है. वह जनवरी में 40 दिन पैरोल पर और मई में 30 दिन जेल से बाहर रहा था. वह 25 जून को सुनारिया जेल वापस आया था. इसके करीब दो महीने बाद ही वह फिर जेल से बाहर आ गया है.
पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने 25 अगस्त 2017 को राम रहीम को अपनी दो शिष्याओं से रेप के मामले में दोषी ठहराया था. वह 20 साल की सज़ा काट रहा है.
उसके खिलाफ हत्या के दो मामलों में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत से दोषी ठहराए जाने के बाद पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने दोनों मामलों में उसे बरी कर दिया. हालांकि, इनमें से एक मामला, पत्रकार रामचंदर छत्रपति की हत्या का मामला, अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के अधीन है.
2021 में उसे डेरा मैनेजर रंजीत सिंह की हत्या की साजिश रचने के मामले में दोषी ठहराया गया था. इस मामले में सीबीआई अदालत ने उसे उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी. पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने मई 2024 में उसकी सज़ा रद्द कर दी थी. कोर्ट ने जांच को कमजोर और असंगत बताया था.
अक्टूबर 2002 में गोली मारकर हत्या किए गए पत्रकार रामचंदर छत्रपति की हत्या के मामले में सीबीआई अदालत ने जनवरी 2019 में राम रहीम को उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी. अखबार ‘पूरा सच’ के संपादक छत्रपति की हत्या उस समय हुई थी, जब उनके अखबार में एक गुमनाम पत्र छपा था. इस पत्र में डेरा प्रमुख पर एक साध्वी का यौन शोषण करने का आरोप लगाया गया था.
इस मामले में भी 7 मार्च इस साल पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने उसकी सज़ा रद्द कर दी थी. इसके बाद छत्रपति के बेटे ने बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. इसी महीने कोर्ट ने अपील पर सुनवाई करने पर सहमति जताई.
एक अलग मामला अभी ट्रायल के स्तर पर है. इसमें राम रहीम पर अपने सैकड़ों अनुयायियों की जबरन नसबंदी कराने की साजिश रचने का आरोप है. सीबीआई की 2018 की चार्जशीट में उसका नाम दो डॉक्टरों के साथ लिया गया था. इसमें आरोप लगाया गया था कि ये प्रक्रियाएं डेरा परिसर और इस संगठन द्वारा चलाए जा रहे दो अस्पतालों में की गई थीं. इस मामले में उसे ज़मानत मिल चुकी है.
अच्छे आचरण वाले कानून के बाद सब बदल गया
राम रहीम को बार-बार जेल से मिलने वाली इन रिहाइयों की शुरुआत हरियाणा सरकार की ओर से 2022 में राज्य के कानून में बदलाव के बाद हुई.
हरियाणा में अस्थायी रिहाई की व्यवस्था 1988 के एक कानून पर आधारित थी. इसके तहत राम रहीम को ऐसी राहत नहीं मिल सकती थी. अक्टूबर 2020 और मई 2021 में उसे अपनी बीमार मां से मिलने के लिए जो एक-एक दिन की रिहाई मिली थी, वह भी इस कानून के तहत नहीं थी.
अप्रैल 2022 में राज्य सरकार ने इस कानून को बदलकर हरियाणा अच्छे आचरण वाले कैदी (अस्थायी रिहाई) अधिनियम, 2022 लागू किया. इसके बाद सब कुछ बदल गया.
छत्रपति के परिवार और सामाजिक कार्यकर्ताओं का लंबे समय से आरोप है कि इस कानून में बदलाव राम रहीम को ध्यान में रखकर किया गया था. हालांकि, हरियाणा के जेल विभाग के एक अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि कानून में बदलाव सिर्फ एक मुश्किल प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए किया गया था. उन्होंने कहा कि रिहाई अभी भी कैदी के अच्छे आचरण के रिकॉर्ड पर निर्भर करती है.
2019 से 2024 तक हरियाणा के जेल मंत्री रहे रणजीत सिंह चौटाला ने पहले दिप्रिंट को बताया था कि 2022 का कानून एक साल में पैरोल की अवधि को 70 दिन तक सीमित करता है. इसे दो बार में दिया जा सकता है. इसके अलावा 21 दिन की फर्लो भी दी जा सकती है. उन्होंने कहा था कि इसमें कोई नियम नहीं टूटता.
राम रहीम को बार-बार मिलने वाली इन रिहाइयों पर अदालतों ने भी कई बार सवाल उठाए हैं. फरवरी 2024 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट की एक बेंच ने राम रहीम की सभी रिहाइयों का रिकॉर्ड देखने के बाद कहा था कि उसकी सज़ा की प्रकृति को देखते हुए यह रिकॉर्ड काफी चौंकाने वाला है. बाद में कोर्ट ने राज्य को उसकी अनुमति के बिना उसे आगे कोई पैरोल देने से रोक दिया था.
हालांकि, उसी साल 9 अगस्त को हाई कोर्ट की बेंच ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की ओर से राम रहीम की अस्थायी रिहाई के खिलाफ दायर याचिका का निपटारा कर दिया. कोर्ट ने कहा कि ऐसी रिहाई की मांग पर सक्षम अधिकारी को बिना किसी “मनमानी या पक्षपात” के विचार करना चाहिए. इस तरह व्यावहारिक रूप से रिहाई का रास्ता साफ हो गया.
2022 के कानून के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए कमेटी ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2025 में उसकी अपील खारिज कर दी.
राम रहीम की कई रिहाइयां चुनाव के समय के बेहद करीब हुई हैं. आलोचकों ने इस बात को लेकर लगातार सवाल उठाए हैं.
फरवरी 2022 में उसे तीन हफ्ते की फर्लो पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मिली थी. उसी साल जून में मिली पैरोल हरियाणा के नगर निकाय चुनाव से पहले थी. अक्टूबर 2024 में उसकी रिहाई हरियाणा विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले हुई थी.
जन संघर्ष मंच की महासचिव सुदेश कुमारी ने सवाल उठाया है कि अच्छे आचरण का प्रमाण पत्र कितना मायने रखता है, जब यह उन अधिकारियों की ओर से जारी किया जाता है जो राज्य सरकार के प्रति जवाबदेह होते हैं. जन संघर्ष मंच के सदस्यों ने ही 2002 में राम रहीम के खिलाफ आरोपों को पहली बार सामने लाया था.
कुमारी ने मंगलवार को दिप्रिंट से कहा, “बीजेपी सरकार का दोहरी बात करने का रिकॉर्ड सबसे अलग है. एक तरफ वह जोर-शोर से विपक्ष पर आरोप लगा रही है कि वह संसद और राज्य विधानसभा में महिलाओं को आरक्षण देने की उसकी कोशिश का समर्थन नहीं कर रहा. जबकि हर कोई जानता है कि उसे आरक्षण देने से कोई नहीं रोक रहा और वे इसके नाम पर कुछ और करने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी तरफ बीजेपी सरकार एक दोषी रेपिस्ट को साल के बड़े हिस्से में जेल से बाहर रखने में पूरी कोशिश कर रही है.”
कुल मिलाकर, राम रहीम जेल के बाहर काफी समय बिता चुका है—सिर्फ 2025 में 216 दिनों में से 91 दिन वह जेल से बाहर रहा. वहीं पिछले पांच साल में वह 450 से ज्यादा दिन जेल से बाहर रहा है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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