नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने पिछले 10 महीनों में Meta को 100 से ज्यादा नोटिस भेजकर आईएसआई समर्थित पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी से जुड़े सोशल मीडिया प्रोफाइल हटाने को कहा है. हर नोटिस उस व्यक्ति के किसी सहयोगी की गिरफ्तारी के बाद भेजा गया, जिस पर भारत में वर्दीधारी जवानों को निशाना बनाने वाले नेटवर्क को चलाने का आरोप है.
हाल के महीनों में भट्टी और उसके गैंग ने वर्दीधारी जवानों के साथ-साथ पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के ठिकानों को भी निशाना बनाया है.
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अक्टूबर 2025 में उसके गैंग के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी. पुलिस ने हथियारों की तस्करी या अलग-अलग स्तर की आतंकी गतिविधियों की योजना बनाने के मामलों में भट्टी के कई सहयोगियों को गिरफ्तार किया है.
मामले की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “अक्टूबर और नवंबर 2025 के बीच गिरफ्तार किए गए भट्टी के सहयोगियों से लंबे समय तक पूछताछ के दौरान हमने सोशल मीडिया के कुछ ऐसे प्रोफाइल की पहचान की, जिनके जरिए वे एक-दूसरे से बात करते थे.”
इसके बाद दिल्ली पुलिस ने इन प्रोफाइल को Meta के सामने रिपोर्ट करना शुरू किया. भट्टी के इस्तेमाल किए गए कई प्रोफाइल के यूजरनेम में “333” नंबर था. “Shehzadbhatti333, shehzad.bhatti.official333, originalshehzadbhatti333” ऐसे कुछ प्रोफाइल हैं, जिन पर भट्टी से जुड़ा कंटेंट पाया जा सकता है.
अधिकारी ने कहा, “भट्टी भारत में ऐसे युवाओं से संपर्क करने के लिए इंस्टाग्राम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करता है, जिन्हें वह अपने लिए भर्ती करना चाहता है. इसलिए यह पता लगाना जरूरी हो गया था कि उसके कौन-कौन से प्रोफाइल एक्टिव हैं.”
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, भट्टी के नाम से कई सोशल मीडिया प्रोफाइल चल रहे हैं. इनमें कुछ सीधे भट्टी इस्तेमाल करता है, जबकि कुछ ‘फैन’ अकाउंट हैं. इन अकाउंट को उसके “पक्के समर्थक” चलाते हैं और उन पर वे वीडियो अपलोड करते हैं, जिन्हें भट्टी अपने प्रोफाइल से शेयर करता है.
अधिकारी ने कहा, “भट्टी इंस्टाग्राम के जरिए बेरोज़गार युवाओं को सक्रिय रूप से अपने जाल में फंसाता है और ग्रुप और निजी चैट के जरिए उन्हें आपराधिक गतिविधियों के लिए निर्देश देता है. जांच में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर टारगेट को लेकर चर्चा किए जाने के सबूत मिले हैं.”
इसलिए जब पुलिस को पता चलता है कि भट्टी के गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए सहयोगी किन प्रोफाइल के जरिए उससे बात करते थे, तो वह तुरंत उन प्रोफाइल को रिपोर्ट कर देती है, ताकि दूसरे युवाओं को भी उसके जाल में फंसने से रोका जा सके.
भट्टी की गतिविधियों पर कड़ी नजर तब शुरू हुई, जब उत्तर भारत में आतंकी मामलों में उसका नाम बार-बार सामने आने लगा. भट्टी के नेटवर्क का बड़ा स्तर इस साल 12 अगस्त को सामने आया, जब सुरक्षा एजेंसियों ने उससे जुड़े 200 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि एजेंसियों की छापेमारी के बाद 14 राज्यों में 253 लोगों को हिरासत में लिया गया.
गृह मंत्रालय ने देशभर में उसकी बढ़ती गतिविधियों और कई आतंकी घटनाओं में कथित भूमिका को देखते हुए उसे “आतंकवादी” घोषित करने का प्रस्ताव भी दिया है.
सूत्रों के मुताबिक, भट्टी सभी धर्मों के युवाओं को अपनी तरफ खींचता था. वह उन्हें अपनी दौलत और डॉन जैसी शान दिखाता था और विदेश में जिंदगी बिताने का लालच देता था.
एक सूत्र ने कहा, “उसके ज्यादातर सहयोगी ऐसे लोग नहीं हैं, जिनका पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड हो. इस नेटवर्क में विदेशी यूनिवर्सिटी से MBA की डिग्री लेने वाले लोगों से लेकर मजदूर, बढ़ई, डिलीवरी बॉय और बिल्कुल अनपढ़ लोग तक शामिल हैं. ये लोग सिर्फ 10,000-15,000 रुपये में काम करने के लिए तैयार हो जाते हैं.”
जब दिप्रिंट ने भट्टी के एक प्रोफाइल को देखने की कोशिश की, तो पता चला कि इनमें से कई प्रोफाइल प्लेटफॉर्म ने “कानूनी अनुरोध” पर हटा दिए हैं.
इंस्टाग्राम पर उसके अकाउंट पर एक मैसेज में लिखा था, “यह अकाउंट भारत में उपलब्ध नहीं है. ऐसा इसलिए है क्योंकि हमने इस कंटेंट को प्रतिबंधित करने के कानूनी अनुरोध का पालन किया है.”
हाल के एक घटनाक्रम के मुताबिक, Meta ने अपने प्लेटफॉर्म—फेसबुक और इंस्टाग्राम—को सहयोग पोर्टल (Sahyog Portal) के साथ जोड़ दिया है. सहयोग पोर्टल भारतीय साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की ओर से बनाया गया भारत सरकार का एक प्लेटफॉर्म है. इसका इस्तेमाल IT Act की धारा 79 (3) (b) के तहत कंटेंट हटाने के अनुरोधों को एक जगह से भेजने के लिए किया जाता है.
सूत्रों के मुताबिक, इस API इंटीग्रेशन की मदद से अधिकृत कानून प्रवर्तन और सरकारी एजेंसियां अपने आप और तुरंत ब्लॉक करने के निर्देश जारी कर सकती हैं. इसके लिए Meta की ओर से हर मामले की अलग-अलग मानवीय जांच ज़रूरी नहीं होगी.
हालांकि, इन कोशिशों के बावजूद भट्टी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए अपने सहयोगियों की भर्ती और उनसे संपर्क जारी रखे हुए है. अधिकारी ने कहा, “ऑनलाइन उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखने और भारत में उसके प्रोफाइल हटाने के बावजूद कई यूजर—चाहे वे उसके सहयोगी हों या अभी भर्ती किए जाने वाले लोग—वीपीएन का इस्तेमाल करके उससे संपर्क कर रहे हैं.”
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