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Thursday, 1 October, 2026
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बच्चों की मौत को लेकर बालाघाट जाएंगे राहुल गांधी, आदिवासी परिवारों से करेंगे मुलाकात

गांधी ने केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि पर्याप्त पुनर्वास या मुआवजे के बिना गांवों को डुबोया जा रहा है.

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नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी गुरुवार को मध्य प्रदेश के बालाघाट का दौरा कर रहे हैं. वह उन आदिवासी परिवारों से मिलेंगे, जिन्होंने बीमारी, कुपोषण और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जुड़ी चिंताओं के बीच अपने बच्चों को खोया है.

अपने दौरे से पहले एक्स पर एक पोस्ट में गांधी ने कहा, “मैं आज बालाघाट आ रहा हूं. उन आदिवासी परिवारों से मिलने, जिन्होंने बीमारी और BJP सरकार की लापरवाही के कारण अपने मासूम बच्चों को खोया है. उनके साथ समय बिताकर मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि वे इस दुख में अकेले नहीं हैं—मैं उनके साथ हूं.”

गांधी ने केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि पर्याप्त पुनर्वास या मुआवजे के बिना गांवों को डुबोया जा रहा है.

उन्होंने कहा, “कुछ दिन पहले मैं केन-बेतवा आंदोलन से जुड़े आदिवासी भाई-बहनों से भी मिला था. आज उनके गांव परियोजना के कारण डूब रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से उन्हें न तो पुनर्वास मिला है और न ही मुआवजा. उन्हें सिर्फ परेशान किया जा रहा है, सरकारी दबाव और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है.”

गांधी ने हाल ही में इंदौर में हुए अपने “छात्रों की गूंज” कार्यक्रम के दौरान आदिवासी छात्रों की ओर से उठाई गई चिंताओं का भी जिक्र किया. उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों, हॉस्टलों और खाने की सुविधाओं में कमियों का आरोप लगाया. उन्होंने परीक्षा में गड़बड़ी और आरक्षण के अधिकारों को लेकर भी चिंता जताई.

गांधी ने आरोप लगाया कि ये सभी चिंताएं आदिवासी समुदाय के प्रति “BJP-RSS की सोच” को दिखाती हैं.

गांधी ने कहा, “मैं अपने आदिवासी भाई-बहनों को भरोसा दिलाता हूं कि हर संघर्ष में मैं आपके साथ खड़ा हूं. आपकी आवाज को मजबूती से उठाना मेरी जिम्मेदारी है और मैं इस बहरी सरकार को पूरी ताकत से आपकी आवाज सुनाऊंगा.”

गांधी का यह दौरा बालाघाट के आदिवासी बहुल इलाकों में 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत की खबरों को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच हो रहा है.

हालांकि, मौतों की सही संख्या और उनकी मेडिकल वजहों को लेकर सरकारी जांच में अलग-अलग जानकारी सामने आई है और आकलन लगातार बदल रहे हैं. केंद्र के नेतृत्व में हुई एक जांच में कई स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान की गई है. इनमें खसरा, मलेरिया, एक साथ कई संक्रमण, सांस लेने में परेशानी, शरीर में पानी की कमी, कुपोषण, खून की कमी और शॉक शामिल हैं. जांच में किसी एक बीमारी या वायरस को इन मौतों की एकमात्र वजह नहीं बताया गया है.

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भी इन मौतों से जुड़ी एक याचिका पर राज्य सरकार से दस्तावेज और जवाब मांगा है.

इस बीच, मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी इस मुद्दे पर आदिवासी समुदाय के साथ कांग्रेस नेतृत्व के पुराने जुड़ाव का जिक्र किया.

उन्होंने कहा, “गांधी परिवार हमेशा मजबूती से खड़ा रहा है.”

पटवारी ने कहा, “हम आदिवासी परिवारों को समाज में वही जगह देते हैं, जैसे हमारी दादी ने किया था. दिवंगत राजीव गांधी जी ने आदिवासियों को उनके अधिकार देने में कभी कमी नहीं की. उन्होंने अमीर लोगों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, लेकिन हमेशा आदिवासियों की रक्षा की और उनका सम्मान किया. आज भी वही परंपरा और वही विरासत जारी है.”

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