नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर अपनी चिंता दोहराई. उन्होंने कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरण को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचने की आशंका है.
यूट्यूब पर साझा एक वीडियो में राहुल गांधी ने कहा, “मुझे यह सोचकर काफी परेशानी हुई कि इतनी खूबसूरत जगह को नष्ट किया जा रहा है. मेरा मानना है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस जगह का अनुभव करना चाहिए. मुझे नहीं लगता कि लोग और निश्चित रूप से सरकार इसकी अहमियत को समझ रही है.”
I visited the southernmost tip of India.
I stood at Indira Point. I walked under trees that have stood for centuries. I dove into coral reefs among the most vibrant on earth.
And I sat with the people who live there. Tribal communities, whose land is being taken away by… pic.twitter.com/RLNtT6L0U4
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) June 5, 2026
राहुल गांधी ने बताया कि उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का दौरा किया, जहां उन्होंने घने जंगल, प्रवाल भित्तियां (कोरल रीफ) देखीं और स्थानीय लोगों तथा आदिवासी समुदायों से बातचीत की.
उन्होंने कहा, “हम अंडमान और निकोबार गए थे. अंडमान में हमने स्कूटर से भ्रमण किया, स्थानीय लोगों और पर्यटकों से बातचीत की. हम पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए पर्यटन सुविधाओं के विकास के पूरी तरह पक्ष में हैं.”
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि प्रस्तावित परियोजना का दायरा बहुत बड़ा है और इससे पर्यावरण को अपूरणीय क्षति हो सकती है.
उन्होंने कहा, “61 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में यह परियोजना बनाई जा रही है, जो नई दिल्ली के आकार से लगभग चार गुना बड़ा है. इसे देश के सबसे संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है. वहां बसाए गए लोगों और आदिवासी समुदायों की जमीन भी ली जा रही है.”
राहुल गांधी ने क्षेत्र की कोरल रीफ को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य समुद्री जैव विविधता और कार्बन अवशोषण की प्राकृतिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है.
उन्होंने कहा, “निकोबार की कोरल रीफ को नष्ट करना ऐसा है जैसे भारत में सैकड़ों बाघों को मार देना. यह देश की बहुमूल्य जैविक संपदा को खत्म करने जैसा है.”
राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के प्रावधानों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया और आदिवासी समुदायों से पर्याप्त परामर्श नहीं लिया गया.
बाद में सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर किए गए एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि उन्होंने देश के सबसे दक्षिणी छोर इंदिरा प्वाइंट का दौरा किया, जहां सदियों पुराने पेड़, दुनिया की सबसे समृद्ध कोरल रीफ और स्थानीय समुदायों से मुलाकात की.
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि आदिवासियों की जमीन वन अधिकार कानून का उल्लंघन कर ली जा रही है और वहां बसाए गए कई परिवारों को उचित मुआवजा नहीं मिल रहा है.
उन्होंने ग्रेट निकोबार परियोजना को रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ने के सरकारी तर्क पर भी सवाल उठाया. राहुल ने कहा कि यदि रक्षा जरूरतों के लिए आधारभूत ढांचे का विस्तार करना है तो सरकार को INS Baaz का विस्तार करना चाहिए, जिसका कांग्रेस समर्थन करेगी.
उन्होंने कहा कि सरकार इस परियोजना को ट्रांसशिपमेंट पोर्ट बता रही है, जबकि भारत पहले से ही केरल में एक बड़ा ट्रांसशिपमेंट पोर्ट विकसित कर रहा है.
राहुल गांधी ने आरोप लगाया, “असलियत यह है कि 1.5 करोड़ पेड़ काटे जाएंगे, कोरल रीफ को आधिकारिक नक्शों से हटा दिया गया है और सैनिकों व आदिवासियों को विस्थापित किया जाएगा ताकि एक कारोबारी वहां होटल और कैसीनो बना सके.”
उन्होंने कहा कि वह पर्यावरणीय संतुलन के साथ विकास के पक्षधर हैं और निकोबार द्वीपों को दुनिया का सबसे बेहतरीन टिकाऊ पर्यटन केंद्र बनाया जा सकता है.
गौरतलब है कि केंद्र सरकार के अनुसार ग्रेट निकोबार मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना का उद्देश्य द्वीप की पूर्व-पश्चिम समुद्री व्यापार मार्ग के निकट स्थिति का लाभ उठाना, विदेशी ट्रांसशिपमेंट बंदरगाहों पर भारत की निर्भरता कम करना तथा रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है.
इस परियोजना में 14.2 मिलियन टीईयू क्षमता वाला अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, 4,000 यात्रियों की पीक आवर क्षमता वाला ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, 450 एमवीए गैस-सौर ऊर्जा संयंत्र और एक नियोजित टाउनशिप शामिल है.