नई दिल्ली: नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने इस साल की शुरुआत में पंजाब में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर हुए विस्फोट की साजिश को कथित तौर पर अंजाम देने में समन्वय करने वाले विदेश में रह रहे एक हैंडलर का पता लगाने के लिए इंटरपोल से संपर्क किया है. दिप्रिंट को इस बारे में जानकारी मिली है.
सूत्रों ने आगे बताया कि इसके लिए एजेंसी ने सीबीआई से जुझार सिंह के खिलाफ ब्लू नोटिस जारी करवाने में मदद मांगी है. जुझार सिंह के कथित तौर पर आतंकी संगठन खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (KZF) से जुड़े होने की बात कही गई है.
हालांकि, इंटरपोल ने अभी तक यह नोटिस जारी नहीं किया है. ब्लू नोटिस से सभी 194 सदस्य देशों में किसी व्यक्ति की पहचान, उसके ठिकाने या उसकी आपराधिक गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाने में मदद मिलती है.
एनआईए ने इस साल जून में पंजाब को देश के दूसरे हिस्सों से जोड़ने वाले फ्रेट कॉरिडोर पर हुए नाकाम तोड़फोड़ के प्रयास की जांच अपने हाथ में ली थी. यह घटना 27 अप्रैल की रात शंभू और राजपुर रेलवे स्टेशनों के बीच हुई थी. घटना के करीब दो महीने बाद एनआईए ने जांच संभाली. इस घटना से अधिकारियों की चिंता बढ़ गई थी, क्योंकि राज्य में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर हमलों का एक पैटर्न सामने आ रहा था. अप्रैल में हुआ यह हमला 23 जनवरी को फतेहगढ़ साहिब जिले के सरहिंद में फ्रेट कॉरिडोर पर किए गए इसी तरह के नाकाम तोड़फोड़ के प्रयास के बाद हुआ था.
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के दो बड़े कॉरिडोर में से एक का बड़ा हिस्सा पंजाब में आता है. यह कॉरिडोर लुधियाना से बिहार के सोन नगर तक 1,300 किलोमीटर से ज्यादा लंबा है.
विस्फोट में रेलवे लाइन के नीचे मौजूद सीमेंट के सपोर्ट को नुकसान पहुंचा था. साथ ही कथित तौर पर तोड़फोड़ करने वाला जगूप सिंह भी विस्फोट में मारा गया था. मामले में सबसे पहले पंजाब पुलिस की जांच के मुताबिक, सिंह की मौत समय से पहले हुए विस्फोट में हो गई थी. वह डेटोनेटर को ठीक से जोड़ भी नहीं पाया था.
जांच से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, “जांच के दौरान यह सामने आया है कि जुझार सिंह, विस्फोट के पीछे मौजूद तोड़फोड़ करने वाले जगूप सिंह के ऑपरेशन के लिए लगातार पैसे दे रहा था. विस्फोट और नाकाम ऑपरेशन से एक दिन पहले तक भी पैसे भेजे गए थे.”
अधिकारी ने कहा, “वह मानसा के प्रदीप सिंह के भी संपर्क में था. प्रदीप सिंह ने जुझार सिंह जैसे विदेश में मौजूद हैंडलरों और जगूप सिंह के बीच तालमेल बनाने में अहम भूमिका निभाई.”
दिप्रिंट ने पहले रिपोर्ट किया था कि जुझार सिंह एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म Threema पर लगातार जगूप सिंह के संपर्क में था और उसकी गतिविधियों के बारे में उसे निर्देश दे रहा था.
जांच की शुरुआत में पुलिस ने पंजाब के रहने वाले प्रदीप सिंह खालसा, कुलविंदर सिंह उर्फ बग्गा, सतनाम सिंह उर्फ सत्ता और गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी को आरोपी के तौर पर गिरफ्तार किया था. पुलिस के मुताबिक, इन लोगों ने साजिश रची और विस्फोट को अंजाम दिया. शुरुआत में पुलिस ने प्रदीप सिंह को पूरी साजिश का मास्टरमाइंड बताया था. पटियाला रेंज के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DIG) कुलदीप सिंह चहल ने उसे विदेश में मौजूद हैंडलरों और जमीन पर मौजूद जगूप सिंह जैसे लोगों के बीच एक अहम कड़ी बताया था.
वरिष्ठ अधिकारियों ने यह भी कहा था कि प्रदीप ने ‘चलदा वीर चक्रवर्ती, अटारिये’ नाम का एक कट्टरपंथी संगठन बनाया था. पुलिस ने उनके पास से एक हैंड ग्रेनेड, दो पिस्तौल और विस्फोट करने में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक संचार उपकरण बरामद किए थे. साथ ही मलेशिया में मौजूद हैंडलरों से बातचीत के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले लैपटॉप भी बरामद किए गए थे.
विस्फोट के पीछे मौजूद मॉड्यूल का पंजाब पुलिस द्वारा भंडाफोड़ किए जाने के बाद पंजाब पुलिस के प्रमुख गौरव यादव ने अमृतसर के रहने वाले जुझार सिंह को इस मॉड्यूल की मुख्य कड़ी बताया था. उन्होंने अमेरिका में रहने वाले सुरिंदर सिंह ठिकरीवाल और प्रतिबंधित संगठन खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के पाकिस्तान स्थित प्रमुख रंजीत सिंह नीटा को भी विस्फोट के पीछे बताया था.
जांच आगे बढ़ने पर पंजाब पुलिस को पता चला कि तरनतारन के पंजवार खुर्द गांव का रहने वाला निहंग सिख जगूप सिंह 2014 से 2022 के बीच आठ साल में कई बार मलेशिया और दुबई गया था. दिप्रिंट ने पहले रिपोर्ट किया था कि रेलवे ट्रैक पर विस्फोट करने वाला यह मॉड्यूल 2021 से काम कर रहा था. उस समय जगूप मलेशिया गया था, जहां उसने जुझार और दूसरे हैंडलरों से मुलाकात की थी.
विस्फोट के करीब दो महीने बाद पंजाब पुलिस ने मामले में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया था. जांच में नाम सामने आने के बाद मलेशियाई अधिकारियों ने उन्हें भारत भेज दिया था. भारत पहुंचने के बाद पंजाब पुलिस ने दोनों आरोपियों, गुरविंदर सिंह और मनजीत सिंह को गिरफ्तार किया. इसके बाद उनकी हिरासत एनआईए को सौंप दी गई, जिसने मामले की जांच अपने हाथ में ले ली.
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