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Monday, 21 September, 2026
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दिल्ली दंगा मामला: उमर खालिद, शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर 30 सितंबर को सुनवाई

इस बीच, दिल्ली पुलिस ने खालिद और इमाम की नई जमानत याचिकाओं का विरोध किया है. पुलिस का कहना है कि ये कार्यवाही सुप्रीम कोर्ट की ओर से उनकी जमानत याचिकाएं दोबारा दाखिल करने के लिए तय किए गए समय से पहले शुरू की गई है.

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नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को 2020 के दिल्ली दंगा मामले में कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई 30 सितंबर तक टाल दी. दिल्ली पुलिस ने सुनवाई टालने की मांग की थी.

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की बेंच ने इन मामलों को 30 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया. स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर मधुकर पांडे ने कहा कि एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू स्वास्थ्य कारणों से उपलब्ध नहीं हैं और उन्होंने सुनवाई टालने की मांग की.

इस बीच, दिल्ली पुलिस ने खालिद और इमाम की नई जमानत याचिकाओं का विरोध किया है. पुलिस का कहना है कि ये कार्यवाही सुप्रीम कोर्ट की ओर से उनकी जमानत याचिकाएं दोबारा दाखिल करने के लिए तय किए गए समय से पहले शुरू की गई है.

हाई कोर्ट के सामने दाखिल अपने जवाब में राज्य ने इन कार्यवाहियों को “गलत आधार पर और गैरकानूनी” बताया है. राज्य ने कहा है कि आरोपी 5 जनवरी 2026 के सुप्रीम कोर्ट के Gulfisha Fatima v. State (NCT of Delhi) फैसले में दिए गए निर्देशों की अनदेखी करके अपनी जमानत याचिकाओं को दोबारा शुरू करने की मांग नहीं कर सकते.

राज्य के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने खालिद और इमाम को अपनी जमानत याचिकाएं दोबारा दाखिल करने की अनुमति तब दी थी, जब अभियोजन पक्ष जिन सुरक्षित गवाहों पर भरोसा कर रहा है, उनकी गवाही की जांच पूरी हो जाए, या 5 जनवरी 2026 से एक साल पूरा हो जाए, इनमें से जो पहले हो.

अभियोजन पक्ष का कहना है कि जब मौजूदा कार्यवाही शुरू की गई, तब इनमें से कोई भी स्थिति नहीं आई थी.

राज्य ने फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा की बड़ी साजिश में खालिद और इमाम की कथित भूमिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से की गई टिप्पणियों का भी हवाला दिया है.

अभियोजन पक्ष ने कथित बरामदगी, डिजिटल बातचीत के रिकॉर्ड और बयानों समेत कई सामग्री पर भरोसा किया है. उसने सुप्रीम कोर्ट की उन टिप्पणियों का भी जिक्र किया है, जिनमें दोनों आरोपियों की कथित योजना बनाने, लोगों को जुटाने और रणनीतिक दिशा देने में कथित “केंद्रीय और अहम भूमिका” का जिक्र किया गया था.

खालिद के मामले में राज्य ने सुप्रीम कोर्ट की उन टिप्पणियों का भी हवाला दिया है, जिनमें कथित “कमांड अथॉरिटी” और लोगों को जुटाने या प्रभावित करने की क्षमता का जिक्र था. राज्य ने उन सह-आरोपियों के साथ समानता के आधार पर जमानत देने की मांग का विरोध किया है, जिन्हें जमानत मिल चुकी है. राज्य का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों की कथित भूमिकाओं में अंतर का जिक्र किया था.

राज्य ने सुप्रीम कोर्ट के बाद के फैसलों, जिनमें Syed Iftikhar Andrabi v. NIA का फैसला भी शामिल है, पर भरोसा करने का भी विरोध किया है. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, वह फैसला एक अलग मामले से जुड़ा था और उसमें खालिद और इमाम के खिलाफ आरोपों या उनकी जमानत कार्यवाही पर विचार नहीं किया गया था.

अभियोजन पक्ष ने 22 मई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के Tasleem Ahmed v. State (NCT of Delhi) आदेश का भी हवाला दिया है. इसमें Gulfisha Fatima और Syed Iftikhar Andrabi मामलों में दिए गए अलग-अलग विचारों को बड़ी बेंच के पास भेजा गया था.

राज्य ने कहा है कि मामले को बड़ी बेंच के पास भेजे जाने का मतलब अपने आप पहले के फैसले को रद्द या स्थगित करना नहीं है. इसके लिए उसने सुप्रीम कोर्ट के Union Territory of Ladakh v. Jammu and Kashmir National Conference फैसले का हवाला दिया है. इसमें कहा गया था कि किसी मामले को बड़ी बेंच के पास भेजना पहले से घोषित कानून को अपने आप नहीं बदलता.

इसलिए अभियोजन पक्ष ने कहा है कि Gulfisha Fatima फैसले में दिए गए निर्देश तब तक लागू रहेंगे, जब तक बड़ी बेंच उन्हें बदल नहीं देती या खारिज नहीं कर देती.

राज्य ने UAPA की धारा 43D(5) के आधार पर भी जमानत याचिकाओं का विरोध किया है. उसका कहना है कि जमानत देने पर कानून में लगी पाबंदी अभी भी लागू है.

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, खालिद और इमाम पर UAPA के तहत फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की कथित बड़ी साजिश के संबंध में आरोप हैं. इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे.

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा शुरू हुई थी.

राज्य ने सुनवाई के दौरान मामले में दाखिल चार्जशीट और दस्तावेजों पर भरोसा करने और जरूरत पड़ने पर आरोपियों की कथित भूमिकाओं से जुड़ी अतिरिक्त सामग्री पेश करने की अनुमति मांगी है.

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