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Monday, 21 September, 2026
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अयोध्या राम मंदिर चंदे के कथित गबन मामले में UP सरकार 25 सितंबर तक दाखिल करेगी चार्जशीट

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने आरोपों की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट पर ध्यान दिया.

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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अयोध्या के रामजन्मभूमि मंदिर में दिए गए चंदे के कथित गबन से जुड़े मामले में 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी. इसी दिन 90 दिनों की जांच की अवधि भी खत्म हो रही है.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने आरोपों की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट पर ध्यान दिया.

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया (SGI) तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि जांचकर्ताओं ने आरोपियों की पहचान करने के लिए CCTV फुटेज और दूसरी सामग्री का विश्लेषण किया है. कोर्ट को यह भी बताया गया कि जांच काफी हद तक पूरी हो चुकी है.

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की संबंधित सेशंस कोर्ट को मामले में उचित आदेश देने की अनुमति दे दी.

CJI ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस समय मामले को सेशंस जज से अपने पास नहीं लेना चाहता. उन्होंने कहा कि अगर कोर्ट को लगा कि आगे और जांच की जरूरत है, तो वह आगे के आदेश जारी करेगा.

यह मामला श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले चंदे में कथित वित्तीय गड़बड़ी और कथित गबन की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं से जुड़ा है.

22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने आरोपों की जांच के लिए एक विशेष SIT बनाने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि एक अनुभवी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IGP) टीम का नेतृत्व करे और जांच में एक फॉरेंसिक विशेषज्ञ को शामिल किया जाए.

17 अगस्त को पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उस समय SIT की स्टेटस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया था. हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं और जनहित में काम करने वाले दूसरे लोगों को जांच से जुड़े सुझाव सॉलिसिटर जनरल के कार्यालय में देने की अनुमति दी थी.

कोर्ट ने यह भी साफ किया था कि SIT का काम सिर्फ FIR की जांच तक सीमित है.

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