चंडीगढ़, नौ जुलाई (भाषा) पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार द्वारा मार्च 2025 में शुरू किए गए ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ अभियान के तहत अब तक मादक पदार्थों के आदी 10,656 लोगों को स्वापक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम की धारा 64ए के तहत अभियोजन से छूट दी गई है।
यह जानकारी बृहस्पतिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई।
बयान के अनुसार, मादक पदार्थों के सेवन या व्यक्तिगत उपयोग के लिए कम मात्रा में इसे रखने के मामलों में इन लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाने के बजाय उन्हें उपचार और पुनर्वास के लिए सरकारी नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों में भर्ती कराया गया है।
बयान में कहा गया कि एक मार्च 2025 से छह जुलाई 2026 के बीच पंजाब पुलिस ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत 51,516 प्राथमिकी दर्ज कीं और 67,519 लोगों को गिरफ्तार किया। इसी अवधि में 10,656 लोगों को अभियोजन से छूट दी गई, जो राज्य में मादक पदार्थों की आपूर्ति पर रोक लगाने और नशे के आदी लोगों को उपचार उपलब्ध कराने की दोहरी रणनीति को दर्शाता है।
बयान में कहा गया कि राज्य सरकार का यह मानवीय दृष्टिकोण इस समझ को दर्शाता है कि मादक पदार्थों की लत से जूझ रहे लोगों को दंडित करने के बजाय उनका उपचार और पुनर्वास किया जाना चाहिए।
इसमें कहा गया कि एनडीपीएस अधिनियम की धारा 64ए का उपयोग उसी उद्देश्य से किया जा रहा है, जिसके लिए इसका प्रावधान किया गया था।
बयान के अनुसार, इस प्रावधान के तहत स्वेच्छा से नशामुक्ति उपचार कराने वाले मादक पदार्थों के आदी लोगों को अभियोजन से छूट दी जाती है, जिससे वे अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत निर्धारित दंड से बच सकते हैं।
इस बयान में कहा गया है कि कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए आने वाले दिनों में पुलिस अधिक से अधिक लोगों को नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों से जोड़ने का प्रयास जारी रखेगी।
पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने कहा, ‘‘मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई केवल तस्करों और तस्करी करने वालों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि नशे की गिरफ्त में आए प्रत्येक व्यक्ति को सामान्य जीवन में लौटने का उचित अवसर देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस बल के रूप में हम सख्त कानून प्रवर्तन और मानवीय दृष्टिकोण के संयोजन वाले हर प्रयास का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि राज्य को जल्द से जल्द मादक पदार्थों की समस्या से मुक्त किया जा सके और युवाओं का भविष्य सुरक्षित बनाया जा सके।’’
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (मादक पदार्थ निरोधक कार्यबल) निलाभ किशोर ने कहा कि अपराधी और नशे के शिकार व्यक्ति के बीच अंतर पहचानना आवश्यक है, ताकि नशे की लत में फंसे लोगों को फिर से समाज की मुख्यधारा में लाया जा सके।
उन्होंने कहा, ‘‘समय रहते उपचार उपलब्ध कराकर ऐसे व्यक्ति को, जो भविष्य में अपराध की ओर बढ़ सकता है, समाज में पुनः स्थापित किया जा सकता है।’’
उन्होंने कहा कि नशे की लत एक उपचार योग्य चिकित्सीय स्थिति है और इससे जूझ रहे लोगों तथा उनके परिवारों को आगे आकर नशामुक्ति उपचार का लाभ उठाना चाहिए।
भाषा मनीषा रंजन
रंजन
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.