इंदौर, 23 मई (भाषा) मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने की संभावनाओं पर लोगों की राय लेने के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति ने शनिवार से औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी।
इसकी शुरुआत इंदौर में आयोजित ‘जन परामर्श’ बैठक से हुई। बैठक में ज्यादातर प्रतिभागियों ने समान नागरिक संहिता के पक्ष में राय रखी, जबकि मुस्लिम समुदाय के एक प्रतिनिधि ने संहिता की अवधारणा को शरीयत कानूनों के खिलाफ बताते हुए विरोध जताया।
उच्च स्तरीय समिति के सदस्य और भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी शत्रुघन सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि समिति प्रदेश भर में बैठकें आयोजित करके समान नागरिक संहिता पर विभिन्न वर्गों की राय लेगी और उनके सुझावों के आधार पर अपनी अनुशंसाएं राज्य सरकार को सौंपेगी।
उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता का दायरा विस्तृत है और इसमें विवाह, तलाक, ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ (बिना शादी के पुरुष और महिला का साथ रहना), उत्तराधिकार आदि विषय शामिल हैं।
सिंह ने कहा, ‘‘उच्च स्तरीय समिति सभी लोगों के विचार सुनेगी। इसके बाद वर्तमान में प्रचलित कायदे-कानूनों का अध्ययन करेगी और समान नागरिक संहिता लागू करने की संभावनाओं के बारे में अपनी सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपेगी। हम कोशिश करेंगे कि जुलाई तक अपनी अनुशंसाओं को अंतिम रूप दे दें।’’
उच्च स्तरीय समिति के सदस्य ने बताया कि नागरिकों से सुझाव लेने के लिए राज्य सरकार ने एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है और लोग 15 जून तक इस पर अपने सुझाव दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने कहा,‘‘खासकर युवाओं को इस पोर्टल पर अपने विचार बढ़-चढ़कर दर्ज कराने चाहिए।’’
बैठक में समान नागरिक संहिता के समर्थन में बोलने वाले प्रतिभागियों ने कहा कि इससे राज्य में सभी नागरिकों के लिए एक जैसी कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित होगी। वहीं, मुस्लिम समुदाय के एक प्रतिनिधि ने कहा कि समान नागरिक संहिता की परिकल्पना शरीयत कानूनों के खिलाफ है और सूबे में इसे लागू किया गया, तो समुदाय के धार्मिक अधिकार प्रभावित होंगे।
बैठक में शहर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव, दो स्थानीय विधायकों-मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़ और मधु वर्मा सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भी अपने सुझाव दिए।
भाषा
हर्ष रवि कांत
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