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Friday, 12 June, 2026
होमदेशआतंकी संगठन हिज्ब-उत-तहरीर के डिजिटल नेटवर्क की जांच में जुटी NIA, स्विट्जरलैंड और जर्मनी से मांगी मदद

आतंकी संगठन हिज्ब-उत-तहरीर के डिजिटल नेटवर्क की जांच में जुटी NIA, स्विट्जरलैंड और जर्मनी से मांगी मदद

दिप्रिंट एक्सक्लूसिव: HuT के ऑपरेटिव्स के एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने की आशंका के बीच एनआईए ने जिनेवा स्थित Proton Mail और जर्मनी स्थित Tuta Mail से जुड़ी जानकारी के लिए मदद मांगी है.

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नई दिल्ली: प्रतिबंधित संगठन हिज्ब-उत-तहरीर (HuT) के विदेशी हैंडलरों तक पहुंचने की कोशिश में जुटी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने स्विट्जरलैंड और जर्मनी की सरकारों से सहयोग मांगा है. दिप्रिंट को मिली जानकारी के अनुसार, ये हैंडलर एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म के जरिए काम कर रहे हैं.

सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी ने गृह मंत्रालय के माध्यम से स्विट्जरलैंड के अधिकारियों को एक अनुरोध भेजा है, जिसमें जिनेवा मुख्यालय वाली अत्यधिक एन्क्रिप्टेड ईमेल सेवा Proton Mail से जुड़ी जानकारी मांगी गई है.

वहीं जर्मनी में, एजेंसी ने वहां के अधिकारियों से Tuta Mail (पहले Tutanota Mail) पर मौजूद खातों की जांच में सहयोग मांगा है. यह भी एक अत्यधिक एन्क्रिप्टेड ईमेल सेवा है, जिसका संचालन जर्मनी से होता है.

जांच से जुड़े सूत्रों ने बताया कि HuT के ऑपरेटिव्स के नेटवर्क की पड़ताल के दौरान एनआईए को पता चला है कि भारत में मौजूद कुछ ऑपरेटिव्स को निर्देश देने वाले अकाउंट Proton Mail और Tuta Mail पर संचालित किए जा रहे थे.

भारत और स्विट्जरलैंड के बीच म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (MLAT) 1989 से लागू है, जबकि भारत और जर्मनी के बीच MLAT पर अक्टूबर 2024 में हस्ताक्षर हुए थे.

हिज्ब-उत-तहरीर (HuT) की स्थापना 1953 में मिस्र स्थित Muslim Brotherhood से अलग हुए एक समूह के रूप में हुई थी. इसका उद्देश्य कट्टरपंथ का प्रचार करना और लोकतांत्रिक सरकारों को उखाड़ फेंकना बताया जाता है.

भारत ने 2024 में HuT को आतंकवादी संगठन घोषित किया था, जबकि जर्मनी ने इस संगठन पर 2003 में ही प्रतिबंध लगा दिया था.

इसके अलावा यूके, मिस्र, बांग्लादेश, पाकिस्तान और मध्य एशिया तथा अरब क्षेत्र के कई देशों ने भी HuT को आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है.

भारत में HuT मॉड्यूल

यह मामला, जिसमें एनआईए ने स्विट्जरलैंड और जर्मनी के अधिकारियों से मदद मांगी है, मई 2024 में चेन्नई क्राइम ब्रांच की कार्रवाई से जुड़ा है. उस समय एजेंसी ने कथित HuT ऑपरेटिव्स हामिद हुसैन, अहमद मंसूर, अब्दुल रहमान, मोहम्मद मॉरिस और खादर नवाज शरीफ उर्फ जाविद के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था.

एफआईआर ‘Dr Hameed Hussain’ नाम के एक यूट्यूब चैनल की सामग्री के आधार पर दर्ज की गई थी. हुसैन को भारत में HuT का मुख्य समन्वयक बताया गया था.

एफआईआर का आधार बने वीडियो में चेन्नई क्राइम ब्रांच ने दर्ज किया था कि हुसैन ऐसे संदेश दे रहा था:

“फिलिस्तीन में लोग लड़ रहे हैं, जबकि हम नमाज़ पढ़ रहे हैं, रोज़े रख रहे हैं और कुरान की आयतें याद कर रहे हैं. हम उनके संघर्ष की बात नहीं कर रहे हैं, न ही इस्लामी सरकारें कर रही हैं. हम खिलाफत, शरिया पर एक शब्द भी नहीं बोलते. सबसे पहले मुसलमानों को राष्ट्रवाद के आधार पर नहीं सोचना चाहिए. हम राष्ट्रवादी, लोकतंत्र या धर्मनिरपेक्षता के अनुयायी नहीं हैं, बल्कि मुसलमान हैं और हमें इस्लाम के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए.”

चेन्नई क्राइम ब्रांच की एफआईआर, जिसे दिप्रिंट ने देखा है, के अनुसार हुसैन के वीडियो में एक और बात कही गई थी:

“धार्मिक स्वतंत्रता, संपत्ति का अधिकार, राय रखने का अधिकार और व्यक्तिगत अधिकार—ये सभी इस्लाम के विपरीत हैं. क्या ऐसे सिस्टम में वोट देना हलाल है, जहां नियम काफिरों (अविश्वासियों) ने बनाए हों, अल्लाह ने नहीं? यह निश्चित रूप से हराम है, क्योंकि संप्रभुता शरिया शासन की है और कानून बनाने का अधिकार केवल अल्लाह को दिया गया है. लोकतंत्र कुफ्र (अविश्वास) है क्योंकि लोकतंत्र में संप्रभुता लोगों के पास होती है.”

एनआईए के अनुसार, हुसैन चेन्नई के रॉयापेट्टा इलाके में रहता था और हर रविवार शहर के Modern Essential Education Trust (MEET) हॉल में गुप्त कक्षाएं चलाता था. एजेंसी का आरोप है कि वहां वह इस्लामी खिलाफत की स्थापना की वकालत करता था और लोगों में असंतोष फैलाने तथा सांप्रदायिक तनाव भड़काने के लिए भारत-विरोधी सामग्री फैलाता था.

अपनी चार्जशीट में एनआईए ने आरोप लगाया कि HuT के ऑपरेटिव्स संगठन के संस्थापक शेख तकी-अल-दीन अल-नभानी द्वारा तैयार किए गए तीन-स्तरीय कार्यक्रम पर काम करते थे. इसमें ऑपरेटिव्स की भर्ती करके समाज में अपनी पकड़ बनाना, सार्वजनिक सभाओं के जरिए खिलाफत की वकालत करना और बाद में स्थापित मुस्लिम सेनाओं, विदेशी सहायता तथा सैन्य तख्तापलट के जरिए राष्ट्र-राज्य पर नियंत्रण हासिल करना शामिल था.

फिलिस्तीनी मूल के इस्लामी विद्वान अल-नभानी ने 1953 में HuT की स्थापना की थी. यह संगठन करीब 50 देशों में सक्रिय बताया जाता है और इसकी प्रमुख रणनीति मुस्लिम बहुल देशों की सेनाओं में घुसपैठ कर तख्तापलट को बढ़ावा देना रही है.

यह संगठन पहली बार 2019 में तब चर्चा में आया था, जब अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन के पीछे इसकी भूमिका होने के आरोप लगे थे.

इसके बाद दिसंबर 2020 में मदुरै पुलिस ने मोहम्मद इकबाल नामक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया. उस पर आरोप था कि वह डिजिटल माध्यमों के जरिए ISIS (इस्लामिक स्टेट) और HuT के ऑपरेटिव्स के संपर्क में था. यह मामला इकबाल की एक फेसबुक पोस्ट से शुरू हुआ था, जिस पर सांप्रदायिक तनाव भड़काने का आरोप था.

अप्रैल 2021 में एनआईए ने जांच अपने हाथ में ले ली. इसी दौरान मदुरै पुलिस ने कथित HuT ऑपरेटिव्स से जुड़ा एक और मामला दर्ज किया था. दूसरी एफआईआर में मदुरै पुलिस ने आरोप लगाया कि अब्दुल्ला उर्फ सर्वनाकुमार ने सोशल मीडिया पर “भड़काऊ संदेश” पोस्ट किए थे, जिनका उद्देश्य लोगों को उकसाना और भारत के खिलाफ धार्मिक युद्ध छेड़ने के लिए प्रेरित करना था.

आतंकवाद-रोधी एजेंसी ने दोनों मामलों में चार्जशीट दाखिल करते हुए आरोप लगाया कि आरोपी HuT से जुड़े थे और संगठन के संस्थापक द्वारा लिखे गए मसौदा संविधान के आधार पर देश में खिलाफत स्थापित करने के लिए युवाओं की भर्ती करने की कोशिश कर रहे थे.

एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि HuT के ऑपरेटिव्स नए सदस्यों की भर्ती के लिए बैठकें आयोजित कर रहे थे, युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए गुप्त कक्षाएं चला रहे थे और संगठन की विचारधारा का प्रचार कर तमिलनाडु और केरल के विभिन्न जिलों में नए मॉड्यूल खड़े करने की कोशिश कर रहे थे.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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