नई दिल्ली: स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर लंबे समय से छुट्टी पर चल रहे तीन आईपीएस अधिकारियों को पिछले हफ्ते अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) द्वारा बनाई गई मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया. यह बोर्ड उनकी स्वास्थ्य स्थिति का “स्वतंत्र मूल्यांकन” करेगा. दिप्रिंट को यह जानकारी मिली है.
2009 बैच के गौरव शर्मा (जिनका सितंबर 2024 में लेह ट्रांसफर हुआ था), 2010 बैच के बिजेंद्र कुमार यादव (जिनका फरवरी 2023 में पुडुचेरी ट्रांसफर हुआ था) और 2011 बैच के शंकर चौधरी (जिनका जुलाई 2023 में मिजोरम ट्रांसफर हुआ था) ने दिल्ली से अपनी-अपनी नई पोस्टिंग जॉइन कर ली थी, लेकिन बाद में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर लंबे समय की छुट्टी पर चले गए.
तीनों अधिकारी AGMUT (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश) कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं.
3 जुलाई को गृह मंत्रालय की ओर से जारी आदेश, जिसकी एक कॉपी दिप्रिंट के पास है, लद्दाख, पुडुचेरी और मिजोरम के मुख्य सचिवों को भेजा गया. इसमें अधिकारियों को मेडिकल कमेटी के सामने अपने मेडिकल रिकॉर्ड और स्वास्थ्य प्रमाणपत्र पेश करने के लिए कहा गया है.
आदेश में कहा गया है कि 9 सदस्यीय मेडिकल बोर्ड इन अधिकारियों के स्वास्थ्य का मूल्यांकन करेगा.
आदेश में कहा गया, “गौरव शर्मा, आईपीएस, बिजेंद्र कुमार यादव, आईपीएस और शंकर चौधरी, आईपीएस को तय तारीख, समय और स्थान पर मेडिकल बोर्ड के सामने अपने सभी जरूरी मेडिकल दस्तावेज़ (मूल और फोटोकॉपी) तथा फोटो पहचान पत्र के साथ उपस्थित होना होगा.”
दिप्रिंट ने प्रतिक्रिया के लिए शंकर चौधरी से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. बाकी दो अधिकारियों से भी संपर्क करने की कोशिश की गई. उनका जवाब मिलने पर इस खबर को अपडेट कर दिया जाएगा.
एमएचए की इस कार्रवाई से पहले शंकर चौधरी का नाम दिल्ली पुलिस की विजिलेंस यूनिट द्वारा दर्ज की गई एक एफआईआर में सामने आया था. यह एफआईआर नवंबर 2023 में दिल्ली में बिना अनुमति और कानूनी अधिकार के की गई एक छापेमारी के मामले में दर्ज हुई थी. उस समय वह मिजोरम की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पद पर तैनात थे.
पुलिस के संयुक्त आयुक्त (जेसीपी) रैंक के अधिकारी द्वारा की गई शुरुआती जांच में पाया गया कि चौधरी ने “अपने कानूनी और क्षेत्रीय अधिकार से बाहर जाकर काम किया” और “दिल्ली में बिना अनुमति छापेमारी और जब्ती की, जिससे कानूनी और प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन हुआ.”
जून 2022 में भी शंकर चौधरी को दिल्ली के द्वारका जिले से पुलिस आयुक्त के आदेश पर हटा दिया गया था. उन पर दक्षिण दिल्ली के एक बार में हुए झगड़े के दौरान एक महिला को घायल करने का आरोप लगा था.
बिजेंद्र कुमार यादव भी पहले विवादों में रह चुके हैं. नवंबर 2024 में उन पर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों के साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगा था. उस समय उनकी पत्नी, जो खुद भी आईपीएस अधिकारी हैं, इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती थीं. इस घटना की डॉक्टरों के संगठन ने निंदा की थी.
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