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Monday, 24 August, 2026
होमदेशप्रियंका गांधी का केंद्र पर हमला, कहा—40 साल में सबसे ज्यादा बेरोजगारी, युवाओं में बढ़ रही निराशा

प्रियंका गांधी का केंद्र पर हमला, कहा—40 साल में सबसे ज्यादा बेरोजगारी, युवाओं में बढ़ रही निराशा

प्रियंका गांधी ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग, MSME और छोटे कारोबारों को प्रभावित करने वाली नीतियों पर ध्यान नहीं देने का असर देश में रोजगार पैदा होने पर पड़ा है.

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नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को युवाओं में बेरोजगारी को लेकर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि देश में रोजगार के अवसर नहीं बढ़ने और शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों के कारण युवाओं में अशांति, निराशा और हताशा बढ़ रही है.

प्रियंका गांधी ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग, MSME और छोटे कारोबारों को प्रभावित करने वाली नीतियों पर ध्यान नहीं देने का असर देश में रोजगार पैदा होने पर पड़ा है.

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर संयुक्त समिति की बैठक के बाद कांग्रेस सांसद ने कहा, “हम पहले से जानते हैं कि बेरोजगारी की दर 40 साल में सबसे ज्यादा है. यह साफ है कि युवाओं में काफी अशांति, निराशा और हताशा है. हमने इसे छात्रों के विरोध प्रदर्शनों में भी देखा है.”

उन्होंने कहा, “यह पिछले 12 वर्षों में खराब शिक्षा व्यवस्था और रोजगार पैदा नहीं होने का मिला-जुला असर है. मैन्युफैक्चरिंग पर कोई जोर नहीं दिया गया. MSME पर कोई जोर नहीं दिया गया. ऐसी कुछ नीतियां हैं जो छोटे कारोबारों, रोजगार देने वाले लोगों और कृषि क्षेत्र को भी नुकसान पहुंचा रही हैं. यह ऐसी चीज है, जिसे हम काफी समय से उठाते आ रहे हैं.”

प्रियंका गांधी की यह टिप्पणी नीति आयोग की रिपोर्ट ‘Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047’ के बीच आई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 15 से 29 साल की उम्र के अनुमानित 8.7 करोड़ भारतीय न तो शिक्षा से जुड़े हैं, न रोजगार से और न ही किसी तरह की ट्रेनिंग ले रहे हैं.

रिपोर्ट 2021 में हुए नेशनल सैंपल सर्वे के 78वें राउंड के आंकड़ों पर आधारित है. इसमें ऐसे युवाओं को NEET (Not in Education, Employment or Training) श्रेणी में रखा गया है.

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी नीति आयोग की रिपोर्ट को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि “मोदी सरकार ने शिक्षा से रोजगार तक युवा भारत के पूरे रास्ते को बर्बाद कर दिया है.”

खरगे ने कहा कि नीति आयोग के मुताबिक 15 से 29 साल की उम्र के 8.7 करोड़ युवा न तो शिक्षा, न रोजगार और न ट्रेनिंग से जुड़े हैं. इनमें करीब 88 फीसदी घरेलू कामों में लगे हैं. वहीं, PLFS जुलाई 2026 के अनुसार युवाओं में बेरोजगारी दर 15.6 फीसदी है, जबकि युवा महिलाओं में यह दर बढ़कर 19.5 फीसदी है.

खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तीन सवाल पूछे.

पहला सवाल: ग्रेजुएशन के बाद नौकरियां कहां हैं? उन्होंने कहा कि 20 से 29 साल की उम्र के बेरोजगार भारतीयों में 67 फीसदी ग्रेजुएट हैं, जबकि 15 से 25 साल के ग्रेजुएट युवाओं में बेरोजगारी करीब 40 फीसदी है. परिवार अपनी बचत खर्च करते हैं, छात्र शिक्षा के लिए कर्ज लेते हैं और डिग्री हासिल करते हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि पर्याप्त नौकरियां ही नहीं हैं.

दूसरा सवाल: हर साल 2 करोड़ नौकरियां देने के वादे का क्या हुआ? खरगे ने कहा कि इस वादे के हिसाब से 12 साल में भारत में 24 करोड़ नौकरियां होनी चाहिए थीं. इसके बजाय लाखों सरकारी पद खाली हैं और स्थायी रोजगार की जगह कॉन्ट्रैक्ट और पार्ट-टाइम काम बढ़ रहा है.

तीसरा सवाल: भारत के डेमोग्राफिक डिविडेंड को डेमोग्राफिक डिजास्टर में कौन बदल रहा है? खरगे ने कहा कि महंगी और अपर्याप्त शिक्षा, पेपर लीक, भर्ती में देरी, बढ़ता स्किल गैप और अच्छी नौकरियों की कमी ने पूरी पीढ़ी के भविष्य को खतरे में डाल दिया है.

खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वादे का भी ज़िक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह वह हासिल करेंगे जो पिछली सरकारें 70 साल में नहीं कर सकीं.

खरगे ने कहा, “मोदी जी, आपने 70 साल में पिछली सरकारों से जो नहीं हो सका, उसे करने का वादा किया था. आपने अपने उस दावे को जरूर पूरा किया है—ऐसी शिक्षा व्यवस्था दी जो ज्यादा महंगी है, जिसमें RSS का प्रभाव है, ऐसी परीक्षाएं हैं जिन पर युवा भारतीय भरोसा नहीं कर सकते और ऐसी डिग्रियां हैं, जिनके साथ धीरे-धीरे नौकरियां नहीं मिल रही हैं.”

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