नई दिल्ली: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को कहा कि उनकी सरकार केंद्र से अपील करेगी कि मेघवाल समुदाय के सदस्यों को जाति प्रमाणपत्रों में ‘चमार’ की जगह ‘मेघवाल’ लिखने का विकल्प दिया जाए.
सैनी ने रेवाड़ी जिले के बावल में एक कार्यक्रम में कहा, “हम केंद्र को सिफारिश करेंगे कि समुदाय के सदस्यों को अगर वे चाहें तो अपने जाति प्रमाणपत्र में ‘मेघवाल’ शब्द लिखने का विकल्प दिया जाए.”
यह मांग मेघवाल उत्थान समिति की ओर से समरसता सम्मेलन और प्रतिभा सम्मान समारोह में रखी गई 10 मांगों में से एक थी. हरियाणा में ‘चमार’ वह अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी है, जिसके तहत इस समुदाय को आधिकारिक तौर पर मान्यता मिली हुई है. हालांकि, समुदाय के सदस्यों का कहना है कि इस शब्द से सामाजिक कलंक जुड़ा हुआ है.
सैनी ने सभी 10 मांगों को स्वीकार कर लिया और कहा कि उन्हें मंजूरी के लिए संबंधित विभागों को भेजा जाएगा. उन्होंने संगठन के लिए 31 लाख रुपये की सहायता राशि देने की भी घोषणा की.
प्रस्तावित बदलाव से समुदाय का SC दर्जा या आरक्षण का लाभ नहीं बदलेगा. इसके बजाय, सदस्य सरकारी दस्तावेजों में ‘मेघवाल’ नाम इस्तेमाल करने का विकल्प चाहते हैं. समुदाय के कुछ लोग, खासकर राजस्थान में, पहले से ही इस नाम का इस्तेमाल करते हैं.
अंतिम फैसला केंद्र सरकार को लेना होगा क्योंकि अनुसूचित जातियों के नाम संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 और इससे जुड़े केंद्रीय नोटिफिकेशन के तहत तय होते हैं.
केंद्र की मंजूरी जरूरी
हरियाणा सरकार अपने स्तर पर यह बदलाव नहीं कर सकती. उसे यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजना होगा. संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 के तहत अधिसूचित अनुसूचित जातियों में बदलाव करने का अधिकार केंद्र के पास है.
यह मांग दूसरे राज्यों में भी उठ रही है. राजस्थान में, जहां ‘मेघवाल’ नाम का इस्तेमाल पहले से ज्यादा होता है, वहां भी समुदाय के संगठनों ने सरकारी रिकॉर्ड में ‘चमार’ की जगह ‘मेघवाल’ लिखने की मांग की है.
यह मामला अदालतों तक भी पहुंच चुका है. सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में सरकारी प्रमाणपत्रों में ऐसे जाति नामों के इस्तेमाल पर सवाल उठाया गया है, जिन्हें अपमानजनक माना जाता है. याचिका में यह सवाल भी उठाया गया है कि जब ऐसे शब्दों का गाली या अपमान के तौर पर इस्तेमाल करने पर SC/ST (अत्याचार निवारण) कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है, तो सरकारी रिकॉर्ड में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल क्यों जारी है.
समुदाय के लिए यह मांग अपने सदस्यों की पहचान के लिए इस्तेमाल होने वाले नाम से जुड़ी है. यह नाम जाति प्रमाणपत्रों, आवेदनों और दूसरे सरकारी रिकॉर्ड में इस्तेमाल होता है.
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