नयी दिल्ली, 20 मार्च (भाषा) संसद की एक समिति ने केंद्र के खिलाफ मुकदमों में सरकार की ओर से पैरवी करने के लिए उच्च न्यायालयों में विधि अधिकारियों की कमी को उजागर किया है।
कानून और कार्मिक संबंधी स्थायी संसदीय समिति ने पाया कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के कुल 39 स्वीकृत पदों में से उच्चतम न्यायालय के लिए निर्धारित सभी 14 पदों पर विधि अधिकारी नियुक्त हैं।
हालांकि, विभिन्न उच्च न्यायालयों के लिए स्वीकृत 25 पदों में से केवल 13 पर ही नियुक्तियां की गई हैं, जिस कारण 12 पद रिक्त हैं।
कानून मंत्रालय के तहत विधि मामलों के विभाग की अनुदान मांगों पर अपनी रिपोर्ट में समिति ने कहा, ‘‘समिति का मानना है कि उच्च न्यायालयों में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के पदों पर इस तरह की रिक्तियां भारत सरकार के प्रभावी प्रतिनिधित्व को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकती हैं, विशेष रूप से उन मामलों में जिनमें कानून के महत्वपूर्ण प्रश्न और महत्वपूर्ण जन हित शामिल हैं।’’
समिति ने विभाग से उच्च न्यायालयों में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के 12 रिक्त पदों को समयबद्ध तरीके से भरने के लिए त्वरित कदम उठाने और विभिन्न उच्च न्यायालयों के समक्ष मुकदमों की संख्या और जटिलता को ध्यान में रखते हुए वास्तविक आवश्यकता के मुकाबले स्वीकृत पदों की संख्या की समय-समय पर समीक्षा करने को कहा।
अटॉर्नी जनरल के नेतृत्व में विधि अधिकारियों का एक समूह देशभर की सभी अदालतों में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करता है। अदालतों में उन्हें अधिवक्ताओं के एक पैनल द्वारा सहायता प्रदान की जाती है, जो विधि अधिकारियों को मुकदमों में केंद्र सरकार का बचाव करने में भी मदद करते हैं।
संसदीय समिति ने केंद्र सरकार से जुड़े अदालती मामलों को कम करने के लिए मुकदमेबाजी का तत्परता से प्रबंधन, बार-बार होने वाले और टाले जा सकने वाले मामलों का शीघ्र पता लगाने और मंत्रालयों/विभागों द्वारा सोच-समझकर निर्णय लेने की भी सिफारिश की।
भाषा सुभाष अविनाश
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