चंडीगढ़: पंचकूला में 6 साल की बच्ची पर उसी स्कूल के 8 साल के छात्र द्वारा कक्षा के अंदर हमला किए जाने के चार दिन बाद, अधिकारी लापरवाही के लिए शिक्षकों और कर्मचारियों पर कार्रवाई कर रहे हैं. दो जूनियर बेसिक शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है और पुलिस ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.
सेक्टर 20 के सरकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में KG की छात्रा पर 28 अक्टूबर को कक्षा 3 के एक लड़के ने हमला किया था. कक्षा के अंदर लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हुई घटना की फुटेज अब वायरल हो गई है. इसमें कथित तौर पर लड़का बच्ची का सिर डेस्क पर पटकते और जमीन पर गिरी बच्ची को बार-बार लात मारते हुए दिखाई दे रहा है.
रविवार दोपहर तक बच्ची का PGI, चंडीगढ़ में इलाज चल रहा है. उसकी हालत स्थिर है और वह खतरे से बाहर है. लड़के को ऑब्जर्वेशन होम भेज दिया गया है और उसकी मनोवैज्ञानिक जांच की जा रही है. यह पता लगाने के लिए जांच भी चल रही है कि उसके हिंसक व्यवहार के पीछे कौन से कारण थे, इनमें परिवार का माहौल और हिंसक वीडियो गेम के संपर्क में आना भी शामिल है.
हरियाणा के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद जांच के आदेश दिए हैं. पंचकूला के उपायुक्त सतपाल शर्मा ने अतिरिक्त उपायुक्त विवेक की अध्यक्षता में चार सदस्यों की समिति बनाई है. सरकार ने यह भी कहा है कि बच्ची के इलाज का पूरा खर्च वह उठाएगी.
पंचकूला की पुलिस उपायुक्त (DCP) अदिति सिंह ने रविवार को दिप्रिंट से बात करते हुए कहा कि किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है.
सिंह ने घटना के बारे में कहा, “28 अक्टूबर को पंचकूला के सेक्टर 20 स्थित सरकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई, जिसमें 8 साल के एक छात्र ने कक्षा के अंदर 6 साल की एक छात्रा पर हमला किया.”
उन्होंने आगे कहा, “बच्ची का फिलहाल PGI चंडीगढ़ में इलाज चल रहा है और वह खतरे से बाहर है. उसके माता-पिता उसके साथ हैं और वह सुरक्षित है.”
DCP ने कहा कि पुलिस की जांच में स्कूल की तरफ से लापरवाही सामने आई है.
उन्होंने कहा, “पुलिस जांच के दौरान शुरुआती जांच में स्कूल प्रशासन की लापरवाही भी सामने आई. इसे देखते हुए FIR दर्ज की गई है. जांच पूरी निष्पक्षता और गंभीरता के साथ की जाएगी.”
यह पूछे जाने पर कि किन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, उन्होंने कहा, “स्कूल के प्रिंसिपल, बच्ची की कक्षा के प्रभारी और स्कूल के चौकीदार.”
आरोपी नाबालिग है, इसलिए उसके खिलाफ किशोर न्याय कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी. सिंह ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम के तहत जरूरी प्रक्रिया के अनुसार विशेषज्ञ उसकी मनोवैज्ञानिक जांच कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.” लड़के को किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया गया और अंबाला के ऑब्जर्वेशन होम भेज दिया गया.
DCP ने कहा कि पुलिस सिर्फ इस एक स्कूल तक सीमित नहीं रहेगी. उन्होंने कहा, “इस घटना के बाद हमने पंचकूला के स्कूलों के लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी करने का फैसला किया है और सभी स्कूलों के लिए इसका पालन करना अनिवार्य होगा.”
उन्होंने कहा कि पंचकूला पुलिस स्कूलों का दौरा करेगी और शिक्षकों और छात्रों के लिए जागरूकता और संपर्क कार्यक्रम आयोजित करेगी. उन्होंने कहा, “मैं पंचकूला के सभी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता को यह भी भरोसा दिलाना चाहती हूं कि उनकी सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है.”
DCP ने आगे कहा, “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इस घटना की जांच और भविष्य में ऐसे किसी भी मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से हो और हर समय स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा बनी रहे.”
इस बीच, पंचकूला के जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी ने शनिवार को दो जूनियर बेसिक शिक्षकों, पूजा रानी और सिमरनजीत कौर को निलंबित कर दिया. उसी दिन गुस्साए माता-पिता स्कूल के गेट के बाहर इकट्ठा हुए और प्रबंधन तथा प्रिंसिपल के खिलाफ नारे लगाए. माता-पिता और पुलिस के बीच बहस भी हुई. पुलिस ने माता-पिता से गेट से दूर जाने को कहा.
‘कृपया वीडियो प्रसारित न करें’
28 अक्टूबर की घटना का पता तब चला जब बच्ची स्कूल से छुट्टी के समय घर जाने के लिए बाहर नहीं आई. उसे घर ले जाने वाला ऑटो ड्राइवर उसे नहीं ढूंढ पाया और उसने परिवार को इसकी जानकारी दी. उसके पिता और चाचा तुरंत स्कूल पहुंचे. परिवार का कहना है कि आरोपी लड़का खुद उन्हें उस कमरे तक ले गया, जहां बच्ची घायल और बेहोश पड़ी थी.
परिवार ने सवाल उठाया है कि जब स्कूल में CCTV कैमरे लगे हैं और प्रिंसिपल के कार्यालय से उनकी निगरानी होती है, तो किसी को हमले के बारे में कैसे पता नहीं चला. उनका आरोप है कि लड़का बच्ची को यह कहकर पहली मंजिल पर ले गया कि उसके पिता ने उसे बुलाया है. परिवार का यह भी आरोप है कि बच्ची को पत्थर और गमले से मारा गया और कुछ दूर तक घसीटा गया. CCTV फुटेज से पता चला कि कक्षा के अंदर हमला 96 सेकंड तक चला.
हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी मामले में हस्तक्षेप किया है. आयोग ने पंचकूला के जिला शिक्षा अधिकारी से शिक्षा विभाग द्वारा की गई कार्रवाई पर विस्तृत और बिंदुवार तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है.
आयोग की अध्यक्ष तृप्ति श्योराण ने शनिवार को पंचकूला में मीडिया से कहा कि उन्हें घटना का वीडियो गुरुवार शाम मिला था. उन्होंने कहा, “जिस तरह से उसने यह काम किया, उसे देखते हुए हम चाहते हैं कि बच्चे की मानसिक स्वास्थ्य जांच और काउंसलिंग कराई जाए, ताकि यह समझा जा सके कि उसने ऐसा व्यवहार क्यों किया.”
श्योराण ने कहा कि आयोग यह पता लगाएगा कि लड़के के परिवार का माहौल, वह जिस इलाके में रहता है या आक्रामक वीडियो गेम खेलने का उसके व्यवहार पर कोई असर पड़ा था या नहीं. उन्होंने कहा, “इन सभी कारणों पर विचार करने के बाद ही हम पूरी स्थिति का आकलन कर पाएंगे.”
हरियाणा मानवाधिकार आयोग (HHRC) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा (सेवानिवृत्त) ने शनिवार को स्कूल का दौरा किया और घटना पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी.
आयोग ने आम लोगों और मीडिया संगठनों से अपील की है कि वे घटना में शामिल दोनों बच्चों के वीडियो को साझा या प्रसारित न करें. HHRC के सहायक रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने कहा कि ऐसे वीडियो बार-बार देखने से बच्चों के दिमाग पर बुरा असर पड़ सकता है.
अरोड़ा ने दिप्रिंट से कहा कि सप्ताहांत के बाद सोमवार को कार्यालय खुलने के बाद आयोग इस मामले में आगे की कार्रवाई शुरू करेगा.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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