गाजियाबाद/मेरठ/फरीदाबाद: सड़क किनारे पंक्चर ठीक करने वाला एक आदमी, मथुरा की सड़कों पर ई-रिक्शा चलाने वाला ड्राइवर, एक ढाबे पर फास्ट फूड बनाने वाला कामगार, और एक युवक जिसने अभी 12वीं पास की थी. ये सब भारत के गरीब शहरी और ग्रामीण लोगों के आम चेहरे हैं. ये लोग छोटे, एक कमरे के घरों में रहते हैं जहां अगला खाना रोज की कमाई पर निर्भर करता है. गाजियाबाद पुलिस के अनुसार, ये लोग पाकिस्तान से चल रहे एक बड़े जासूसी नेटवर्क के निचले स्तर के सदस्य थे.
इन शहरों की तंग गलियों में डर और अलगाव का माहौल है. आरोपियों के परिवार ज्यादातर छिप गए हैं, और पड़ोसी उन्हें ‘जासूस’ और ‘आतंकवादी’ कह रहे हैं. लेकिन घर के अंदर परिवार कुछ और कहानी बताते हैं. उनका कहना है कि उनके बच्चों को कुछ लोगों ने “फंसाया” और “धमकाया” ताकि वे यह काम करें.

इस जासूसी नेटवर्क का दायरा लगातार बढ़ रहा है. 14 मार्च के बाद हुई घटनाओं के बाद, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने तीन और लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने बताया कि इस मामले में UAPA के तहत भी केस जोड़ा गया है. अब तक 15 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं और 6 नाबालिग पकड़े गए हैं.
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने सेना के ठिकानों और रेलवे स्टेशनों की वीडियो बनाकर पाकिस्तान में बैठे लोगों को भेजी. उन्हें ऐसे ऐप इस्तेमाल करना सिखाया गया था जो फोटो पर GPS लोकेशन और समय खुद जोड़ देते हैं. इसके अलावा, उन्हें सोलर से चलने वाले SIM वाले CCTV कैमरे लगाने का काम भी दिया गया था.
आरोपियों के नाम हैं: समीर उर्फ शूटर (20), समीर (22), शिवराज (18), नौशाद अली (20), मीरा (28), सुहेल मलिक उर्फ रोमियो (23), इरम उर्फ महक (25), प्रवीण (19), राज वाल्मीकि (21), शिवा वाल्मीकि (20), ऋतिक गंगवार (23), गणेश (20), विवेक (18), गगन कुमार प्रजापति (22), और दुर्गेश निषाद (26).
‘धमकाकर कराया गया’
भोवापुर, गाजियाबाद का एक घनी आबादी वाला इलाका है जहां ज्यादातर मजदूर रहते हैं जो यूपी, बिहार और महाराष्ट्र से आए हैं. यहां की गलियां बहुत तंग हैं और नालियां खुली रहती हैं. अब यही जगह इस जासूसी नेटवर्क का “केंद्र” बन गई है.
58 साल के अरविंद वाल्मीकि, जो औरैया से हैं और मजदूरी करते हैं, अपने घर के बाहर बैठे हैं. वे 16 मार्च का दिन याद करते हैं जब वे अपने बेटे राज से जेल में मिले. “उसने बताया कि सुहेल ने उसे धमकाया था,” अरविंद कहते हैं. “सुहेल ने कहा था कि अगर उसने तीन सिम कार्ड ऋतिक को नहीं दिए तो उसकी बहन को उठा लिया जाएगा.”
अरविंद बताते हैं कि उनके बेटे का बैंक खाता भी नहीं था. वह आनंद विहार में पराठे की दुकान पर रात में काम करता था और दिन में सोता था. उन्हें विश्वास नहीं होता कि उनका बेटा ऐसे आरोप में जेल में है.
“मेरा बेटा टीवी का तार तक ठीक नहीं कर सकता,” अरविंद कहते हैं. “वह CCTV कैमरा कैसे लगाएगा?”
पास में रहने वाली लता वाल्मीकि घरों में काम करती हैं. उनके बेटे शिवा की गिरफ्तारी के बाद से वह टूट गई हैं. शिवा ने हाल ही में 12वीं पास की थी और छोटे-मोटे काम करता था. कभी मेडिकल दुकान पर बिल प्रिंट करता था, कभी चाय की दुकान पर काम करता था.

लता बताती हैं कि जब उन्होंने 15 मिनट के लिए बेटे से बात की, “वह रोने लगा.”
“उसने कहा कि सुहेल उसका फोन घंटों ले लेता था और इस्तेमाल करता था. अगर वह मना करता तो उसे बुरा होने की धमकी देता था,” लता रोते हुए कहती हैं. “मैंने हमेशा उसे बुरी संगत से दूर रहने को कहा, लेकिन वह नहीं माना.”
“मैं पढ़ी-लिखी नहीं हूं. मैंने न अखबार पढ़ा है, न पुलिस की फाइल. मुझे सिर्फ इतना पता है कि मेरे बेटे को फंसाया गया है.”
मोहल्ले में शर्म
भोवापुर में अब लोग एक-दूसरे से कट गए हैं. गलियों में लोग फुसफुसाते हैं, “ये पाकिस्तान के लिए काम कर रहे थे,” “क्या आप जासूसी वाले लड़कों को ढूंढ रहे हैं?”
18 साल के विवेक की मां पिंकी के लिए यह बहुत बड़ी शर्म की बात है. वह अपने एक कमरे के घर से बाहर नहीं निकलती. विवेक बस स्टैंड पर बीड़ी और पानी बेचता था और परिवार का अकेला कमाने वाला था.

“वह मेरा सहारा था,” वह पर्दे के पीछे से कहती हैं. “वह बर्तन साफ करता था, छोटे-मोटे काम करता था.” विवेक को बस स्टैंड से ही उठा लिया गया.
पिंकी को अपने बेटे के बारे में पड़ोसियों से पता चला. उसके पास वकील करने के पैसे नहीं हैं और उसका पति बीमार है. “मोहल्ले में सब बात कर रहे हैं. मैं कहां जाऊं? अपना चेहरा कहां छुपाऊं? मेरा बेटा ऐसा कैसे कर सकता है?”
मेरठ के पार्टापुर में भी ऐसा ही माहौल है. गणेश, जो नेपाल से आया मजदूर है, एक फास्ट फूड दुकान पर काम करता था. वह 12,000 रुपये महीने कमाता था.
माधव प्रसाद, जो उसका मालिक और दोस्त है, कहते हैं, “गणेश पहले PG में कुक था. वह झाड़ू लगाता था, बर्तन साफ करता था. उसे घर पैसे भेजने थे. उसकी पत्नी और बच्चा भी है.”

माधव, सुहेल और गणेश एक ही घर में किराए पर रहते थे. “मैं उसे कहता था कि सुहेल से दूर रहो और काम पर ध्यान दो,” वह कहते हैं. अब लोग उसकी दुकान को शक की नजर से देखते हैं.
“मुझे नहीं लगता वह जासूसी कर रहा था. वह दोस्ती की वजह से फंस गया. लेकिन इस बदनामी का क्या करें, समझ नहीं आता.”
गणेश और सुहेल का किराए का घर भी अब चर्चा का विषय बना हुआ है.

‘शांत हैंडलर’
फरीदाबाद के बाहरी इलाके में बसे शांत और धूल भरे गांव नौचाली में, एक स्थानीय पेट्रोल पंप जांच का केंद्र बन गया है. तीन महीने पहले, नौशाद अली यहां एक छोटा पंक्चर बनाने की दुकान चलाने आया था. इस एक साल पुराने पेट्रोल पंप के कर्मचारियों के अनुसार, नौशाद अपने आप में रहता था और स्थानीय लोगों से ज्यादा बात नहीं करता था.
गाजियाबाद पुलिस की जांच के अनुसार, नौशाद अली, सुहेल मलिक और समीर उर्फ शूटर इस गिरोह के मुख्य सदस्य थे.
“वह हमारे साथ खाना नहीं खाता था, न बैठता था. हम दिनभर लंबी ड्यूटी करते हैं,” पेट्रोल पंप कर्मचारी प्रहलाद कहते हैं. “वह अपनी दुकान में या पंप के एक छोटे कमरे में सोता था.”
दूसरे कर्मचारी मोनू ने बताया कि नौशाद अक्सर दिल्ली जाता था और कहता था कि रिश्तेदारों से मिलने जा रहा है. हालांकि, गाजियाबाद पुलिस ने समीर उर्फ शूटर को दिल्ली के बल्लीमारान से गिरफ्तार किया.

नौचाली के इस ग्रामीण इलाके में यह खबर हर बातचीत का हिस्सा बन गई है. कहीं अखबार में नौशाद की पुलिस हिरासत वाली फोटो दिखती है, तो कहीं प्रहलाद मोनू को गिरफ्तारी की कहानी बता रहा है.
“पिछले हफ्ते पुलिस आई. उन्होंने मुझसे पूछा नौशाद कौन है, और मैंने उसे दिखा दिया. पुलिस उसे सीधे उठा ले गई. उसे कुछ पूछने या बोलने का मौका भी नहीं दिया. हम सब हैरान रह गए. हमें लगा चोरी या कोई छोटा मामला होगा…,” प्रहलाद मोनू से कहते हैं. मोनू शक के साथ सिर हिलाता है.
पूरा गांव हैरान है. “अब गांव में सब सोचते हैं कि नौशाद आतंकवादी था. हमें कैसे पता कि वह फोन पर क्या करता था? हमारा उससे कोई लेना-देना नहीं है,” एक और कर्मचारी दिनेश यादव गुस्से में कहते हैं.
20 साल का नौशाद आठवीं तक पढ़ा है और बिहार के मुजफ्फरपुर का रहने वाला है. उसने इस नौकरी के लिए पेट्रोल पंप के पुराने मैनेजर से संपर्क किया था. वह अपनी कुछ औजारों के साथ, टाइल वाली जमीन पर, नीले तिरपाल के नीचे रहता था.
इंस्टाग्राम पर भर्ती
मंगलवार को एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस नय्यर ने कहा कि अब तक की जांच में यह पाया गया है कि गिरफ्तार लोग देश विरोधी गतिविधियों में शामिल थे और गोपनीय जानकारी विदेश भेज रहे थे, जिसका गलत इस्तेमाल हो सकता है. इसलिए UAPA की धारा 18 जोड़ी गई है.
“यह गिरोह सीमा पार से चल रहा था. समीर उर्फ शूटर ने पूछताछ में बताया कि 2023-24 में उसने सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ अपनी फोटो और वीडियो डाली थी. इसके बाद नौशाद और सुहेल ने उससे संपर्क किया और उसे कई व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा,” नय्यर ने कहा.
पुलिस के अनुसार, इसके बाद उसे धीरे-धीरे कई काम दिए गए. इसमें सुरक्षा बलों के ठिकानों और अन्य महत्वपूर्ण जगहों, जैसे रेलवे स्टेशन, की रेकी करना शामिल था. उनसे फोटो, वीडियो और GPS लोकेशन मांगी जाती थी, जो विदेशी नंबरों पर भेजी जाती थी.
दूसरे आरोपी समीर ने पुलिस को बताया कि 2024 के अंत में उसकी मुलाकात नौशाद से इंस्टाग्राम पर हुई और दोनों बात करने लगे.

“कुछ समय बाद नौशाद ने उसे एक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा, जिसमें मीरा पहले से थी. इसी ग्रुप के जरिए उसकी मीरा से पहचान हुई. मीरा के कहने पर वह मध्य प्रदेश में पिस्टल तस्करी में भी शामिल हुआ,” एडिशनल सीपी ने कहा.
“2025 में वह इस सीमा पार चल रहे गिरोह के संपर्क में आया. उसने कई सुरक्षा ठिकानों और रेलवे स्टेशनों की रेकी की और उनकी फोटो, वीडियो और GPS लोकेशन विदेशी नंबरों पर भेजी.”
शिवराज ने पूछताछ में बताया कि वह साहिल के जरिए इस गिरोह से जुड़ा. साहिल के कहने पर उसने सोनीपत में CCTV कैमरे लगाए, जिनकी फुटेज कहीं और भेजी जाती थी, और इसके बदले उसे पैसे मिलते थे, पुलिस ने बताया.
वहीं मीरा, जिसके दो बच्चे हैं और जो अपने पति से अलग रहती है, मथुरा के औरंगाबाद इलाके में ई-रिक्शा चलाती है. उसे पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आर्म्स एक्ट के मामले में गिरफ्तार किया था. लेकिन पिछले साल सितंबर में पटियाला हाउस कोर्ट ने मानवीय आधार पर उसे जमानत दे दी थी.
कोर्ट ने कहा था, “आवेदक एक महिला है और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, जैसा कि पुलिस रिकॉर्ड से पता चलता है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह 5 और 9 साल के दो छोटे बच्चों की मां है, जिन्हें उसकी देखभाल की जरूरत है.”
“यदि उसे जेल में रखा जाता है, तो इससे बच्चों के शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ेगा और लंबे समय तक नुकसान हो सकता है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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