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Sunday, 14 June, 2026
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मुंबई की हाउसिंग सोसाइटी के कुत्ते की संदिग्ध हत्या से आक्रोश, पुलिस जांच शुरू

मुंबई की एक हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले लोगों का पसंदीदा कम्युनिटी डॉग मिकी की कथित तौर पर बेरहमी से मौत हो गई. एफआईआर में पशु क्रूरता और सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ की आशंका जताई गई है, और कार्यकर्ता जवाबदेही की मांग कर रहे हैं.

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मुंबई: अभिनेता मंजरी फडनिस की एक इंस्टाग्राम रील, जिसमें उन्होंने अपनी हाउसिंग सोसाइटी के सामुदायिक कुत्ते मिकी की कथित हत्या का जिक्र किया, सोशल मीडिया पर भारी नाराजगी का कारण बनी है. इसके बाद पशुओं की सुरक्षा को लेकर फिर से मांग उठने लगी है.

करीब छह साल तक मिकी मुंबई के माध आइलैंड स्थित आलीशान टाउनशिप रिहेजा एक्सोटिका की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था. वह सोसाइटी के अंदर रहता था और सुरक्षा गार्डों के आसपास ही सोता था. आरोप है कि 27 मई की सुबह तड़के उसे बेरहमी से पीटा गया, अधमरी हालत में बोरे में भरकर सोसाइटी की दीवार के बाहर फेंक दिया गया.

6 जून को मालवणी पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के मुताबिक शिकायतकर्ता, अभिनेता और सोसाइटी निवासी संकेत कदम ने बताया कि करीब आठ साल का सामुदायिक कुत्ता मिकी रिहेजा एक्सोटिका से लापता हो गया था. कदम ने कहा कि सोसाइटी के लोग नियमित रूप से मिकी को खाना खिलाते थे और उसके टीकाकरण का भी ध्यान रखते थे.

दिप्रिंट के पास मौजूद एफआईआर में अज्ञात आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 325 (पशु क्रूरता) और धारा 238 (सबूत से छेड़छाड़) तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

एफआईआर के मुताबिक, कदम को 29 मई को पता चला कि मिकी कई दिनों से सोसाइटी में दिखाई नहीं दे रहा था. इसके बाद निवासियों ने पूरे परिसर में उसकी तलाश की, लेकिन वह नहीं मिला. एफआईआर में कहा गया है कि बाद में निवासियों को हाउसकीपिंग स्टाफ से पता चला कि मिकी को पीट-पीटकर मार दिया गया और उसके शव को फेंक दिया गया.

एफआईआर में यह आरोप भी दर्ज है कि जब निवासियों ने सोसाइटी का सीसीटीवी फुटेज देखने की कोशिश की, तो प्रबंधन और सोसाइटी के कर्मचारियों ने कहा कि फुटेज फॉर्मेट कर दिया गया है और उन्हें देखने नहीं दिया गया.

संकेत कदम के साथ मिकी | विशेष व्यवस्था

एफआईआर में कहा गया है, “जब मिकी कहीं नहीं मिला तो मैंने हाउसिंग सोसाइटी के सचिव सुदेश मलिक और हाउसकीपिंग स्टाफ से उसके बारे में पूछा, लेकिन उन्होंने बहुत सामान्य जवाब दिए. इसके बाद मैंने सोसाइटी मैनेजर राम कनोजिया और हाउसकीपिंग सुपरवाइजर करण से सीसीटीवी फुटेज मांगा. उन्होंने कहा कि फुटेज फॉर्मेट कर दिया गया है और हमें उसे देखने से मना कर दिया.”

एफआईआर में कदम ने यह भी आरोप लगाया कि सोसाइटी प्रबंधन और हाउसकीपिंग स्टाफ पहले भी मिकी को सोसाइटी से बाहर निकालने की कोशिश कर चुके थे. उन्होंने कहा, “हमारी सोसाइटी के सचिव और हाउसकीपिंग स्टाफ मिकी को सोसाइटी में नहीं रखना चाहते थे और उसे हटाने की कई कोशिशें कर चुके थे.”

मालवणी पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि मामले की जांच जारी है और सीसीटीवी के डीवीआर को जांच के लिए फॉरेंसिक टीम को सौंप दिया गया है. उन्होंने कहा, “हम इस समय सीसीटीवी से किसी तरह की छेड़छाड़ की जांच कर रहे हैं. फॉरेंसिक टीम फुटेज वापस लाने की कोशिश कर रही है. जांच अभी जारी है.”

मिकी कौन था?

मंजरी फडनिस ने दिप्रिंट से कहा, “मिकी अचानक 2019 या 2020 के आसपास हमारी सोसाइटी में आया था. शुरुआत में लगा कि वह कहीं खो गया है या उसके परिवार ने उसे छोड़ दिया है. उस समय वह छोटा भी था और इस नई जगह पर किसी खोए हुए बच्चे की तरह लगता था. धीरे-धीरे हममें से कई लोग उसके दोस्त बन गए और वह हमारी सोसाइटी का एक अहम हिस्सा बन गया.”

सोसाइटी में रहने वाली और शहर में एक पेट बेकरी चलाने वाली पुनिता चौधरी ने दिप्रिंट को बताया कि 9 मई को सोसाइटी के चौकीदारों को मिकी का आक्रामक तरीके से पीछा करते हुए देखा गया था.

उन्होंने कहा, “हमने एक दिन देखा कि चौकीदार मिकी का बहुत आक्रामक तरीके से पीछा कर रहे थे. यह सिर्फ उसे कुछ जगहों पर जाने से रोकने की बात नहीं थी, बल्कि बहुत आक्रामक ढंग से उसका पीछा किया जा रहा था.”

लेकिन चौधरी ने कहा कि सोसाइटी के निवासी मिकी और वहां रहने वाले दूसरे कुत्तों के साथ बहुत दोस्ताना व्यवहार रखते थे. उन्होंने कहा, “यहां ज्यादातर लोग पशु प्रेमी हैं और उनके अपने पालतू कुत्ते हैं. हमारे लिए सामुदायिक कुत्ते हमारे कुत्तों का ही विस्तार थे और हम सभी का उनके साथ एक रिश्ता था.”

फडनिस को याद है कि उन्होंने मिकी को आखिरी बार 24 और 25 मई के आसपास देखा था. 27 मई को उन्होंने देखा कि वह अपनी सामान्य जगह पर नहीं था. उन्होंने कहा, “मुझे याद है कि 27 मई को जब मैं बाहर जा रही थी तो वह नहीं दिखा. जब मैं रात करीब 10.30 बजे घर लौटी तो भी वह नहीं दिखा. मैंने गार्ड से पूछा कि मिकी कहां है. उन्होंने कहा, हमें नहीं पता.”

ग्रूमिंग के बाद मिकी के साथ मंजरी फडनिस | विशेष व्यवस्था

29 मई तक उन्हें चिंता होने लगी. उन्होंने कहा, “उस पूरे दिन भी मुझे मिकी नहीं दिखा. तब मैं थोड़ी परेशान हो गई. मैं बी2 इलाके में घूम-घूमकर उसका नाम पुकारने लगी. मैंने गार्डों से पूछा, क्या तुमने मिकी को देखा? किसी ने उसे नहीं देखा था.”

इसके बाद उन्होंने संकेत कदम से संपर्क किया. कदम ने दिप्रिंट को बताया कि 20-30 लोगों की एक टीम ने पूरे रिहेजा एक्सोटिका टाउनशिप में मिकी को ढूंढना शुरू किया. 1 जून को उन्होंने पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई.

उन्होंने कहा, “मिकी एक शांत स्वभाव का कुत्ता था और अपने में रहता था. वह कभी भागने वाला कुत्ता नहीं था. शुरुआत में हमें लगा कि वह कहीं खो गया है, इसलिए हमने गड़बड़ी की आशंका के साथ गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई, लेकिन उस समय हमें सिर्फ यह लगा कि शायद उसे कहीं और ले जाया गया हो.”

करीब 3 जून को फडनिस ने पशु कल्याण कार्यकर्ता जेवियर सैंटियागो से संपर्क किया. सैंटियागो मुंबई की गैर-लाभकारी संस्था योडा (यूथ ऑर्गनाइजेशन इन डिफेंस ऑफ एनिमल्स) से जुड़े हैं, जो आवारा, छोड़े गए और प्रताड़ित कुत्तों और बिल्लियों को बचाने और उनका पुनर्वास करने का काम करती है. वह भारतीय पशु कल्याण बोर्ड में भी पंजीकृत हैं.

तलाश में क्या सामने आया

सैंटियागो ने दिप्रिंट को बताया कि शुरुआत में इस मामले को एक लापता कुत्ते का मामला माना गया था. इसके लिए एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) केंद्रों और पशु कल्याण नेटवर्क के जरिए तलाश की गई, लेकिन कुछ नहीं मिला.

सैंटियागो के मुताबिक, 4 जून को मामला बदल गया, जब निवासियों और कार्यकर्ताओं की मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से हुई, जिसने दावा किया कि उसे पता है कि क्या हुआ था.

उन्होंने कहा, “4 जून को जब हम इस मामले की जांच कर रहे थे और लोगों, सुरक्षा गार्डों और चौकीदारों से बात कर रहे थे, तब हमारी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से हुई, जिसने संकेत दिया कि उसे पूरी घटना की जानकारी है. उसी ने हमें बताया कि मिकी को कहीं और नहीं ले जाया गया और वह लापता भी नहीं हुआ, बल्कि उसकी बेरहमी से हत्या की गई.”

उन्होंने कहा कि उस व्यक्ति ने दावा किया कि उसे यह बात एक हाउसकीपिंग कर्मचारी से पता चली, जो कथित रूप से इस घटना में शामिल था. सैंटियागो के अनुसार, उस व्यक्ति ने एक हाउसकीपिंग कर्मचारी का नाम मुख्य आरोपी के रूप में बताया.

सैंटियागो ने कहा कि आरोप है कि वैभव कोहली 27 मई की सुबह तड़के सोसाइटी में दाखिल हुआ, जबकि उसका वहां आने का कोई काम नहीं था.

उन्होंने कहा, “उस व्यक्ति के मुताबिक, वैभव सुबह करीब 2 बजे से 6 बजे के बीच सोसाइटी में आया. उसने मिकी को सोसाइटी के एक कोने में सोते हुए देखा, जहां वह हमेशा सोता था.”

उन्होंने कहा, “संभव है कि मिकी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी या भागने की कोशिश नहीं की, क्योंकि यह हाउसकीपिंग कर्मचारी लंबे समय से वहां काम कर रहा था. इसलिए मिकी उसे जानता था और उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.”

सैंटियागो के अनुसार, उस व्यक्ति ने बताया कि पहले मिकी को किसी वस्तु से पीटा गया.

उन्होंने कहा, “यह नहीं पता कि उसे किस चीज से मारा गया, लकड़ी से या लोहे की रॉड से, लेकिन किसी चीज से उसे मारने की नीयत से पीटा गया. उस व्यक्ति ने कहा कि मिकी के जबड़े में चोट लगी होगी, लेकिन वह मरा नहीं था.”

सैंटियागो ने कहा कि उस व्यक्ति के मुताबिक, “जब मिकी अधमरा था, तब आरोपी ने उसे बोरे में भरा और सोसाइटी की दीवार के बाहर फेंक दिया, जहां एक नाला और कचरा फेंकने जैसी जगह है. उसे फेंकने के बाद वह वहां से चला गया.”

यह जानकारी सामने आने के बाद सैंटियागो ने कहा कि वह मालवणी पुलिस स्टेशन गए और वरिष्ठ निरीक्षक शैलेंद्र नागरकर से मिले. उन्होंने कहा कि 5 जून को चार संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया, लेकिन उन्होंने किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार कर दिया. अगले दिन कदम की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई.

‘कैमरे बंद थे’

सैंटियागो ने आरोप लगाया कि शुरू में निवासियों को सीसीटीवी फुटेज तक पहुंचने में दिक्कत हुई.

उन्होंने कहा, “उस समय तक हमारे पास कोई सबूत नहीं था, क्योंकि तब तक सचिव सुदेश मलिक हमारा सहयोग नहीं कर रहे थे. वह हमें सीसीटीवी नहीं दिखा रहे थे और अपने हाउसकीपिंग या सुरक्षा कर्मचारियों को हमसे बात तक नहीं करने दे रहे थे.”

दिप्रिंट ने मलिक से उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर संदेश भेजकर संपर्क किया है. जवाब मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.

सैंटियागो के मुताबिक, जब डेटा निकालने के लिए एक तकनीशियन बुलाया गया, तो पता चला कि कथित अपराध वाली जगह के कैमरे रिकॉर्डिंग नहीं कर रहे थे.

उन्होंने कहा, “जब तकनीशियन डेटा वापस लाने की कोशिश कर रहा था, तब हमें पता चला कि उसी दिन कैमरे को हाथ से बंद किया गया था. जिस जगह घटना हुई, वहां तीन या चार कैमरे लगे थे और ठीक वही कैमरे काम नहीं कर रहे थे.”

उन्होंने आगे कहा, “जब मैंने तकनीशियन से पूछा कि कैमरे क्यों नहीं चल रहे थे, तो उसने कहा कि किसी ने हाथ से पिन निकाल दी थी और हार्ड ड्राइव फॉर्मेट कर दी थी.”

एफआईआर दर्ज होने के बाद सैंटियागो ने कहा कि पुलिस ने संबंधित कैमरों के डीवीआर और हार्ड डिस्क जब्त कर उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया.

7 जून को मोबाइल फॉरेंसिक टीम और अपराध जांच इकाई भी सोसाइटी पहुंची और उस जगह से नमूने इकट्ठा किए, जहां निवासियों को खून के निशान होने का शक था.

लेकिन निवासियों और पशु कल्याण कार्यकर्ताओं के लिए यह मामला अब सिर्फ एक लापता कुत्ते का मामला नहीं रह गया है.

फडनिस ने कहा कि निवासी सिर्फ मिकी के लिए न्याय नहीं चाहते, बल्कि देश में पशु क्रूरता से जुड़े कानूनों में भी बदलाव चाहते हैं.

उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “मुझे सच में उम्मीद है कि हम उसके हत्यारों को सजा दिला पाएंगे और आगे चलकर पशु क्रूरता से जुड़े कानूनों को बेहतर बना पाएंगे, ताकि किसी की भी हिम्मत किसी जानवर को छूने या उसे नुकसान पहुंचाने की न हो.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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